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  • Shri Krishna Janmashtami पर आज करें उपाय, घर में आएगी सुख-समृद्धि

    Shri Krishna Janmashtami पर आज करें उपाय, घर में आएगी सुख-समृद्धि

    धर्मः घर में सुख शांति, समृद्धि और सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए कृष्ण जन्माष्टमी का दिन बेहद शुभ माना जाता है। आज देश भर में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बड़े धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस दिन हिंदू धर्म के लोग कृष्ण भगवान का जन्मोत्सव मनाते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन कुछ ज्योतिषी और वास्तु उपाय करने पर उनका अधिक फल प्राप्त होता है। इन उपायों का वर्णन धार्मिक ग्रंथो में भी किया गया है, जिनको विधि विधान और पवित्रता के साथ करने पर लाभ प्राप्त होता है।

    ज्योतिष के अनुसार लड्डू गोपाल यानी ठाकुर जी का जन्मोत्सव हिंदू धर्म के लोग बेहद ही धूमधाम के साथ मनाते हैं। इस दिन कुछ खास उपाय करने पर जीवन में सुख समृद्धि, खुशहाली का आगमन होता है। जन्माष्टमी के दिन अशोक के पेड़ के पत्ते घर के बाहर झालर बनाकर लगाने चाहिए। जन्माष्टमी के दिन ऐसा करना शुभ माना जाता है। साथ ही घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर मोर पंख भी लगाना चाहिए। ऐसा करने से घर की सभी नकारात्मक ऊर्जा बाहर चली जाती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। घर के मुख्य द्वार पर यह लगाने से कोई भी गलत और नकारात्मक ऊर्जा घर के अंदर प्रवेश नहीं करती है।

    कृष्ण जन्माष्टमी के दिन जब लड्डू गोपाल को घर में स्थापित करें तो उन्हें उत्तर दिशा में स्थापित करना चाहिए। उत्तर दिशा बेहद शुभ होती है जो सुख समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है। यदि ऐसा संभव ना हो तो पूर्व दिशा में भी स्थापित कर सकते हैं। उत्तर दिशा कृष्ण भगवान के लिए सबसे अधिक शुभ मानी गई है जो समृद्धि खुशहाली के साथ कृष्ण भगवान सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण कर देते हैं। शाम के समय तुलसी के पेड़ के पास गाय के देसी घी का दीपक जलने से जीवन में सुख समृद्धि आगमन होता है और भगवान कृष्ण सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं।

  • जन्माष्टमी पर कैसे करें लड्डू गोपाल का श्रृंगार? जानें कैसे लगाएं भोग

    जन्माष्टमी पर कैसे करें लड्डू गोपाल का श्रृंगार? जानें कैसे लगाएं भोग

    धर्मः जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन वृंदावन में अद्भुत रौनक देखने को मिलती है। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां पहुंचकर इस उत्सव को देखते हैं। श्रीकृष्ण केवल भगवान ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण जीवन दर्शन का प्रतीक हैं। उनकी हर लीला में जीवन में बड़ी सीख हो सकती है। जन्माष्टमी पर भगवना का विशेष श्रृंगार भी किया जाता है और विविध प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों का भोग भी अर्पित किया जाता है।

    कृष्ण जन्माष्टमी की अष्टमी तिथि 15 अगस्त को रात 11 बजकर 49 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 16 अगस्त को रात 9 बजकर 34 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, इस साल 16 अगस्त शनिवार को जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा। जन्माष्टमी का पूजन मुहूर्त 16 अगस्त को रात 12 बजकर 4 मिनट पर शुरू होकर 12 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा। जिसकी अवधि कुल 43 मिनट की रहेगी।

    कैसे करें श्रीकृष्ण का श्रृंगार?
    श्रीकृष्ण का श्रृंगार प्रेम, श्रद्धा और पूरे भक्ति भाव से करना चाहिए। सबसे पहले भगवान को स्नान करवाकर स्वच्छ करें, फिर एक साफ कपड़े पर बैठाकर श्रृंगार शुरू करें।

    श्रृंगार में ताजगी और सुंदरता लाने के लिए फूलों का खूब प्रयोग करें. गेंदा, गुलाब, मोगरा या चमेली के फूल भगवान को अति प्रिय हैं। भगवान को पीले रंग के वस्त्र पहनाएं, क्योंकि पीला रंग उनका सबसे पसंदीदा रंग माना जाता है।
    इसके बाद उनके माथे, गले और हाथों में चंदन का लेप लगाएं। यह न केवल भगवान के श्रृंगार को सुंदर बनाता है, बल्कि पूरे वातावरण में मधुरता और पवित्रता भी घोल देती है।

    इस बात का खास ध्यान रखें कि श्रृंगार में काले रंग का प्रयोग न करें, क्योंकि यह अशुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो भगवान को वैजयंती के फूल अर्पित करें। वैजयंती के फूल की माला भगवान को अत्यंत प्रिय होती है। अंत में उनके सिर पर मोरपंख वाला मुकुट या पगड़ी सजाएं। गले में फूलों की माला पहनाएं और हाथ में बांसुरी रखें। इस तरह आपका श्रृंगार न केवल सुंदर दिखेगा, बल्कि उसमें भक्ति और प्रेम की झलक भी दिखाई देगी। श्रृंगार के बाद लड्डू गोपाल को झूले पर विराजमान करें और झूले को फूलों से सजाएं। साथ ही भजन-कीर्तन के साथ भगवान को धीरे-धीरे झुलाएं।

    प्रसाद में पंचामृत अवश्य शामिल करें और उसमें तुलसी दल डालना न भूलें, क्योंकि तुलसी भगवान को अत्यंत प्रिय है। साथ ही मेवा, माखन और मिश्री का भोग लगाएं। बाजार में मिलने वाले मिश्री के दाने की जगह अगर आप धागे वाली मिश्री को पीसकर इसका प्रसाद में प्रयोग करें तो ये ज्यादा उत्तम होगा। कई स्थानों पर धनिये की पंजीरी भी अर्पित की जाती है, जो प्रसाद का विशेष भाग होती है। इस दिन प्रसाद में पूर्ण सात्विक भोजन शामिल करें, जिसमें आप पूरी, हलवा, सब्जी, खीर और लड्डू जैसे व्यंजन शामिल कर सकते हैं। मान्यता है कि इससे भक्त को मनोवांछित फल प्राप्त होता है।

  • Kajari Teej: इस विधि से करें मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा, मिलेगा मनचाहा वरदान

    Kajari Teej: इस विधि से करें मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा, मिलेगा मनचाहा वरदान

    धर्म: कजरी तीज का व्रत विवाहित महिलाओं के लिए बहुत जरुरी माना जाता है। इसको अखंड सौभाग्य प्रदान करने वाला व्रत भी कहते हैं। इस साल कजरी तीज का त्योहार 12 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान के साथ व्रत करने पर महिलाओं को भगवान शिव और मां पार्वती का आशीर्वाद भी मिलता है। यह व्रत अविवाहित लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए रखती हैं।

    कब है कजरी तीज?

    यह त्योहार हर साल राखी के तीन दिन बाद और हरियाली तीज के 15 दिनों बाद भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि वाले दिन मनाया जाता है। इस साल तृतीया तिथि 11 अगस्त सुबह 10:33 पर शुरु होगी और 12 अगस्त सुबह 8:40 पर खत्म होगी। उदयातिथि के अनुसार, व्रत 12 अगस्त को रखा जाएगा।

    ऐसे करें पूजा

    यदि आप पहली बार तीज का व्रत रखने वाले हैं तो सुबह स्नान-ध्यान करने के बाद व्रत का संकल्प लें। फिर घर के ईशान कोण, उत्तर या पूर्व दिशा में हरे कपड़े के साथ सजी हुई चौंकी पर भगवान शिव और मां पार्वती की मूर्ति या चित्र रखें। फिर फूल, फल, धूप, दीप, रोली, अक्षत और श्रृंगार सामग्री के साथ पूजा करें। मां पार्वती को विशेष तौर पर श्रृंगार सामान अर्पित करें। पूजा के बाद कजरी तीज की कथा का पाठ करें या फिर सुनें। इसके बाद आरती उतारकर भगवान शिव और मां पार्वती को प्रणाम करें। इसके बाद घर की बुजुर्ग महिलाओं का आशीर्वाद लें। व्रत का समापन रात में चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य अर्पित करने के बाद करें।

    व्रत के नियम

    इस दिन हर रंग के कपड़े पहनें और 16 श्रृंगार करें। यदि स्वास्थ्य अच्छा है तो निर्जला व्रत रखें। इस दिन बाल धोना या फिर कटवाना वर्जित है। क्रोध, आलोचना और नेगेटिव भावों से बचें। पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:33 से लेकर शाम 5:06 तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:02 से लेकर 12:50 तक का रहेगा।  
  • Rakshabandhan के दिन करें ये उपाय, भाई-बहन को मिलेगी तरक्की

    Rakshabandhan के दिन करें ये उपाय, भाई-बहन को मिलेगी तरक्की

    धर्मः रक्षाबंधन का त्योहार भाई और बहन के लिए विशेष होता है। इस दिन हर बहन अपने भाई के कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और उनके जीवन में सुख-समृद्धि बने रहने की कामना करती है। वहीं, रक्षाबंधन पर भगवानों को राखी बांधने का भी विशेष महत्व होता है। अगर आप राखी बांधने के साथ-साथ इस खास अवसर पर सुबह के समय कुछ आसान उपाय कर लें, तो इससे भाई और बहन के जीवन में खुशहाली आ सकती है। साथ ही, जीवन में तरक्की, धन और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

    रक्षाबंधन पर भाई को राखी बांधने से पहले सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करना चाहिए। इसके बाद, भगवान की विधि-पूर्वक पूजा करें और आरती की थाली में सभी राखी रखें। साथ ही, उसमें एक चांदी का सिक्का भी रख लें। अगर ऐसा संभव न हो तो आप एक रुपये का सिक्का भी रख सकती हैं। अब भगवान गणेश को राखी जरूर बांधें और सिक्के को मंदिर में रख दें। अगले दिन मंदिर में पूजा करके सिक्का को उठकर लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रख लें। इससे जीवन से पैसों की समस्या दूर हो सकती है और धन में वृद्धि होती है।

    माना जाता है कि रक्षाबंधन पर सबसे पहले भगवान शिव का अभिषेक जरूर करना चाहिए। इससे बेहद शुभ फल की प्राप्ति होती है। इसके लिए आप दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से महादेव का अभिषेक कर सकते हैं। इसके बाद, विधि-विधान से पूजा करके शिवजी को राखी भी जरूर बांधें। इस उपाय को करने से जातक को जीवन में तरक्की प्राप्त हो सकती है और भाई-बहनों के जीवन से हर प्रकार के कष्ट भी दूर होने लगते हैं।

    इसके लिए रक्षाबंधन के दिन सुबह उठकर स्नानादि करने के बाद साफ वस्त्र धारण करें और माता लक्ष्मी व गणेश जी की विधि पूर्वक पूजा करें। साथ ही, 108 बार ‘ओम श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का जाप करें। साथ ही, ‘ओम गण गणपतये नमः’ मंत्र का भी 108 बार जाप करें। इस उपाय को करने से जातक को घर की समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है और जीवन में सुख-शांति व समृद्धि बनी रहती है। इस उपाय को करने से माता लक्ष्मी की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है।

  • हरियाली तीज में बनाएं ये दो Dishes, बच्चे हो या बड़े सभी को आएंगी बेहद पसंद

    हरियाली तीज में बनाएं ये दो Dishes, बच्चे हो या बड़े सभी को आएंगी बेहद पसंद

    धर्मः हरियाली तीज का त्योहार सिर्फ व्रत और पूजा का नहीं, बल्कि घर में बने खास पकवानों से भी जुड़ा होता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं, सजती-संवरती हैं और शाम को शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। पूजा के बाद घर में मिठाइयों और पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू फैल जाती है। तीज के दिन कुछ खास डिशेज बनाई जाती हैं जो स्वाद के साथ-साथ परंपरा से भी जुड़ी होती हैं। इन डिशेज को परिवार के साथ मिलकर खाना और बांटना त्योहार की मिठास को दोगुना कर देता है। इन पारंपरिक पकवानों में प्यार और परंपरा दोनों का तड़का लगता है। बच्चे हो या बड़े, तीज पर बनने वाले घेवर और गुजिया सभी को बेहद पसंद आते हैं। हरियाली तीज पर बनाई जाने वाली दो सबसे पॉपुलर डिशेज- घेवर और मावे के गुजिया। ये दोनों डिशेज त्योहार को और भी स्पेशल बना देती हैं।

    1. राजस्थानी घेवर रेसिपी


    – मैदाः 1 कप
    – घीः 2 टेबलस्पून
    – ठंडा दूधः 1/2 कप
    – बर्फ के टुकड़ेः 3-4
    – पानीः 1 कप या जरूरत के अनुसार
    – शक्करः 1 कप
    – पानी (चाशनी के लिए)ः 1/2 कप
    – केसरः कुछ धागे
    – इलायची पाउडरः 1/4 टीस्पून
    – ड्राय फ्रूट्सः सजाने के लिए
    – घीः तलने के लिए

    राजस्थानी घेवर बनाने की विधि
    1. एक बड़े बर्तन में घी और बर्फ के टुकड़े डालें और हाथ या मिक्सर से तब तक फेंटें जब तक घी सफेद और क्रीमी न हो जाए।
    2. अब इसमें मैदा डालें और धीरे-धीरे ठंडा दूध और फिर पानी डालकर एकदम पतला, रनिंग बैटर बना लें। ध्यान रखें, घोल में कोई गांठ न हो।
    3. कढ़ाई में घी गर्म करें। जब घी अच्छे से गर्म हो जाए तो एक करछी घोल ऊंचाई से डालें। घोल डालते ही बुलबुले बनने लगेंगे।
    4. जैसे ही बुलबुले शांत हों, फिर से घोल डालें। यह प्रक्रिया 4-5 बार दोहराएं जब तक घेवर गोल और क्रिस्पी शेप में न आ जाए।
    5. अब इसे बाहर निकालकर ठंडा होने दें।
    6. दूसरी ओर, शक्कर, पानी और केसर मिलाकर एक तार की चाशनी तैयार करें।
    7. अब ठंडा घेवर चाशनी में डुबोएं और निकाल कर ऊपर से ड्राय फ्रूट्स और इलायची पाउडर से सजाएं। चाहें तो ऊपर से मावा या मलाई भी डाल सकते हैं।

    2. मावा गुजिया रेसिपी


    – मैदाः 1 कप
    – घीः 2 टेबलस्पून (मोयन के लिए)
    – मावाः 1 कप
    – शक्करः 1/2 कप
    – इलायची पाउडरः 1/4 टीस्पून
    – नारियल बूराः 2 टेबलस्पून
    – किशमिशः 1 टेबलस्पून
    – घीः तलने के लिए

    मावा गुजिया बनाने की विधि
    1. मैदा में घी डालकर मोयन बनाएं और सख्त आटा गूंथ लें। इसे 15-20 मिनट ढककर रखें।
    2. मावा को नॉनस्टिक पैन में हल्की आंच पर भून लें जब तक हल्का सुनहरा रंग न आ जाए। फिर इसे ठंडा होने दें।
    3. अब मावा में शक्कर, नारियल बूरा, किशमिश और इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिक्स कर लें।
    4. आटे से छोटी लोइयां बनाएं और बेल लें। बीच में मावा वाला मिश्रण रखें और आधा चांद आकार में मोड़कर किनारों को अच्छे से दबा दें।
    5. चाहें तो गुजिया मोल्ड का इस्तेमाल करें ताकि सभी गुजिया एक जैसे बनें।
    6. अब एक कढ़ाई में घी गर्म करें और धीमी आंच पर गुजिया को दोनों तरफ से सुनहरा होने तक तलें।
    7. ठंडा होने पर एयर टाइट डिब्बे में स्टोर करें।

  • इस दिन मनाई जाएगी सावन की शिवरात्रि, जानें कब होगा शुभ मुहूर्त

    इस दिन मनाई जाएगी सावन की शिवरात्रि, जानें कब होगा शुभ मुहूर्त

    धर्मः हिंदू पंचांग के अनुसार, शिवरात्रि श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाएगी। शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि सावन की शिवरात्रि के दिन व्रत करने से भगवान शिव अपने भक्त का हर मुश्किल काम आसान कर देते हैं। इस बार सावन की शिवरात्रि 23 जुलाई बुधवार को मनाई जाएगी। सावन माह की शिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाएगी। सावन शिवरात्रि तिथि की शुरुआत 23 जुलाई को सुबह 4 बजकर 39 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 24 जुलाई को अर्धरात्रि में 2 बजकर 24 मिनट पर होगा।

    सावन शिवरात्रि पूजन मुहूर्त
    निशिता काल का समय- 24 जुलाई को रात 12 बजकर 25 मिनट से लेकर 1 बजकर 08 मिनट तक रहेगा।
    प्रथम पहर पूजन का समय शाम 7 बजकर 26 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 6 मिनट तक रहेगा।
    दूसरा पहर पूजन का समय रात 10 बजकर 6 मिनट से लेकर 24 जुलाई की रात 12 बजकर 46 मिनट तक
    तीसरे पहर के पूजन का समय 24 जुलाई की रात 12 बजकर 46 मिनट से लेकर सुबह 3 बजकर 27 मिनट तक
    चौथे पहर के पूजन का समय 24 जुलाई को सुबह 3 बजकर 27 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 7 मिनट तक

    शिवरात्रि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में जलाभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है।
    – पहला मुहूर्त सुबह 4 बजकर 15 मिनट से लेकर सुबह 4 बजकर 56 मिनट तक रहेगा।
    – जलाभिषेक का दूसरा मुहूर्त- सुबह 8 बजकर 32 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 02 मिनट तक

    सावन शिवरात्रि पूजन विधि
    सावन शिवरात्रि पर सूर्योदय से पहले उठकर स्नानादि करें और फिर भगवान शिव के मंदिर भोलेनाथ और उनके परिवार की पूजा-आराधना करें। इसके बाद शिवलिंग का जल, दूध, घी, शहद आदि अन्य चीजों से रुद्राभिषेक करें। ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। फिर, शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और श्रीफल चढ़ाएं और धूप, दीप, फल और फूल से पूजा करें। इस दौरान शिव पुराण, शिव स्तुति या शिव चालीसा का पाठ कर सकते हैं।

    सावन शिवरात्रि के खास उपाय
    – किसी भी प्रकार की मनोकामना पूर्ति के लिए सावन शिवरात्रि के दिन पूजा में 21 बेल पत्र पर चंदन से “ऊं नमः शिवाय” लिख कर भगवान शिव को समर्पित करें। ऐसा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं।

    – जिन व्यक्तियों के जीवन में परेशानियों और कष्ट हैं उन्हें सावन शिवरात्रि के दिन बैल को हरा चारा खिलाना चाहिए। ऐसा करने से भगवान शिव का वाहन नंदी प्रसन्न होता है और व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि आती है।

    – इसके अलावा सुख, समृद्धि पाने और पापों को दूर करने के लिए सावन शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा करते समय शिवलिंग पर जौ और काला तिल अर्पित करें।

    – जो लोग बीमारी से परेशान हैं उन्हें सावन शिवरात्रि के दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करने और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए। इस दिन आपको 101 बार महामृत्युंजय जाप करना चाहिए। इससे आपके बड़े से बड़े रोग और कष्ट दूर होते हैं।

    – जिन जातकों के जीवन में शनि दोष चल रहा हो उन्हें सावन शिवरात्रि के दिन जल में काला तिल मिलाकर भगवान शिव को अर्पित करना चाहिए। इस दौरान “ऊं नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से आपको शनि की ढैया या साढ़ेसाती के बुरे प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।

  • कांवड़ यात्रा के पीछे क्या है इतिहास, कैसे शुरू हुई थी यात्रा, जानें

    कांवड़ यात्रा के पीछे क्या है इतिहास, कैसे शुरू हुई थी यात्रा, जानें

    धर्मः सावन महीना शुरू हो चुका है और यह माह भगवान शिव को समर्पित है। सावन मास के आरंभ के साथ शिव भक्त कांवड़ यात्रा पर निकल जाते हैं। कांवड़ यात्रा एक प्राचीन हिंदू तीर्थयात्रा है, जिसमें श्रद्धालु गंगाजल लेकर भगवान शिव का जल अभिषेक करने के लिए यह यात्रा करते हैं। माना जाता है कि भोलेनाथ इन कांवड़ियों की सभी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं। हर साल सावन में जगह-जगह पर कांवड़ियों की भीड़ देखने को मिलती है।

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ विद्वानों का मानना हैं कि भगवान परशुराम ने सबसे पहले कांवड़ यात्रा की थी। वे गढ़मुक्तेश्वर से गंगाजल लाकर बागपत स्थित पुरा महादेव मंदिर में शिव का अभिषेक करने पहुंचे थे। ऐसी भी मान्यता है कि कांवड़ यात्रा की शुरूआत भगवान राम ने की थी। कहा जाता है कि भगवान राम ने बिहार के सुल्तानगंज से गंगाजल भरकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में शिवलिंग का जलाभिषेक किया था।

    कुछ विद्वानों का मानना है कि कांवड़ यात्रा का प्रारंभ श्रवण कुमार ने त्रेता युग में किया था। उन्होंने अपने अंधे माता पिता को कांवड़ में बैठाकर तीर्थयात्रा कराई थी और हरिद्वार में गंगा स्नान भी कराया था। साथ ही वह अपने साथ गंगाजल भी लेकर आए थे।

    पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन से निकलने के बाद भगवान शिव ने विष को पीया था जिससे उनका कंठ नीला हो गया था। तब रावण ने कांवड़ में जल भरकर ‘पुरा महादेव’ पहुंचें और शिवजी का जलाभिषेक किया था। उसी समय से कांवड़ यात्रा की परंपरा शुरू हुई।

    वहीं मान्यता के अनुसारा, जब भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकलकर विष पिया था, तो देवताओं ने शिव जी के ताप को शांत करने के लिए पवित्र नदियों का जल उन पर चढ़ाया था। उसी समय से कांवड़ यात्रा शुरू हुई थी।

    पौराणिक कथा के मुताबिक, कांवड़ को कंधे पर उठाना सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि श्रद्धा और सेवा का प्रतीक है। श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता को कांवड़ में बिठाकर अपने कंधे पर उठाया था, जो सेवा भाव का प्रतीक है और श्री राम ने गंगाजल से अपने पिता दशरथ की मोक्ष के लिए कांवड़ उठाई थी। माना जाता है कि कांवड़ को कंधे पर उठाकर चलना अपने अहंकार को त्यागने का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कंधे पर कांवड़ रखकर गंगाजल लाने से सारे पाप खत्म हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • भगवान शिव करेंगे जीवन का उद्धार, बस लें ये संकल्प

    भगवान शिव करेंगे जीवन का उद्धार, बस लें ये संकल्प

    धर्मः सावन मास भगवान शिव को समर्पित खास महीना है। इस पूरे महीने में पूजा, व्रत और अभिषेक का बड़ा महत्व होता है। मान्यता है कि अगर इस शुभ समय में आप एक संकल्प लेकर नियमपूर्वक साधना करें तो न सिर्फ मन को शांति मिलेगी, बल्कि आत्मिक विकास भी होता है।

    1. ब्रह्म मुहूर्त में जागकर साधना संकल्प लें
    श्रावण मास के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से 45 मिनट पूर्व) में उठें और संकल्प लें। संकल्प का मतलब किसी व्रत, साधना या सेवा का दृढ़ निश्चय लेना है। दाहिने हाथ में चावल और गंगाजल लेकर आंखें बंद करें। इस दौरान अंगूठा और तर्जनी उंगली मोड़ें रखें। भगवान शिव के मंत्र का जाप करें। महादेव को उनका प्रिय भोग लगाएं और व्रत-उपासना करें। अगर आपने एक बार ये संकल्प ले लिया तो उसे तोड़ें नहीं, बल्कि निरंतर करते रहें।

    2. प्राणायाम/योग
    प्रत्येक दिन कम से कम 45 मिनट तक प्राणायाम या सौम्य योगासन करें। इससे शरीर और मन दोनों की ऊर्जा शुद्ध होती है और ध्यान की गहराई बढ़ती है। यह अभ्यास विशेषकर ब्रह्म मुहूर्त में करना अत्यंत लाभकारी होता है।

    3. ध्यान
    साफ, शांत स्थान पर पीठ सीधी करके बैठें और आंखें बंद करें। “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और अपने श्वास पर ध्यान केंद्रित करें। आप 11, 21, 51 या 108 माला जप कर सकते हैं। इसे आप दिन या सप्ताह में भागों में भी पूरा कर सकते हैं।

    4. सोमवार या पूरे मास उपवास रखें
    उपवास शरीर और मन दोनों की शुद्धि का माध्यम है। आप केवल सोमवार को फलाहार व्रत रख सकते हैं। यदि आप पहली बार उपवास रख रहे हैं तो फलाहार (फल, दूध आदि) से शुरुआत करें। यह उपवास तप की भावना को जागृत करता है।

    5. शिवलिंग अभिषेक करें
    प्रत्येक दिन या कम से कम हर सोमवार शिवलिंग का अभिषेक करें. यदि आपके घर में शिवलिंग है और आप मंत्रों का उच्चारण जानते हैं तो यह काम घर पर भी कर सकते हैं। अन्यथा भगवान शिव के मंदिर जाकर करें. बेलपत्र, पुष्प, भोग आदि अर्पित करें। यदि संभव हो तो ब्रह्म मुहूर्त में रुद्राभिषेक करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

  • आज से सावन माह शुरू, रखे इन बातों का खास ध्यान

    आज से सावन माह शुरू, रखे इन बातों का खास ध्यान

    धर्मः श्रावण मास हिंदू कैलेंडर का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। यह भगवान शिव की भक्ति से भरा होता है। पूरे महीने लोग भगवान शिव की विशेष पूजा करते हैं। वे व्रत रखते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं और साधना करते हैं। यह समय सिर्फ धार्मिक काम करने का नहीं है। यह अपने आप पर नियंत्रण रखने, सात्विक जीवन जीने और खुद को शुद्ध करने का भी समय है। ऐसा माना जाता है कि सावन में श्रद्धा से भगवान शिव की पूजा करने से उनकी कृपा मिलती है। इससे मन शांत होता है, काम में सफलता मिलती है और जीवन में सेहत और संतुलन बना रहता है।

    सावन में क्‍या करें
    – रोज सुबह स्नान कर शिव पूजा करें। बेलपत्र, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर से शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करें। ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें।
    – सावन के सभी सोमवार को उपवास रखें, यह भगवान शिव को विशेष रूप से प्रिय है। सोलह सोमवार व्रत भी शुभ फल देता है।
    – सावन में हरी वस्तुओं का प्रयोग करें। महिलाएं हरी चूड़ियां, हरी साड़ी, हरा बिंदी आदि पहनें। हरी सब्जियां, तुलसी और बेलपत्र का सेवन करें।
    – सावन में सात्त्विक आहार लें। सावन में फलाहार करें। हल्दी, जीरा, सेंधा नमक जैसे शुद्ध मसालों का प्रयोग करें।
    – पंचाक्षरी मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। ॐ नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का जप शिव कृपा को आकर्षित करता है।
    – ब्राह्मण और जरूरतमंदों को दान दें। अन्न, वस्त्र, जल, छाता, गौ-सेवा, तुलसी, धार्मिक पुस्तकें दान करें।

    सावन में क्या न करें
    – मांस, अंडा, मदिरा, लहसुन-प्याज जैसी तामसिक चीजें पूरी तरह से वर्जित हैं।
    – क्रोध, झूठ और अपशब्दों से बचें। सावन में वाणी पर संयम अत्यंत आवश्यक है। शिव सच्चे हृदय और शांत स्वभाव को प्रिय मानते हैं।
    – तुलसी, केतकी, और चंपा का फल शिवजी को न चढ़ाएं। शिव पूजा में इनका प्रयोग वर्जित है। विशेष रूप से टूटा बेलपत्र भी न चढ़ाएं।
    – लोहे के बर्तन से शिव अभिषेक न करें। शिवलिंग पर अभिषेक हमेशा तांबे, पीतल या मिट्टी के पात्र से करें।
    – रात्रि में व्रत तोड़ने से बचें। व्रत का पारण सूरज ढलने से पहले करें या अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त में।
    – बाल कटवाना और नाखून काटना टालें। धार्मिक मान्यताओं में सावन मास में बाल कटवाना वर्जित माना गया है।
    – विवाद और वाणी के घाव न दें। शिव शांति के देवता हैं। इस माह में किसी से कटुता, आलोचना, और मनमुटाव न बढ़ाएं।सावन में अपने घर पर रुद्राभिषेक करने के फायदे जानिए, आप भी इस सावन में जरूर करें

  • रूठी किस्मत को मनाने और बिगड़े काम बनाने के लिए मंदिर में करें इन चीजों का दान!

    रूठी किस्मत को मनाने और बिगड़े काम बनाने के लिए मंदिर में करें इन चीजों का दान!

    यदि जीवन में लगातार परेशानियां आ रही हैं, काम बनते-बनते बिगड़ रहे हैं और किस्मत साथ नहीं दे रही है, तो हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर में कुछ विशेष चीजों का दान करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह न केवल पुण्य प्रदान करता है, बल्कि देवी-देवताओं की कृपा भी दिला सकता है, जिससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सौभाग्य बढ़ता है।

    दान-पुण्य की महत्ताः हर धर्म में दान-पुण्य को विशेष स्थान प्राप्त है, लेकिन हिंदू धर्म में तो प्रत्येक पर्व, तीज-त्योहार और विशेष अवसर पर दान की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंदिर में किया गया दान कई गुना फल देता है और जीवन को सकारात्मक दिशा में मोड़ सकता है।

    किन चीजों का मंदिर में दान करें?

    मूर्ति दानः भगवान की मूर्ति का दान अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। जिस मूर्ति की पूजा होती है, उसका पुण्य दानकर्ता को भी मिलता है और वह जन्म-जन्मांतर तक लाभान्वित होता है।

    मंदिर निर्माण सामग्रीः यदि किसी मंदिर का निर्माण हो रहा है, तो वहां सीमेंट, टाइल्स, पत्थर या अन्य सामग्री का दान करें। यह एक स्थायी पुण्य कार्य होता है, जिसका फल जब तक मंदिर रहेगा, तब तक मिलता रहता है।

    पूजनीय पेड़ों का रोपणः पीपल, बरगद या बेलपत्र जैसे पवित्र पेड़ मंदिर परिसर में लगाना बहुत शुभ होता है। इन पेड़ों की सेवा और देखभाल करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।

    पानी की प्याऊ लगानाः गर्मी में प्यासे लोगों के लिए मंदिर में पीने के पानी की व्यवस्था करना अत्यंत पुण्य का कार्य है। इससे ना सिर्फ इंसानों, बल्कि पक्षियों और अन्य जीवों की भी सेवा होती है।

    पूजा सामग्री और आसन का दानः मंदिर में घी, तेल, अक्षत, अगरबत्ती जैसी पूजा सामग्री और भक्तों के बैठने के लिए आसन दान करना बहुत शुभ माना जाता है। इससे व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति मजबूत होता है और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

    भोग की व्यवस्थाः भगवान को अर्पित किए जाने वाले भोग जैसे पंचामृत, मेवे, मिठाई आदि का दान करने से भी बहुत पुण्य प्राप्त होता है और ईश्वर की विशेष कृपा मिलती है।

    भंडारे का सामानः अगर मंदिर में भंडारा आयोजित हो रहा है, तो उसके लिए चावल, गेहूं, दाल जैसे अनाज का दान करना अत्यंत पुण्यकारी होता है। इससे भूखे लोगों का पेट भरता है और दानकर्ता को दीर्घकालिक फल मिलता है।

    (Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक आस्थाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना है। हम इस जानकारी की पुष्टि नहीं करते।)