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  • Raksha Bandhan पर्व को लेकर लोगों में दुविधा, जानें सही मुहूर्त और तारीख

    Raksha Bandhan पर्व को लेकर लोगों में दुविधा, जानें सही मुहूर्त और तारीख

    चंडीगढ़ः हर साल सावन माह में रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व भाई-बहनों के लिए बहुत ही खास होता है। रक्षाबंधन भाई और बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई के कलाई में रक्षा सूत्र बांधती है और उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं। वहीं भाई हमेशा बहन की सुख-दुख में साथ देने का वचन देता है और उसकी रक्षा का वादा करता है।

    लेकिन पिछले साल की तरह इस बार भी लोगों में रक्षाबंधन की तारीख को लेकर बहुत कंफ्यूजन है, कोई 8 तो कोई 9 अगस्त को मनाने की बात कर रहा है। बता दें कि, इस साल पूर्णिमा तिथि 08 अगस्त की दोपहर 2 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन यानी 9 अगस्त को 1 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगी। हिन्दू धर्म में उदयातिथि का विशेष महत्व होता है इसीलिए इस साल रक्षाबंधन 9 अगस्त को ही मनाया जाएगा।

    इस साल 9 अगस्त की सुबह 5 बजकर 35 मिनट से दोपहर 1 बजकर 24 मिनट तक रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त है। इस मुहूर्त में राखी बांधना बहुत शुभ होगा. इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट के बीच होगा। इस अवधि में राखी बांधना और अधिक शुभ रहेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल रक्षाबंधन पर किसी भी तरह से भद्रा का साया नहीं रहेगा। रक्षाबंधन से पहले से ही भद्रा समाप्त हो जाएगा। ऐसे में बिना किसी टेंशन के राखी बांध सकते हैं।

     

     

  • सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है ये Jagannath Temple, 2 रुपए के दान से हुआ था निर्माण

    सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है ये Jagannath Temple, 2 रुपए के दान से हुआ था निर्माण

    धर्मः जगन्नाथ भगवान विष्णु के 8वें अवतार भगवान कृष्ण के रूपों में से एक हैं। उन्हें ब्रह्मांड का स्वामी कहा जाता है, स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल तीनों लोकों का। भगवान जगन्नाथ उड़ीसा के लिए अद्वितीय देवता हैं, कोई अन्य क्षेत्र उनके जैसे विष्णु के रूप की पूजा नहीं करता है। जगन्नाथ के देश में कई मंदिर हैं। वहीं छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में स्थित पांडादाह गांव का जगन्नाथ मंदिर अविभाजित मध्यप्रदेश का सबसे प्राचीन जगन्नाथ मंदिर है। पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर बना यह मंदिर आस्था और विरासत का केंद्र है।

    मंदिर का इतिहास साल 1707 से जुड़ा है। कल्चुरी वंश की पराजय के बाद भोसले शासक बिंबाजी राव के समय में महंत प्रहलाद दास की भजन मंडली पांडादाह आई। रियासत की पटरानी ने प्रभावित होकर उन्हें सम्मान दिया। पटरानी के आदेश पर हर मालगुजार से मिले 2 रुपए के दान से मंदिर का निर्माण शुरू हुआ था।

    महंत प्रहलाद दास के बाद उनके शिष्य हरिदास बैरागी मंदिर के उत्तराधिकारी बने। हरिदास बैरागी राजनांदगांव रियासत के पहले शासक भी बने। उन्होंने किला और अन्य स्थापत्य का निर्माण करवाया। बाद में महंत घासी दास, बलराम दास और दिग्विजय दास ने रियासत की सत्ता संभाली।

    बैरागी राजवंश में संतानहीनता के कारण गुरु-शिष्य परंपरा में गद्दी का हस्तांतरण होता रहा। एक ब्राह्मण महिला जीराबाई ने मंदिर को 300 एकड़ भूमि दान में दी। यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में “ठाकुर जुगल किशोर मंदिर” के नाम दर्ज है। कुल मिलाकर मंदिर को 500 एकड़ जमीन दान में मिली। वर्तमान में इस संपदा की देखरेख रानी सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा कर रही है।

    भगवान को कंधे पर उठाने की परंपरा

    यहां की सबसे अनोखी परंपरा है अरज दूज के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की कंधे पर यात्रा। मान्यता है कि महंत हरिदास को स्वप्न में भगवान ने आदेश दिया कि रथ में नहीं, उन्हें कंधे पर उठाकर मंदिर परिसर में परिक्रमा कराई जाए।

    एक बार ब्रिटिश अधिकारी की जिद पर महंत बलराम दास को रथ यात्रा करनी पड़ी, लेकिन रथ यात्रा के अगले ही दिन उस अंग्रेज अफसर की मौत हो गई। तब से आज तक यहां भगवान की यात्रा रथ पर नहीं, कांधों पर होती है। पुजारी और भक्त मूर्ति को कंधे में उठाकर मंदिर के भीतर 5 परिक्रमा कराते हैं। खैरागढ़ के घने वनांचल में बसे पांडादाह में न केवल यह मंदिर बल्कि त्रिकोणीय कुआं, संगमरमर की मूर्तियां, आमनेर नदी, सियारसुरी मंदिर और सांकरा का महामाया मंदिर जैसे कई दर्शनीय स्थल हैं।

    पांडवों ने यहां किया था विश्राम

    इतिहासकारों का मत है कि महाभारत काल में पांडवों ने यहां विश्राम किया था, इसीलिए इसे पहले पांडवदाह कहा जाता था, जो बाद में पांडादाह बन गया। इसके बावजूद, यह ऐतिहासिक गांव आज भी पर्यटन विकास और सरकारी संरक्षण की प्रतीक्षा में है।

  • इस सूर्य मंदिर से जुड़ी है नवग्रहों की रोचक कहानी, ब्रह्मा ने दिया था श्राप

    इस सूर्य मंदिर से जुड़ी है नवग्रहों की रोचक कहानी, ब्रह्मा ने दिया था श्राप

    धर्मः देश में कई ऐसे मंदिर हैं जो कई हजार सालों पुराने हैं और इन मंदिरों मेें आज भी लोग पूजा-अर्चना करते हैं और भगवान से सुख समृद्धि की कामना करते हैं। वहीं देश में सूर्य देव के कम ही मंदिर हैं जिनमें से एक सूर्यनार कोविल मंदिर है जो तमिलनाडु में स्थित है।

    यह एक प्राचीन मंदिर है, जिसका इतिहास 11वीं शताब्दी से जुड़ा है। इसे देश के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक भी माना जाता है। इतिहासकारों के मुताबिक, सूर्यनार कोविल मंदिर चोल वंश के राजा कुलोथुंग चोल प्रथम ने बनवाया था, और उस समय इसे कुलोत्तुंगचोला-मार्टंडालय कहा जाता था। मंदिर में 9 ग्रहों के लिए अलग-अलग मंदिर भी हैं, जो इसे एक अनोखा नवग्रह मंदिर बनाता है।

    इस वजह से किया था मंदिर का निर्माण

    मंदिर को चोल वंश के राजा द्वारा बनाने के पीछ की वजह यह रही कि राजा कुलोथुंग के गहड़वाल वंश के साथ अच्छे संबंध थे, जिनके शासक सूर्य के भक्त थे, जिसके चलते मंदिर का निर्माण किया गया। बाद में, विजयनगर साम्राज्य द्वारा मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया। मंदिर को द्रविड़ वास्तुकला शैली में बनाया गया है और इसमें एक पांच-स्तरीय राजगोपुरम (प्रवेश द्वार) है।

    नवग्रहोें की होती है पूजा

    इतिहासकारों के मुताबिक, यह मंदिर नौ ग्रहों (नवग्रह) को समर्पित है, जिनमें से प्रत्येक के लिए अलग-अलग मंदिर हैं, जो इसे एक अद्वितीय नवग्रह मंदिर बनाता है। लोग यहां नवग्रहों की श्रद्धा से पूजा अर्चना करते हैं और सुख समृद्धि की कामना करते हैं। दूर-दूर से लोग यहां अपनी श्रद्धा प्रकट करने के लिए आते हैं।

    ये हैं पौराणिक कथाएं

    पौराणिक कथाओं के मुताबिक, ऋषि कलावा ने कुष्ठ रोग से पीड़ित होने पर नवग्रहों से प्रार्थना की थी। ग्रहों ने उन्हें ठीक कर दिया, लेकिन ब्रह्मा क्रोधित हो गए और उन्होंने ग्रहों को श्राप दे दिया। ग्रहों ने शिव से प्रार्थना की, जिन्होंने उन्हें इस स्थान पर पूजा करने का आशीर्वाद दिया।

    मंदिर का उल्लेख मुथुस्वामी दीक्षितार के एक गीत में भी मिलता है, जो “सूर्यमूर्ति” से शुरू होता है। माना जाता है कि इस मंदिर में पूजा करने से कुंडली में ग्रहों की स्थिति से जुड़े दोषों को दूर किया जा सकता है।

  • ये टोटका अजमाएं बनेंगे सभी रुके हुए काम, आसपास की बुरी शक्तियां भी होंगी दूर

    ये टोटका अजमाएं बनेंगे सभी रुके हुए काम, आसपास की बुरी शक्तियां भी होंगी दूर

    धर्मः क्या आपके भी बने हुए काम एक दम रुक जाते है। अगर ऐसा है तो कुछ टोटके जो आपके काम को आसान करेंगे और रुकावटों को दूर करेंगे। इस टोटके में नींबू आपके लिए खास उपाय के रूप में इस्तेमाल होगा। ये उपाय काफी पुराने हैं और लोगों को मुश्किल समय में राहत देने का काम करते हैं। ज्योतिष के अनुसार नींबू में नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करने की शक्ति होती है। नींबू वातावरण को शुद्ध करने में सहायक होता है।

    रविवार को किया गया कोई भी कार्य सूर्यदेव की कृपा से जल्दी फल देता है। इसीलिए यह दिन खास होता है। नींबू को नकारात्मक शक्तियों से लड़ने वाला फल माना जाता है। अगर आपको लगता है कि आपके काम अटक जाते हैं या मन ठीक से नहीं लग रहा, तो रविवार को सुबह नहाने के बाद एक ताजा नींबू लें और उसे अपने सिर के ऊपर से सात बार घड़ी की दिशा में घुमाएं। इसके बाद उस नींबू को किसी सुनसान या एकांत जगह पर फेंक दें और पीछे मुड़कर बिल्कुल न देखें। कहा जाता है कि ऐसा करने से आपके आसपास की बुरी शक्तियां हटती हैं और मन हल्का महसूस होता है।

    आप चाहें तो एक और उपाय कर सकते हैं, एक नींबू को बीच से काटें और उसके अंदर थोड़ा नमक और काली मिर्च भरकर उसे अपने घर के मुख्य दरवाजे के पास रख दें। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश बंद होता है और घर का माहौल शांत बना रहता है।

    अगर आप व्यापार या नौकरी में लगातार परेशानियों का सामना कर रहे हैं, तो रविवार को एक नींबू लें, उसमें चार लौंग लगाएं और फिर ॐ श्री हनुमते नमः मंत्र को 21 बार बोलें। इसके बाद उस नींबू को अपने पास रख लें या अपने कार्यस्थल पर रखें। माना जाता है कि इससे काम में आ रही अड़चनें कम होती हैं और तरक्की के रास्ते खुलते हैं। पुराने समय से लोग नींबू और हरी मिर्च का उपयोग नजर दोष और बुरी शक्तियों से बचने के लिए करते आए हैं। माना जाता है कि इनकी कंपन ऊर्जा ऐसी होती है जो नकारात्मक तत्वों को पास नहीं आने देती।

  • ये मंत्र करते हैं सुरक्षा कवच का काम, वाहन स्टार्ट करने से पहले करें उचारण

    ये मंत्र करते हैं सुरक्षा कवच का काम, वाहन स्टार्ट करने से पहले करें उचारण

    धर्मः वाहन आज हमारी जिंदगी का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुके हैं। बिना स्कूटी, मोटरसाइकिल और कार के लोग कहीं भी जाना पसंद नहीं करते हैं लेकिन इसी जरूरत ने जीवन में खतरे भी बढ़ा दिए हैं। हर रोज सड़क दुर्घटनाओं की कई खबरें आती हैं। कई बार लोग बहुत सावधानी से वाहन चलाते हैं, नियमों का पालन भी करते हैं, फिर भी दुर्घटना हो जाती है। जानकारों के मुताबिक, ऐसे हादसों के पीछे केवल भौतिक कारण नहीं, बल्कि ऊर्जाओं का असंतुलन और ग्रहों का प्रभाव भी जिम्मेदार होता है। ज्योतिषों के मुताबिक अगर वाहन स्टार्ट करने से पहले केवल 5 सेकंड रुककर एक छोटा-सा सुरक्षा मंत्र मन में बोल दिया जाए, तो जीवन में कभी कोई बड़ी दुर्घटना नहीं होगी। यह आस्था से ज्यादा चेतना और ऊर्जा का विज्ञान है।
    • गणेश जी सभी कार्यों के प्रारंभ में पूजे जाते हैं। ॐ श्री गणेशाय नमः मंत्र बोलने से सभी तरह के विघ्न दूर होते हैं। यात्रा शुरू करने से पहले यह मंत्र मन में जरूर दोहराना चाहिए।
    • ॐ अन्ते रक्षाय नमः सुरक्षा का सीधा मंत्र है। इसका जप वाहन चालकों के लिए विशेष रूप से लाभदायक होता है। यह मंत्र विशेष रूप से सुरक्षा के लिए उपयोगी है।
    • हनुमान जी को संकटमोचक कहा जाता है। ॐ हं हनुमते नमः मंत्र हर यात्रा को संरक्षित करता है। वाहन चलाने से पहले यह मंत्र मन में जरूर दोहराएं।
    • शिव का स्मरण शरीर और मन दोनों को संतुलन देता है। वाहन चलाने से पहले ॐ नमः शिवाय मंत्र मन में दोहराने से दुर्घटनाओं से रक्षा होती है।

    ये वास्तु उपाय भी होंगे फायदेमंद

    वाहन में वास्तु के कुछ सरल उपाय करने से भी सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। वाहन में भगवान गणेश, शिव या हनुमान जी की एक छोटी प्रतिमा या तस्वीर जरूर रखनी चाहिए। वाहन स्टार्ट करने से पहले 3 से 5 सेकंड रुकें, आंखें बंद करें और मंत्र बोलें। वाहन हमेशा दाएं हाथ से स्टार्ट करें, इसे शुभ माना जाता है। एक लाल या पीले रंग का रूमाल वाहन में रखें. ये रंग ऊर्जा बढ़ाते हैं और मनोबल को मजबूत करते हैं। गाड़ी के डैशबोर्ड या पास में कांटेदार पौधे, जैसे कैक्टस न रखें. ये नकारात्मकता फैलाते हैं।
  • शुभ मुहूर्त में विदाई करना जरूरी, नहीं तो जिंदगी भर हो सकती हैं परेशानी

    शुभ मुहूर्त में विदाई करना जरूरी, नहीं तो जिंदगी भर हो सकती हैं परेशानी

    धर्मः शादी जिसे एक पवित्र बंधन भी कहा जाता है। यह 2 परिवारों का जुड़ाव भी है। शादी समारोह के दौरान विदाई एक अहम पल होता है। यह बेटी या बहू के लिए भावनाओं से भरा होता है, लेकिन इस भावनात्मक पल में एक बात का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है विदाई का सही समय, यानी शुभ मुहूर्त। अगर इस एक छोटी-सी बात का ध्यान रखा जाए, तो बेटी की जिंदगी में खुशियां ही खुशियां भर सकती हैं। अक्सर लोग सोचते हैं कि विदाई तो एक परंपरा है, किसी भी समय की जा सकती है, लेकिन पंडितों और ज्योतिष से जुड़े जानकारों का मानना है कि अगर विदाई सही समय पर न हो, तो उसका असर लड़की की जिंदगी और पूरे परिवार पर पड़ सकता है।

    जब बेटी या बहू को शुभ समय में विदा किया जाता है, तो घर में शांति बनी रहती है। ऐसे समय में की विदाई को सौभाग्यशाली माना जाता है। पंडितों के अनुसार, यह घर की बरकत और सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखता है। शुभ मुहूर्त में विदा होने वाली लड़की का वैवाहिक जीवन आमतौर पर सुखद रहता है। उसका ससुराल के लोगों से तालमेल बेहतर बनता है और रिश्तों में मधुरता बनी रहती है। कुछ समय जैसे बुधवार, शनिवार या फिर खरमास जैसे विशेष काल में विदाई करना अशुभ माना जाता है। इन दिनों में नकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय रहती है, जिससे लड़की या उसके ससुराल पर बुरा असर पड़ सकता है। अगर शुभ समय पर विदाई नहीं की जाती तो कई बार देखा गया है कि लड़की को ससुराल में तालमेल बैठाने में दिक्कत आती है। रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है और आपसी समझ कमज़ोर हो सकती है।

  • औरतों की Bindi में भी छिपे है कई राज, जानें किस दिन कौन सी रंग की लगाएं

    औरतों की Bindi में भी छिपे है कई राज, जानें किस दिन कौन सी रंग की लगाएं

    धर्मः स्त्रियों का श्रृंगार केवल सजने-संवरने का तरीका नहीं, बल्कि यह गहराई से जुड़ा हुआ एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा है। चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, पायल- ये सभी चीजें सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं होतीं, बल्कि इनमें ऊर्जा, शुभता और सकारात्मकता का संचार होता है। बिंदी को खासतौर पर बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। यह सिर्फ माथे की सजावट नहीं है, बल्कि इसका संबंध हमारे मानसिक संतुलन, ध्यान और आत्मिक जागरूकता से होता है। इसे जिस स्थान पर लगाया जाता है, वहां आज्ञा चक्र होता है, जो व्यक्ति की चेतना और निर्णय शक्ति को नियंत्रित करता है। यही वजह है कि बिंदी का रंग भी जीवन में सकारात्मक या नकारात्मक असर डाल सकता है।

    ज्योतिष के अनुसार हर दिन किसी न किसी ग्रह से जुड़ा होता है और उसी अनुसार बिंदी के रंग का चयन करना चाहिए।सोमवार को सफेद या हल्के नीले रंग की बिंदी लगानी चाहिए, यह मन को शांति देती है और रिश्तों में मिठास बढ़ाती है।मंगलवार को दिन लाल रंग की बिंदी सबसे शुभ मानी जाती है। यह ऊर्जा, आत्मविश्वास और प्रेम का प्रतीक है। यह दिन मंगल ग्रह से जुड़ा होता है। बुधवार को हरे या हल्के पीले रंग की बिंदी शुभ रहती है। यह बुद्धिमानी, संवाद कौशल और व्यापारिक समझ को बढ़ाती है।

    वीरवार को पीली या सुनहरी बिंदी लगाने की सलाह दी जाती है। यह बृहस्पति से संबंधित दिन होता है, जो ज्ञान, समृद्धि और पति की उन्नति के लिए शुभ होता है। शुक्रवार को गुलाबी या हल्के लाल रंग की बिंदी वैवाहिक जीवन में प्रेम और आकर्षण को बढ़ाती है। शुक्र ग्रह सौंदर्य, प्रेम और कला से जुड़ा होता है। शनिवार को गहरे नीले या काले रंग की बिंदी से बचना चाहिए, क्योंकि यह शनि ग्रह से जुड़ा होता है। हल्का हरा या ग्रे रंग बेहतर माना जाता है, जो मन को शांत रखता है और तनाव से बचाता है। रविवार को नारंगी या हल्का लाल रंग की बिंदी शुभ होती है। यह आत्मबल, ऊर्जा और आत्मविश्वास को बढ़ाने वाली मानी जाती है।

  • Private Job में Promotion और पैसों की बारिश के लिए करें ये उपाय

    Private Job में Promotion और पैसों की बारिश के लिए करें ये उपाय

    Religious: अगर आप अपने करियर में ऊँचाइयों को छूना चाहते हैं, तो वैदिक परंपराओं के अनुसार सूर्य देव की नियमित पूजा आपकी किस्मत बदल सकती है। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है और इन्हें नवग्रहों में सबसे प्रमुख स्थान दिया गया है। कहा जाता है कि सूर्य की कृपा से व्यक्ति को सम्मान, उच्च पद और धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है।

    Surya Puja: पौष माह में सूर्य की पूजा करने से मिलेगी मानसिक शांति, जानें  सूर्य को जल चढ़ाने की विधि, मंत्र और फायदे | Benefits of Surya Pujan in  paush month know

    रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित होता है और इस दिन कुछ खास उपाय करके सूर्य को अभिमंत्रित किया जा सकता है। आइए जानते हैं ऐसे आसान और प्रभावशाली उपाय जिनसे आप सूर्य की कृपा पा सकते हैं।

    सूर्य को अभिमंत्रित करने का तरीका

    Surya Dev Puja : रविवार के दिन इस विधि से करें सूर्य देव की पूजा …

    रविवार के दिन एक तांबे का सूर्य खरीदें और उसे अपने घर के मंदिर में स्थापित करें। प्रतिदिन सुबह उस तांबे के सूर्य का जल से तिलक करें और साथ ही “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का 7 बार जाप करें। यह प्रक्रिया लगातार 7 दिनों तक करें।

    इसके बाद अगले रविवार को उस तांबे के सूर्य को सुबह 11 बजे से पहले घर की पूर्व दिशा की दीवार पर लगभग 7 फीट की ऊँचाई पर स्थापित करें। फिर प्रतिदिन सुबह सूर्य को तांबे के पात्र से जल चढ़ाएं और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। मान्यता है कि इससे जल्द ही करियर में सफलता मिलने लगती है और आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है।

    सूर्य यंत्र के विशेष लाभ

    घर में सूर्य यंत्र स्थापित करके उसकी रोजाना पूजा करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। सूर्य को जल चढ़ाते समय उसमें थोड़ी सी रोली या लाल रंग के फूल मिलाना चाहिए। इससे आत्मबल में वृद्धि होती है और व्यक्तित्व में निखार आता है।

    विशेषज्ञों की मानें तो माणिक्य रत्न धारण करना भी सूर्य की कृपा पाने का एक शक्तिशाली उपाय है, लेकिन इसे धारण करने से पहले ज्योतिष सलाह अवश्य लें।

    निष्कर्ष: यदि आप अपने जीवन में सफलता, समृद्धि और यश की कामना करते हैं, तो सूर्य देव की उपासना से जुड़े ये उपाय अपनाकर आप अपनी किस्मत को चमका सकते हैं।

    Disclaimer: यह सामान्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

  • दिन-रात मेहनत के बाद नहीं मिल रही तरक्की, जानें इसके पीछे का कारण

    दिन-रात मेहनत के बाद नहीं मिल रही तरक्की, जानें इसके पीछे का कारण

    धर्मः अक्सर देखा होगा कि लोग दिन-रात पूरी मेहनत करत हैं, लेकिन फिर भी जिंदगी में वैसी तरक्की नहीं मिल पाती जिस उम्मीद से मेहनत की होती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते है। कई बार इसकी वजह हमारे आसपास के माहौल में छुपी होती है। खासकर हमारे घर की बनावट और दिशा जो सीधे हमारे मन, सोच और निर्णय लेने की ताकत पर असर डालती है। भारत में वास्तु शास्त्र को हजारों सालों से माना जाता रहा है। इसका सीधा रिश्ता सिर्फ घर की सुंदरता या सजावट से नहीं, बल्कि हमारी मानसिक स्थिति और जीवन के फैसलों से भी है। घर का नॉर्थ-ईस्ट यानी उत्तर-पूर्व दिशा को बहुत ही पवित्र और सकारात्मक दिशा माना गया है। यह दिशा हमारी सोच, समझ और मानसिक ऊर्जा से जुड़ी होती है।
    अगर उत्तर-पूर्व दिशा में टॉयलेट बना दिया जाए तो वहां से निकलने वाली ऊर्जा हमारे दिमाग को प्रभावित करती है। इससे सोचने और समझने की क्षमता कमजोर होने लगती है। आप चाहे जितने भी होशियार हों, आपके लिए सही फैसला लेना मुश्किल हो जाता है। ऐसा इंसान हमेशा किसी न किसी उलझन में फंसा रहता है, चाहे वो रिश्तों की बात हो या करियर की।

    वहीं अगर किचन उत्तर-पूर्व दिशा में बना हो, तो वहां की गर्मी और तेज ऊर्जा, दिमाग की ठंडक को कम कर देती है। इसका असर ये होता है कि व्यक्ति बहुत जल्दी गुस्से में आ जाता है, फोकस नहीं कर पाता और उसका ध्यान बार-बार भटकता है। ऐसे में कोई भी लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाता है। अगर आपके घर में उत्तर-पूर्व दिशा में टॉयलेट या किचन है, तो बिना तोड़फोड़ किए भी कुछ उपाय किए जा सकते हैं। जैसे कि उस दिशा को हमेशा साफ रखें, वहां हल्की पीली या सफेद लाइट का इस्तेमाल करें और वहां रोज कुछ समय ध्यान लगाएं। कुछ खास वास्तु उपायों से भी सुधार किया जा सकता है।

  • सपने में बार-बार दिखाई दे रहा है पानी तो हो जाए सतर्क, हो सकते है ये बड़े संकेत

    सपने में बार-बार दिखाई दे रहा है पानी तो हो जाए सतर्क, हो सकते है ये बड़े संकेत

    धर्मः रात में सोते समय हम बहुत से सपने देखते है, लेकिन ये सपने क्या थे सुबह हमें कुछ भी याद नहीं होता। लेकिन कुछ सपने ऐसे होते हैं जो हमारे दिल और दीमाग में छप जाते है और हमें सोचने पर मजबूर कर देते हैं। अगर किसी को सपने में बार-बार पानी दिखाई देता है, तो यह मामूली बात नहीं होती। ऐसे सपने आपके भविष्य से जुड़े बड़े इशारे देते हैं। पानी एक ऐसा प्रतीक है जो जीवन, ऊर्जा और भावना से जुड़ा होता है। जब सपनों में पानी दिखाई देता है, तो इसका मतलब यह आपके जीवन में बदलाव लेकर आ सकता है।

    अगर सपने में बहती हुई नदी नजर आती है, तो यह संकेत है कि आपके जीवन में एक अच्छा समय शुरू होने वाला है। आपकी कोई बड़ी ख्वाहिश या लक्ष्य अब पूरा होने वाला है। सपने में किसी पवित्र नदी या शांत जल से भरे तालाब को देखना बहुत ही शुभ माना जाता है। यह इस बात का संकेत है कि आपको जल्द ही आर्थिक फायदा हो सकता है। साथ ही यह भी माना जाता है कि ऐसे सपने आने पर किस्मत आपके साथ होती है और आप जिस काम में हाथ डालेंगे, उसमें फायदा होगा।

    अगर कोई व्यक्ति सपने में खुद को बारिश के बीच खड़ा पाता है या आसमान से पानी गिरते हुए देखता है, तो यह बहुत ही अच्छा संकेत होता है। इसका मतलब है कि आपको कोई बड़ी खुशखबरी मिलने वाली है। माना जाता है कि इस तरह के सपनों के बाद घर में शांति और समृद्धि आती है। अगर किसी कुएं में साफ पानी देख रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आपको आने वाले समय में कोई अच्छा अवसर मिलेगा। आपके करियर में आगे बढ़ने के रास्ते खुल सकते हैं।

    अगर पानी गंदा दिखाई दे रहा है या उसमें कीचड़ है, तो यह थोड़ा सतर्क रहने का संकेत होता है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में कुछ मुश्किलें आ सकती हैं, चाहे वो काम से जुड़ी हों या घर-परिवार से।