गैंगरेप और ट्रिपल मर्डर केस में 3 हत्यारों को मिली मौत की सजा

नई दिल्लीः दिल्ली की एक अदालत ने 8 साल पहले रघुबीर नगर में एक महिला से गैंगरेप और उसके बाद मां और दो मासूम बच्चों- 7 वर्षीय बेटे और 6 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में तीन लोगों को मौत की सजा सुनाई है। हत्यारों ने गैंगरेप के बाद पहले पेचकस से महिला की हत्या की और फिर उसका गला घोंट दिया। इसके बाद उसके दो बच्चों की भी हत्या कर दी और फिर घर में लूटपाट की थी। गैंगरेप और ट्रिपल मर्डर का यह मामला ख्याला थाना इलाके का है। महिला और उसके दोनों बच्चे दिल्ली के रघुबीर नगर में अपने घर की दूसरी मंजिल पर मृत पाए गए थे। इस संबंध में महिला के पति की शिकायत पर 2015 में एफआईआर दर्ज की गई थी। इस क्रूर बलात्कार और हत्या में एक नाबालिग (किशोर) सहित चार लोग शामिल थे।

तीस हजारी अदालत की विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट की जज आंचल ने तीन हत्यारों- शाहिद, अकरम और रफत अली उर्फ मंजूर अली को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत जघन्य अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई। इसके साथ ही इन्हें गैंगरेप और डकैती के अपराध में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने तीनों दोषियों पर 35000-35000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने 22 अगस्त को आरोपियों को दोषी करार दिया था।

अदालत ने पुलिस द्वारा इस मामले की सही जांच और हत्यारों के पास से बरामद सबूतों को अहम आधार माना है। कोर्ट ने कहा कि यह भी साबित हो चुका है कि तीनों आरोपियों शाहिद, रफत अली और अकरम ने इस मामले में साजिश रची थी। अदालत ने कहा, “कॉल रिकॉर्ड और बयान यह साबित करते हैं कि यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि घटना की तारीख से पहले भी दोषियों शाहिद, अकरम और रफत अली और एक किशोरी के बीच साजिश की गई थी, जो 19.09.2015 और 23.09.2015 को उस दिन तक जारी रही, जब अपराध की आय आरोपी व्यक्तियों के बीच साझा की गई।”

अदालत ने यह भी कहा कि एक पैटर्न देखा गया है कि कोई भी कॉल बैक-टू-बैक नहीं की गई थी बल्कि कुछ मिनटों या घंटों के अंतराल के बाद कॉल की गई थी। अदालत ने कहा, ”रफत अली ने 21/09/2015 को सुबह करीब 10 बजे दिल्ली छोड़ी और उसके बाद शाहिद भी उसी दिन 21/09/2015 को दिल्ली छोड़ने के लिए रात 10:29 बजे आनंद विहार पहुंचे और फिर 22/09/2015 को सुबह 10:34 बजे उसकी लोकेशन अलीगढ़ में थी।” अदालत ने कहा कि किशोर 22/09/2015 की सुबह 08:20 बजे से रोमिंग नेटवर्क में था और अकरम 23/09/2015 की सुबह 08:20 बजे भी दिल्ली के नेटवर्क से बाहर था, लेकिन दिल्ली छोड़ने वाले और शाहिद के बीच हमेशा एक कॉल होती थी और फिर शाहिद और रफत अली के बीच कॉल और इसी तरह का संचार तब हुआ जब आरोपी दिल्ली छोड़कर अपने ठिकान पर पहुंचा।

अदालत ने कहा, “यह बहुत अजीब है कि शाहिद और अकरम द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों के बीच लगातार कॉल की जा रही थी, जो तीन हत्याओं के समय से मेल खाता है और केवल चार लोगों के बीच कई कॉल की गई थीं, अपराध करने की तारीख और 23/09/2015 को उस दिन जब वे अलीगढ़ में थे।” जज ने कहा, “इसलिए, हालांकि कॉल की कोई भी सामग्री रिकॉर्ड में नहीं है, लेकिन उनके कॉल रिकॉर्ड बहुत ही असामान्य आचरण दिखा रहे हैं, जो तीन हत्याओं, गैंगरेप और डकैती के अपराध में उनकी संलिप्तता का संकेत देते हैं।”

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