जनवरी में सत्ता में लौटने के बाद से ट्रम्प ने अब तक चीन से आने वाले सभी इंपोर्ट्स पर दो बार 10% अतिरिक्त शुल्क लगाए हैं। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह कदम अमेरिका में चीन से अवैध रूप से आने वाले फेंटेनाइल को रोकने के लिए जरूरी था। इसका मतलब यह है कि अब अमेरिका में आने वाले चीनी सामानों पर प्रभावी रूप से कुल 54% टैरिफ लागू हो गया है।
शुक्रवार को जवाबी टैरिफ का ऐलान करने के साथ चीन ने 11 अमेरिकी कंपनियों को उन कंपनियों की लिस्ट में डाल दिया है जिन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। इनमें ड्रोन बनाने वाली कंपनियां भी शामिल हैं। इसके अलावा 16 अमेरिकी कंपनियों पर एक्सपोर्ट नियम लागू किए गए हैं, जिससे वे चीनी के दोहरे उपयोग वाले सामान का निर्यात न कर सकें।
बताया जा रहा है कि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर दुनिया को आर्थिक मंदी में धकेल सकता है, लेकिन ट्रम्प के मनमाने टैरिफ से चीन का पलड़ा भारी रहने वाला है। कई देश अब ट्रेड के लिए चीन की ओर रुख कर सकते हैं। 34% टैरिफ से चीन के निर्यात, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और उपभोक्ता सामान, में बड़ी गिरावट आ सकती है। इससे चीनी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। चीन को नए बाजार तलाशने होंगे।
जैसे को तैसा टैरिफ पर चीन का जवाबी हमला, ट्रप बोले – भारी पड़ेगा

नई दिल्लीः अमेरिका ने दुनिया के 60 देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इसमें चीन पर 34% टैरिफ लगाया है। इससे पहले ट्रम्प चीन पर एक महीने में दो बार 10%-10% टैरिफ लगा चुके हैं, जिससे कुल टैरिफ 54% तक पहुंच चुका है। ट्रम्प ने कहा था कि 2 अप्रैल से अमेरिका में ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ लागू होगा। यानी वे हम पर जितना टैरिफ लगाएंगे, हम भी उन पर उतना ही लगाएंगे। ट्रम्प ने हंसते हुए कहा, ‘मैं इसे 1 अप्रैल को लागू करना चाहता था, लेकिन फिर लोग इसे ‘अप्रैल फूल’ समझते।’
अब इसके जवाब में चीन ने शुक्रवार को अमेरिका पर 34% जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। नया टैरिफ 10 अप्रैल से लागू होगा। चीन सरकार ने एक बयान जारी कर कहा कि अमेरिका का यह कदम अंतरराष्ट्रीय ट्रेड नियमों का उल्लंघन करता है। इससे चीन के कानूनी अधिकार और हितों का नुकसान हो रहा है। यह साफ तौर पर एकतरफा दबाव डालने की कोशिश है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन के 34% टैरिफ लगाने के फैसले को घबराहट भरा बताया है। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा, चीन ने गलत कदम उठाया है। वे घबरा गए हैं। यह एक ऐसी चीज है जिसे वे बर्दाश्त नहीं कर सकते। चीन का जवाबी टैरिफ उन्हें बहुत भारी पड़ेगा। अमेरिका ने दुनिया के 60 देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इसमें चीन पर 34% टैरिफ लगाया है। इससे पहले ट्रम्प चीन पर एक महीने में दो बार 10%-10% टैरिफ लगा चुके हैं, जिससे कुल टैरिफ 54% तक पहुंच चुका है।
जनवरी में सत्ता में लौटने के बाद से ट्रम्प ने अब तक चीन से आने वाले सभी इंपोर्ट्स पर दो बार 10% अतिरिक्त शुल्क लगाए हैं। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह कदम अमेरिका में चीन से अवैध रूप से आने वाले फेंटेनाइल को रोकने के लिए जरूरी था। इसका मतलब यह है कि अब अमेरिका में आने वाले चीनी सामानों पर प्रभावी रूप से कुल 54% टैरिफ लागू हो गया है।
शुक्रवार को जवाबी टैरिफ का ऐलान करने के साथ चीन ने 11 अमेरिकी कंपनियों को उन कंपनियों की लिस्ट में डाल दिया है जिन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। इनमें ड्रोन बनाने वाली कंपनियां भी शामिल हैं। इसके अलावा 16 अमेरिकी कंपनियों पर एक्सपोर्ट नियम लागू किए गए हैं, जिससे वे चीनी के दोहरे उपयोग वाले सामान का निर्यात न कर सकें।
बताया जा रहा है कि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर दुनिया को आर्थिक मंदी में धकेल सकता है, लेकिन ट्रम्प के मनमाने टैरिफ से चीन का पलड़ा भारी रहने वाला है। कई देश अब ट्रेड के लिए चीन की ओर रुख कर सकते हैं। 34% टैरिफ से चीन के निर्यात, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और उपभोक्ता सामान, में बड़ी गिरावट आ सकती है। इससे चीनी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। चीन को नए बाजार तलाशने होंगे।
जनवरी में सत्ता में लौटने के बाद से ट्रम्प ने अब तक चीन से आने वाले सभी इंपोर्ट्स पर दो बार 10% अतिरिक्त शुल्क लगाए हैं। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह कदम अमेरिका में चीन से अवैध रूप से आने वाले फेंटेनाइल को रोकने के लिए जरूरी था। इसका मतलब यह है कि अब अमेरिका में आने वाले चीनी सामानों पर प्रभावी रूप से कुल 54% टैरिफ लागू हो गया है।
शुक्रवार को जवाबी टैरिफ का ऐलान करने के साथ चीन ने 11 अमेरिकी कंपनियों को उन कंपनियों की लिस्ट में डाल दिया है जिन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। इनमें ड्रोन बनाने वाली कंपनियां भी शामिल हैं। इसके अलावा 16 अमेरिकी कंपनियों पर एक्सपोर्ट नियम लागू किए गए हैं, जिससे वे चीनी के दोहरे उपयोग वाले सामान का निर्यात न कर सकें।
बताया जा रहा है कि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर दुनिया को आर्थिक मंदी में धकेल सकता है, लेकिन ट्रम्प के मनमाने टैरिफ से चीन का पलड़ा भारी रहने वाला है। कई देश अब ट्रेड के लिए चीन की ओर रुख कर सकते हैं। 34% टैरिफ से चीन के निर्यात, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और उपभोक्ता सामान, में बड़ी गिरावट आ सकती है। इससे चीनी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। चीन को नए बाजार तलाशने होंगे।
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