जालंधर से भारी मात्रा में महारैली के लिए रवाना हुए किसान, देखें वीडियो

जालंधर, ENS: दोआबा से एक बड़ा कारवां बरनाला रैली के लिए रवाना। 13 फरवरी को किसान हर गांव से 13 ट्रॉलियां और 13 महीने का राशन लेकर दिल्ली कूच करेंगे। इसको लेकर किसानों का कहना हैकि केंद्र सरकार की वायदा खिलाफी के खिलाफ अब किसान दिल्ली से भी बड़ा संघर्ष शुरू करेंगे। उन्होंने कहा केंद्र सरकार की किसानों को मारने वाली नीतियों और किसानों पर हो रहे जुल्म के खिलाफ किसानों को एकजुट होने के लिए जागरूक किया जा रहा है। जिसके लिए बड़ी रैली किसने की तरफ से बरनाला में आज की जा रही है। केंद्र सरकार ने आंदोलन के दौरान और 2014 के चुनाव के दौरान किसानों से वादे किए थे, लेकिन वे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। लेकिन सरकार ने किसानों के उत्पादों पर आयात शुल्क खत्म कर दिया है। किसानों पर एक नई मार पड़ रही है। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी का एक विशाल जुलूस बरनाला रैली के लिए रवाना किया गया, जिसमें अनगिनत बसें, कैंटर, छोटे हाथी और अनगिनत वाहन शामिल थे।

इस मौके पर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सबरा, जिला कोषाध्यक्ष गुरलाल सिंह पंडोरी, जिला नेता हरप्रीत सिंह सिधवां, जिला नेता सलविंदर सिंह जानियां, जिला अध्यक्ष गुरमेल सिघ रेडवां, जिला नेता सरवन सिंह बाऊपुर, जिला प्रेस सचिव हरप्रीत सिंह कोटली गाजरां ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि आज मालवा में उत्तर भारत के 18 संगठनों और संयुक्त मोर्चा (गैर राजनीतिक) द्वारा एक रैली आयोजित की जा रही है। जिसमें जालंधर जिले से एक विशाल काफिला भाग लेगा। उन्होंने कहा कि 2 जनवरी को जंडियाला गुरु रैली सिस्टम के लोगों ने सरकार को बता दिया है कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं और संघर्ष के लिए तैयार हैं। उसी तरह आज की मालवा रैली 13 फरवरी को होने वाले दिल्ली आंदोलन की पृष्ठभूमि तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि यदि हमें देश को नशा मुक्त बनाना है तो मजदूरों को 200 दिन का रोजगार देना होगा।

बेरोजगारी दूर करनी होगी, किसानों-मजदूरों के लिए कम से कम 10 हजार रुपये वृद्धावस्था पेंशन लेनी होगी। फसलों के लाभकारी दाम लेने होगे। भारत को WTO से बाहर करना होगा।  किसान-कर्मचारियों की मांगी हुई नीतियों को लागू करना होगा। दिल्ली आंदोलन के शहीदों को न्याय दिलाना होगा। आबादकारों को स्थाई मालिकाना हक दिया जाए। किसानों को कर्ज से मुक्ति दिलाई जाए, फसलों के दाम डॉ. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार लिए जाएं। सभी फसलों की सरकारी खरीद का कानून बनाया जाए, दिल्ली आंदोलन दौरान किसानों व मजदूरों पर दर्ज हुए पर्चे रद्द किए जाएं। किसानों ने कहा कि हमें दिल्ली आंदोलन के दौरान शहीद किसानों और मजदूरों को मुआवजा दिलाना है, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिलानी है, लखीमपुर खीरी मामले पर न्याय दिलाना है, तो हर हाल में हमें दिल्ली मोर्चा शुरू करना है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी वर्ग विशेष का नहीं बल्कि सभी का संयुक्त आंदोलन है। इसलिए इसमें किसान, मजदूर, दुकानदार, कर्मचारी, छात्र, महिलाएं, बच्चे, युवा, बुजुर्ग भाग लेंगे। 

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