पंजाबः भारतीय किसान यूनियन की सरकार को चेतावनी, लगाएंगे पक्का मोर्चा

चंडीगढ़ः किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दे दी है। उनका कहना है कि अगर चंडीगढ़ प्रशासन मोर्चा लगाने के लिए जगह नहीं देता है, तो हम पंजाब के पानी की रक्षा के लिए 18 जनवरी को चंडीगढ़ में पक्का मोर्चा लगाएंगे। किसान भवन में पांच किसान संगठनों ने बैठक के दौरान 18 जनवरी से शुरू होने वाले धरने को लेकर चर्चा की गई। बैठक में भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल), एआइकेएफ, किसान संघर्ष कमेटी, भारतीय किसान यूनियन (मानसा) व आजाद किसान संघर्ष कमेटी शामिल थी।

भारतीय किसान यूनियन राजेवाल के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि हम अपना हक मांग रहे हैं और अब हम दिल्ली संघर्ष की तर्ज पर ये स्थायी मोर्चे स्थापित करेंगे बलबीर सिंह राजेवाल, परेम सिंह भंगू, कंवलप्रीत सिंह पन्नू, बौघ सिंह मानसा और हरजिंदर सिंह टांडा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बहाने पंजाब के पानी को लूटने के लिए एक-दूसरे से मिलीभगत कर रहे हैं। किसान नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार के हस्तक्षेप को आमंत्रित करने के लिए पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 78, 79 और 80 को बेईमानी से जोड़ा गया है। इसलिए इन धाराओं को निरस्त किया जाना चाहिए। नदी जल के संबंध में पिछले सभी समझौतों की समीक्षा की जानी चाहिए क्योंकि वे अवैध और असंवैधानिक हैं। किसानों ने कहा कि चंडीगढ़ को पंजाब में स्थानांतरित कर दिया जाए क्योंकि पुनर्गठन अधिनियम के तहत हरियाणा को अपनी राजधानी स्थापित करने के लिए पांच साल का समय दिया गया है।

लेकिन 57 साल बाद भी केंद्र ने चंडीगढ़ का मसला अनसुलझा रखा है। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए ट्रिब्यूनल गठित करने, एसवाईएल की जगह वाईएसएल की मांग करने और सुप्रीम कोर्ट में पंजाब के मामले को प्रभावी ढंग से पेश नहीं करने के लिए राज्य सरकार की आलोचना की।  यदि उनकी मांगों पर संविधान के अनुसार सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया तो 18 जनवरी को इन मांगों के समाधान के लिए चंडीगढ़ में पक्का मोर्चा लगाया जाएगा। राजेवाल ने कहा कि चूंकि पानी राज्यों की सूची की प्रविष्टि संख्या 17 पर सूचीबद्ध एक राज्य का विषय है, इसलिए केंद्र के पास कोई कार्यकारी आदेश पारित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इसके अलावा एमएसपी, स्वामीनाथन रिपोर्ट व लखीमपुर खीरी के आरोपितों की सजा को लेकर चर्चा की गई।

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