Punjab News: तस्कर Akshay Chhabra और Jaspal Singh Goldy गिरफ्तार, दोनों को NCB भेजेंगी Dibrugarh jail

लुधियानाः पंजाब में नशे की चेन तोड़ने के लिए NCB ने एक्शन लेना शुरू कर दिया है। इसी के तहत NCB की टीम ने कुख्यात ड्रग माफिया अक्षय छाबड़ा और जसपाल सिंह उर्फ ​​गोल्डी को तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया है। वहीं नशे की चेन तोड़ने के लिए NCB द्वारा तस्करों को असम के डिब्रूगढ़ जेल भेजा जा रहा है। हाल ही में गुरदासपुर में तस्कर को काबू करके NCB असम के डिब्रूगढ़ जेल भेजा था। दरअसल, 13 अगस्त 2024 को बलविंदर सिंह उर्फ ​​बिल्ला हवेलियन के खिलाफ भी यही एक्शन लिया गया था।वहीं अब बताया जा रहा है कि इन दोनों तस्करों को असम के डिब्रूगढ़ जेल में भेजा जाएगा ताकि उनकी नशा तस्करी की गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।

मिली जानकारी के अनुसार अक्षय छाबड़ा और जसपाल गोल्डी दोनों जेल में बंद होने के बावजूद अवैध गतिविधियां करते हुए नशा तस्करी करवा रहे है। जिसके परिणामस्वरूप अक्षय छाबड़ा के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत 03 अतिरिक्त एफआईआर और जसपाल सिंह उर्फ ​​गोल्डी के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत 01 अतिरिक्त एफआईआर दर्ज की गई है। अक्षय छाबड़ा (किंगपिन) को जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से NCB ने गिरफ्तार किया था। वह 24 नंवबर 2024 को देश छोड़कर शारजाह, संयुक्त अरब अमीरात भागने की कोशिश कर रहा था। इसके अलावा, एनसीबी सी.आर ने जब जांच की तो अक्ष्य छाबड़ा का ड्रग सिंडिकेट चलाने वालों में से जसपाल सिंह उर्फ गोल्डी का नाम भी सामने आया।

जांच से पता चला है कि लुधियाना स्थित इस अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट ने करीब आईसीपी अटारी, पंजाब, मुंद्रा सी पोर्ट, गुजरात और जम्मू-कश्मीर से 1400 किलोग्राम से अधिक की हैरोइन तस्करी की है। इस मामले में NCB ने 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस केस में किंगपिन,तस्कर सहित दो अफगान नागरिक शामिल हैं। अभी तक NCB ने इन अपराधियों से 40 किलोग्राम हेरोइन, 0.557 किलोग्राम अफीम, 23.645 किलोग्राम संदिग्ध नारकोटिक्स पाउडर, 04 बोतलें एचसीएल, 31 जिंदा गोलियां और 01 मैगजीन रिकवर की। इस ग्रुप की 02 फैक्ट्रियों/हेरोइन प्रोसेसिंग ठिकानों का भी भंडाफोड़ किया गया है। अब तक 57 करोड़ से ज्यादा इस ड्रग सिंडिकेट की अचल/चल संपत्तियों को एनसीबी चंडीगढ़ द्वारा फ्रीज कर दिया गया है।

जांच में NCB ने पाया था कि छाबड़ा दूसरे देशों से कच्चे माल की तस्करी करता था। अफगान के वैज्ञानिकों से गांव मानकवाल और बाबा दीप सिंह नगर में स्थित दो गुप्त प्रयोगशालाओं में दवाएं तैयार करवाई जाती थी। छाबड़ा का गरीबी से अमीरी तक का सफर महज दो साल का था। उसके पिता की गिल रोड पर अनाज मंडी के पास एक चाय की दुकान थी और वह अपने पिता की मदद करता था। बाद में उन्होंने एक कैमिस्ट की दुकान पर काम करना शुरू कर दिया। इसी बीच वह नशीली दवाओं की तस्करी में शामिल हो गया। दो साल में उसने शहर में करोड़ों रुपए के आलीशान मकान और अन्य संपत्तियां खरीद लीं।

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