Punjab News: जापानी एजेंसी JICA के सहयोग से 792 करोड़ का बड़ा प्रोजेक्ट जल्द होगा शुरू

Highlights:
  1. पंजाब सरकार का 2030 तक वन क्षेत्र को 7.5% तक बढ़ाने का लक्ष्य।
  2. 792.88 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना से किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद।
  3. शिवालिक क्षेत्र में वनीकरण और इकोटूरिज्म को बढ़ावा देने पर विशेष जोर।

चंडीगढ़, 6 नवंबर 2024: पंजाब राज्य सरकार, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में, पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र को बढ़ाने के लिए एक बड़ी योजना पर काम कर रही है। इस परियोजना का उद्देश्य न केवल राज्य में हरित क्षेत्र को बढ़ाना है बल्कि किसानों की आय में वृद्धि करना और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना भी है। राज्य सरकार ने 2030 तक वन क्षेत्र को 7.5% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, और इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (JICA) के साथ एक महत्वपूर्ण सहयोग की शुरुआत की है।

परियोजना का महत्व और JICA के साथ सहयोग

पंजाब की जलवायु परिस्थितियाँ और तेजी से घटता वन क्षेत्र लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं। इसलिए, राज्य सरकार ने कृषि वानिकी और जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए JICA के साथ एक विशेष परियोजना प्रस्तावित की है। इस परियोजना का कुल बजट 792.88 करोड़ रुपये है और इसका उद्देश्य राज्य में हरित क्षेत्र को बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को वित्तीय लाभ प्रदान करना है।

वन क्षेत्र में विस्तार और कृषि वानिकी

कृषि वानिकी (Agroforestry) का उद्देश्य किसानों को उनकी भूमि पर वृक्षारोपण करने के लिए प्रेरित करना है ताकि वे पारंपरिक फसलों के साथ-साथ वृक्षारोपण से भी आय कमा सकें। इस प्रक्रिया में, किसान अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में वृक्षों का रोपण कर सकते हैं, जिससे न केवल वन क्षेत्र का विस्तार होगा बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी। इससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी होगा और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

पर्यावरणीय प्रभाव और प्रदूषण रोकथाम

वर्तमान में पंजाब के कई क्षेत्रों में पराली जलाने से प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है। इस परियोजना के माध्यम से, पराली जलाने की समस्या को कम करने के प्रयास किए जाएंगे। JICA के सहयोग से बनने वाली इस योजना में किसानों को जैविक कचरे को खाद में बदलने की तकनीक सिखाई जाएगी। इससे खेतों में पराली जलाने के बजाय उसे पुन: उपयोग में लाने का एक बेहतर विकल्प मिलेगा।

जल संसाधनों का संरक्षण

पंजाब में भूजल का स्तर तेजी से घटता जा रहा है, जो कि कृषि और घरेलू उपयोग के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इस परियोजना के तहत भूजल को संरक्षित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कृषि वानिकी और वृक्षारोपण से मिट्टी का कटाव कम होगा और भूजल स्तर में भी सुधार आएगा। शिवालिक क्षेत्र में जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन (Integrated Watershed Management) को भी सशक्त किया जाएगा, जिससे भूजल स्तर में संतुलन बना रहेगा।

जैव विविधता संरक्षण और इकोटूरिज्म को बढ़ावा

पंजाब का वन विभाग जैव विविधता संरक्षण के लिए शिवालिक और अन्य क्षेत्रों में इकोटूरिज्म (Ecotourism) को भी बढ़ावा देगा। इसके माध्यम से पर्यटकों को जैव विविधता से परिचित कराने के साथ-साथ राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकेगा। वेटलैंड्स (Wetlands) और जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इन प्रयासों से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक भी किया जा सकेगा।

आमदनी के नए स्रोत और स्थायी विकास

कृषि और पशुपालन के साथ-साथ किसानों को नए आय स्रोतों से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे। इस परियोजना में कृषि वानिकी को प्रोत्साहित कर किसानों की पारंपरिक कृषि आय के साथ-साथ वृक्षारोपण और पशुपालन से अतिरिक्त आय का प्रावधान किया जाएगा। इससे किसानों का जीवनस्तर बेहतर होगा और उन्हें परंपरागत कृषि में बदलाव के बिना एक स्थिर आर्थिक आधार प्राप्त होगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय (MoEF&CC), JICA और पंजाब वन विभाग मिलकर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करेंगे। परियोजना को 2025-26 से शुरू किया जाएगा और इसे पाँच वर्षों में पूरा करने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा, समय-समय पर परियोजना की समीक्षा की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी उद्देश्यों को सही ढंग से पूरा किया जा रहा है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस परियोजना का स्वागत किया है। उनके अनुसार, पंजाब में वन क्षेत्र का विस्तार न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद होगा बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी नए अवसर खोलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना पंजाब के पर्यावरण और जैव विविधता को समृद्ध बनाएगी और ग्रामीण समुदायों की आय में भी बढ़ोतरी करेगी। स्थानीय किसानों का भी मानना है कि सरकार के इस कदम से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और वे नए आय स्रोतों से जुड़ सकेंगे।

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