छत से गिरा 12 वर्षीय बच्चा, मौत

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20 मिनट तक रहा तड़पता, 9 साल पहले हुई थी पिता की मौत

सीकरः शहर के वार्ड नबर 41 में दर्दनाक घटना होने का मामला सामने आया है। जहां 5वीं मंजिल के रोशनदान से गिरने के बाद मासूम बच्चे की मौत हो गई। मृतक की पहचान कुलदीप के रूप में हुई है। घटना घर से 150 मीटर दूरी पर हुई। बताया जा रहा है कि छत्त से गिरने के बाद कुलदीप करीब 20 मिनट तक जमीन पर पड़ा तड़पता रहा। बाद में पास काम कर रहे लोगों ने उसे देखा तो परिजनों को सूचना दी। इसके बाद तो उसे तुरंत निजी वाहन से एसके अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन 3 भाई बहनों में सबसे छोटा और लाडला कुलदीप तब तक दम तोड़ चुका था। मृतक कुलदीप का घर रजीडेंसी से करीब 150 मीटर दूर है। दोस्तों के साथ वह अमूमन गोगोमेड़ी के पीछे स्थित अपने घर व गली में ही खेलता था।शाम करीब 5 बजे रेजीडेंसी की छत पर चला गया था। जहां संभवतया पतंग उड़ाते समय वह हादसे का शिकार हो गया। शव को मोर्चरी में रखवाने के बाद लोग वहां इकट्ठा होकर रेजीडेंसी मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई व मुआवजे की मांग पर अड़ गए। शव लेने से इन्कार करते हुए वे धरना देकर बैठ गए। इस बीच रेजीडेंसी मालिक के साथ नगर परिषद की भी बड़ी लापरवाही सामने आई। स्टिल्ट के अलावा ग्राउंड फ्लोर और दो मंजिल की अनुमति के बावजूद रेजीडेंसी मालिक ने उसमें एक अतिरिक्त मंजिल भी बना रखी थी। लेकिन, पहले चेतने की बजाय नगर परिषद ने मासूम की मौत के बाद उसे नोटिस जारी कर खुद को सवालों व संदेह के कटघरे में खड़ा कर लिया। धरने में मासूम की मां मीनू कंवर भी शामिल रही। 2015 में पति को खोने के बाद बेटे को भी खो चुकी मां इस दौरान बेसुध व बदहवास रही। रह-रह कर उसे बिलखते देख हर किसी का कलेजा फटा जा रहा था। 21 वर्षीय भाई हेमंत ने बताया कि कुलदीप पांचवी कक्षा में पढ़ रहा था। पिता दिलीप सिंह की 9 साल पहले मौत के बाद परिवार में आय का साधन नहीं होने से उसे छोटी उम्र से ही मजदूरी करनी पड़ी। दोनों भाइयों के बीच 11 साल की एक बहन है। बकौल हेमंत चंचल स्वभाव का कुलदीप पूरे परिवार का लाडला था। मासूम की मौत के बाद वार्डवासियों ने रेजीडेंसी के निर्माण पर भी सवाल उठाया। जिसके बाद हुई जांच में रेजीडेंसी में नगर परिषद की अनुमति से भी एक मंजिल ज्यादा बनना सामने आया। इसके बाद परिषद ने रेजीडेंसी मालिक निशा माथुर के खिलाफ अतिक्रमण का नोटिस जारी कर तीन दिन में स्पष्टीकरण देने को कहा। परिजनों के साथ वार्डवासी सुबह 9 बजे से ही मोर्चरी के बाहर इकट्ठा होना शुरू हो गए। बिर्ल्डस के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ उन्होंने परिजनों को 50 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की। कलक्टर को लिखित ज्ञापन भी दिया। इस पर पुलिस व प्रशासन दिनभर उन्हें समझाने में जुटा रहा। पर कई दौर की वार्ता के बाद भी मामला नहीं सुलझा। आखिरकार करीब छह बजे बिल्डर मनोज सोनी के प्रतिनिधी से 15 लाख के मुआवजे पर सहमति व एसडीएम से सरकारी सहायता के आश्वासन के बाद प्रदर्शन 9 घंटे बाद शांत हुआ। इस दौरान उप जिला प्रमुख ताराचंद धायल, कानाराम जाट, वाल्मीकी समाज अध्यक्ष विक्की लखन, पार्षद गोपाल पार्षद, एडवोकेट हनुमानसिंह पालवास, आनंद सिंह कच्छावा आदि मौजूद रहे।

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