शिरोमणि अकाली दल (बादल) के वरिष्ठ नेता और जालंधर सैंट्रल हलके के प्रभारी जिला प्रधान स. इकबाल सिंह ढींढसा का कहना है कि अकाली दल की उत्पत्ति ही सिख समुदाय के हितों की रक्षा से हुई है। अकाली दल (बादल) की स्थापना से लेकर आज तक पंजाब और पंजाबियत के साथ साथ सिखों के हितों की रक्षा और भाईचारा को कायम करना है। पंजाब के लोगों ने भारत-पाक बंटवारे से लेकर 84 के दंगों का दंश झेला है, यहां की मिट्टी में इतनी ताकत है कि गिरने के बाद भी हमारे अंदर खड़े होने का जज्बा प्रदान करती है। चाहे, बिजनेस हो, या फिर राजनीति। जगजाहिर है कि भारतीय जनता पार्टी धीरे-धीरे क्षेत्रीय दलों को तोड़ रही है, लेकिन अकाली दल (बादल) वह पार्टी है, जिसे तोड़ना भाजपा के बूते की बात नहीं है। हम उस ‘सरबंसदानी’ के कौम हैं, जिनका इतिहास बलिदानों और कुर्बानियों से भरा पड़ा है। चार साहिबजादों का सर्वोच्च बलिदान पूरी दुनिया में मिसाल माना जाता है। Lokmarg.com के लिए महाबीर जायसवाल से बातचीत में इकबाल सिंह ढींढसा ने अपनी पार्टी की भविष्य की योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की।
प्रश्न 1. भारत के सबसे पुराने राजनीतिक दलों में से एक होने के नाते, जो अल्पसंख्यक सिख समुदाय के अधिकारों की रक्षा करना चाहता है, भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में संघवाद के महत्व को आप किस प्रकार देखते हैं?
उत्तर – हम पार्टी की स्थापना के पहले दिन से लेकर आज तक पंजाब और पंजाबियत के लिए लड़ रहे हैं। उनके हकों, उनके अधिकारों और संस्कृति के लिए लड़ रहे हैं। सिख समुदाय के अधिकारों की लड़ाई पहले दिन से लेकर आज तक जारी है। शिरोमणि अकाली दल (ब) का एक ही एजेंडा है कि पंजाब और पंजाबियत के हितों की रक्षा करना। इसके लिए हमारी पार्टी ने बड़ी कुर्बानियां दी, आज भी हमारी प्राथमिकता पंजाब और पंजाबियत है। सिख समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए हमारी पार्टी कुछ भी कर सकती है। पंजाब ने अब यह फैसला किया है कि पंजाब और पंजाबियत के हितों के लिए एकजुट होकर लड़ेंगे।
प्रश्न 2. क्या आपको लगता है कि नरेंद्र मोदी के 2014 में केंद्र की सत्ता संभालने के बाद से भारत में संघवाद, जिसमें सत्ता का विकेंद्रीकरण होता है, लगातार कमजोर होता जा रहा है? यदि हाँ, तो कृपया अपने विचार के समर्थन में उदाहरण दीजिए।
उत्तर – सभी पार्टी अपना एजेंडा अपने हिसाब से चलाती हैं। भाजपा अपने हिसाब से अपनी पार्टी चला रही है। अकाली दल अपने हिसाब से अपना काम कर रहा है। पंजाब का परिदृष्य अलग है। हिन्दुस्तान को आजाद करवाने के लिए 95 फीसदी कुबार्नियां पंजाब के लोगों ने दी। हिन्दुस्तान को बचाने के लिए, धर्म और संस्कृति को बचाने के लिए हमारे महान गुरुओं ने कुर्बानी दी है। दिल्ली में कुर्सी पर जो भी बैठता है, उसे लगता है कि वह पूरे देश को कंट्रोल कर लेगा, लेकिन ऐसा संभव नहीं है। हमारा देश विविधता वाला देश है। तमाम संस्कृति और गुरुओं फकीरों का देश है। पंजाब और पश्चिम बंगाल दो ऐसे प्रदेश हैं, जहां के लोगों को किसी के आगे झुकना बिल्कुल पसंद नहीं है। कुछ शक्तियां हैं, जो पंजाब को कमजोर करना चाहती हैं, लेकिन अकाली दल ऐसे शक्तियों का मुंहतोड़ जवाब दे रहा है।
प्रश्न 3. भाजपा पर अपने ही क्षेत्रीय सहयोगियों को आपस में बांटने, उन्हें धीरे-धीरे कमजोर करने और फिर हाशिये पर धकेलने का आरोप है। हाल ही में महाराष्ट्र में ऐसा ही देखने को मिला। आप भाजपा के सहयोगी रहे हैं और आपने इसके कामकाज को करीब से देखा है। क्या आपको इन आरोपों में कोई सच्चाई नजर आती है?
उत्तर – शिरोमणि अकाली दल (ब) को कई बार तोड़ने की कोशिश की गई। लेकिन तोड़ने वाली शक्तियां हमारे आगे नहीं टिक सकी। हमारे लीडर और वर्कर पक्के हैं। हां, कुछ कारणों से मतभेद हो जाते हैं, कुछ देर के लिए हमारे नेता और वर्कर कहीं जा सकते हैं, लेकिन उन्हें पता है कि पंजाब और पंजाबियत की हित शिरोमणि अकाल दल (ब) से सुरक्षित है। जिससे वे हमारे पास वापस आ जाते हैं। हमारे नेताओं और वर्करों का जाना टैंपरेरी है। दिल्ली की पार्टियां हम पंजाबियों को तोड़ नहीं सकती है। क्योंकि हममें पंजाब बसता है।
प्रश्न 4. आपको क्या लगता है कि भाजपा अपने सहयोगियों सहित क्षेत्रीय राजनीतिक समूहों से खतरा क्यों महसूस करती है?
उत्तर – पंजाब-पंजाबियत और अकाली दल (ब) एक दूसरे के पूरक हैं। पंजाब में सिख समुदाय के साथ साथ हिन्दू भाईचारा को एकजुट और अमन शांति के लिए अकाली दल (ब) और भाजपा एकजुट हुआ। पंजाब में हिन्दू सिख एकता एक मिसाल है। अमन शांति से सारे पर्व और त्योहार मनाए जाते हैं। पंजाब में अकाली दल का सबसे बड़ा जन आधार है, भाजपा अगर क्षेत्रीय दलों के साथ भाईचारा निभाएगी तो उसे कोई खतरा नहीं है।
प्रश्न 5: विभिन्न राज्यों (जैसे तमिलनाडु और केरल) की कई क्षेत्रीय पार्टियों ने आरोप लगाया है कि भाजपा एक मजबूत केंद्र चाहती है जो सातवीं अनुसूची के अनुसार राज्यों की सूची में आने वाले क्षेत्रों और सत्ता को प्रभावित कर सके? क्या आप इस विचार से सहमत हैं?
उत्तर – केंद्र सरकार ने पंजाब में राज्य सरकार की शक्तियां कम करने की कोशिश की। इसमें बार्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) को अधिकार क्षेत्र बढ़ा दिया गया। जिससे वे सीमा से सटे शहरों में 15 किमी तक अपना अधिकार रख सकते हैं। केंद्र सरकार के इस फैसले से पंजाब के लोगों में नाराजगी है। दुनिया में अगर आतंकवाद खत्म हुआ है, तो वह हमारी पंजाब पुलिस ने खत्म किया। ऐसे में केंद्र सरकार के अधीन आते बीएसएफ को ज्यादा अधिकार देना ठीक नहीं है।
प्रश्न 6. भाजपा जैसे शक्तिशाली राजनीतिक नेटवर्क का मुकाबला करते समय क्षेत्रीय दलों के सामने क्या सीमाएँ और चुनौतियाँ हैं? ऐसी धारणा है कि केंद्रीय दलों के पास चुनाव में हेरफेर करने के लिए अधिक संसाधन और धनहोता है।आपके विचारमें, क्या क्षेत्रीय दल इस बाधा से प्रभावित होते हैं?
उत्तर – एक समय में अटल बिहारी वाजपेयी भाजपा के अकेले सांसद थे, लेकिन अब केंद्र में भाजपा का शासन है, अधिकतर राज्यों में भाजपा की सरकार है। कांग्रेस ने 70 साल तक देश में शासन किया। अब कांग्रेस हाशिए पर है। उतार-चढ़ाव प्रकृति का नियम है। इसे कोई रोक नहीं सकता है, इसे कोई बांध नहीं सकता है। चूंकि भाजपा आज देश की सबसे बड़ी पार्टी है, उसके पास सभी संसाधन है। फिर भी क्षेत्रीय दलों के पास अपनी पहचान, अपनी संस्कृति है, अपने लोगों के लिए लड़ने का माद्दा है। हमारा फैसला कोई दिल्ली में बैठकर बड़ा नेता नहीं करेगा, बल्कि पंजाब के लोग करते हैं।
प्रश्न 7. अकाली दल राज्य विधानसभा में सिर्फ एक सीट और लोकसभा में भी सिर्फ एक सीट तक सिमट गया है। यह एक बहुत बड़ा पतनहै।आपके विचार से ऐसा क्यों हुआ? क्या इस पतन के कारणों का पता लगाने के लिए कोई आंतरिक समीक्षा की गई है?
उत्तर – भाजपा ने षड़यंत्र रचा। गुरुद्वारा प्रबंधक कमटियों पर कब्जा करने की कोशिश की। सिख सुमदाय के बीच अकाली दल के नेताओं को लेकर भाजपा के लोगों ने गलत प्रचार किया। मीडिया, सोशल मीडिया और सीनियर नेताओं को गुमराह किया गया। पंजाब के भोले-भोले लोगों से झूठा बोला गया। एक अभियान चलाकर पंजाब के लोगों को गुमराह कर वोट हासिल किया गया। आज पंजाब के लोग पछता रहे हैं, भाजपा और मौजूदा आम आदमी पार्टी की सरकार को लोग गालियां दे रहे हैं। अगर आज इलेक्शन हो जाए तो आम आदमी पार्टी और भाजपा का सूफड़ा साफ हो जाएगा।
