डेली संवाद, लुधियाना। Punjab News: लुधियाना में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के खिलाफ उद्योग जगत का गुस्सा सोमवार को खुलकर सामने आया। ‘कंसोर्टियम ऑफ इंडस्ट्री एंड ट्रेड’ के बैनर तले आयोजित प्रस्तावित शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को पुलिस प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रोक दिया। यह प्रदर्शन फोकल पॉइंट स्थित पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय के बाहर होना था, लेकिन भारी पुलिस बल, वाटर कैनन और दंगा-रोधी वाहनों की तैनाती के चलते उद्योगपतियों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई।
इस कंसोर्टियम में पंजाब (Punjab) के लुधियाना के 14 से अधिक प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक संगठन शामिल हैं। उद्योग प्रतिनिधियों का आरोप है कि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लगातार उद्योगों को परेशान किया जा रहा है और मनमाने तरीके से कार्रवाई की जा रही है। प्रदर्शन रोकने के बाद प्रशासन और उद्योग प्रतिनिधियों के बीच एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें लुधियाना के पुलिस उपायुक्त (DCP) जसकिरणजीत सिंह तेजा (IPS) और अतिरिक्त उपायुक्त अमित कुमार (IAS) भी मौजूद रहे।
उद्योगों के साथ अनुचित व्यवहार
बैठक के दौरान उद्योगपतियों ने अपनी समस्याओं को जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने कहा कि वे लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण विरोध करना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई। उद्योग संगठनों ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य पर्यावरण अभियंता आर.के. रतरा का तत्काल तबादला करने की मांग उठाई। उनका आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था में उद्योगों के साथ अनुचित व्यवहार किया जा रहा है।
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उद्योग जगत ने हाल ही में औद्योगिक इकाइयों को जारी किए गए सभी ‘शो कॉज नोटिस’ को भी वापस लेने की मांग की। प्रतिनिधियों ने इन नोटिसों को “बेबुनियाद” और “अनुचित” बताते हुए कहा कि इससे उद्योगों में भय और अस्थिरता का माहौल पैदा हो रहा है। उन्होंने लुधियाना में एक ईमानदार और उद्योग-हितैषी अधिकारी की नियुक्ति की मांग भी प्रशासन के सामने रखी।

बिजली कनेक्शन काटना उचित नहीं
बैठक में उद्योगपतियों ने यह भी मांग की कि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन के साथ उनकी सीधी बैठक करवाई जाए, ताकि वे अपनी समस्याएं और शिकायतें सीधे उनके सामने रख सकें। उद्योग संगठनों का कहना था कि बिना किसी पर्याप्त अवसर के उद्योगों के बिजली कनेक्शन काटना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी इकाई में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसे सुधार का मौका और पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
इसके अलावा, उद्योग जगत ने ‘कंसेंट फी’ और अन्य शुल्कों की गणना को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने मांग की कि यह शुल्क प्लांट और मशीनरी के मूल्यह्रास के बाद के मूल्य (Depreciated Value) के आधार पर तय किया जाए, न कि मूल्यह्रास से पहले के मूल्य और अन्य गैर-उत्पादक संपत्तियों को जोड़कर। उद्योगपतियों का कहना है कि मौजूदा प्रणाली उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है।
“पंजाब बंद” का आह्वान
उद्योग संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि 5 जून 2026 तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरे पंजाब के उद्योगों को “पंजाब बंद” का आह्वान करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि उद्योग पर्यावरण नियमों के पालन और सतत विकास के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन “अनावश्यक उत्पीड़न” और “अनुचित कार्रवाई” किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी।
इस प्रदर्शन और बैठक में यूनाइटेड साइकिल्स एंड पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल ऑर्गेनाइजेशन, फास्टनर्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एपेक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पंजाब), लघु उद्योग भारती, लुधियाना हैंड टूल्स एसोसिएशन सहित कई बड़े औद्योगिक संगठनों ने समर्थन दिया। फिलहाल उद्योग जगत प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहा है, जबकि इस मुद्दे ने पंजाब के औद्योगिक माहौल में नई बहस छेड़ दी है।
