Punjab News: सरपंच जशन बावा आत्महत्या मामले में लोगों ने किया रोड जाम, देखें वीडियो

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फिरोजपुरः जिले के कस्बा गुरु हर सहाय के गांव तरिंडा के सरपंच जशन बावा की आत्महत्या मामले में गुरु हर सहाय के क्षेत्रीय विधायक फौजा सिंह सरारी और उनके पीए के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर बहिराम थाने के बाहर बड़े स्तर पर धरना दिया जा रहा है। इस दौरान लोगों ने फिरोजपुर-फाजिल्का रोड जाम कर दिया है। परिवार और संगठनों की मांग है कि विधायक और उनके पीए के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया जाए। राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ अलग-अलग संगठन भी धरने में शामिल हुए हैं।

सरपंच जशन बावा की आत्महत्या मामले में जहां अकाली दल, कांग्रेस और भाजपा इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं आम आदमी पार्टी गुरु हर सहाय से विधायक और उनके पीए के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने को लेकर प्रदर्शन कर रही है। इसके अलावा परिवार और संगठनों द्वारा लाखो के बहिराम थाना के बाहर धरना प्रदर्शन किया जा रहा है और विधायक तथा उनके पीए के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है। संगठनों का कहना है कि सरपंच को इतना तंग और परेशान किया जा रहा था कि उसने मौत को ही गले लगा लिया।

क्योंकि उस पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था और उससे पैसे वसूले जा रहे थे। सरपंच होने के बावजूद उसे सरपंची करने नहीं दिया जा रहा था और लगातार उसे परेशान किया जा रहा था, जिससे दुखी होकर उसने यह कदम उठाया। अब आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इस मामले में राजनीति भी सक्रिय हो चुकी है। कांग्रेस के पूर्व विधायक रमिंदर आवला भी धरने में पहुंचे और उन्होंने परिवार को न्याय दिलाने की बात कही तथा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब तक परिवार को न्याय नहीं मिलता, वे परिवार के हर पक्ष में खड़े रहेंगे।

विधायक फौजा सिंह सरारी ने सोशल मीडिया पर अपना एक बयान जारी किया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि कुछ शरारती लोग परिवार को भटकाकर राजनीति खेल रहे हैं और उन्हें परमात्मा पर पूरा भरोसा है कि सच का सच सामने आएगा। समय आने पर जो इस मामले में राजनीति कर रहे हैं, उन्हें भी मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। जो लोग साजिश के तहत इस मामले को तूल दे रहे हैं, उन्हें भी जल्द बेनकाब किया जाएगा। संगठनों का कहना है कि जब तक परिवार को न्याय नहीं मिलता और विधायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं होता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा और यह संघर्ष और बड़ा भी हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे-सीधे प्रशासन की होगी।

 

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