Punjab News: जमीन को लेकर हुआ विवाद, एक पक्ष ने दूसरे पर पुलिस संरक्षण में बिल्डिंग गिराने के लगाए आरोप, देखें वीडयो

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लुधियाना: जिले में लोधी क्लब रोड पर स्थित जमीन को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। हालांकि जमीनी विवाद को लेकर कोर्ट में केस चल रहा है। लेकिन उसके बावजूद के एक पक्ष चरणजीत सिंह बजाज ने दूसरे पक्ष पर पुलिस संरक्षण में इमारत को गिराने के आरोप लगाए है। उनका कहना है कि कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए और पुलिस के संरक्षण में खुलेआम दूसरे पक्ष द्वारा गुंडागर्दी की जा गई। पहले पक्ष ने कहा कि 2 जुलाई की रात बसंत एन्क्लेव के मालिक अमित बसंत ने अपने साथियों के साथ मिलकर बजाज एंड कंपनी के निर्माण को अवैध रूप से ध्वस्त कर दिया।

पीड़ित पक्ष जब आरोपियों की गुंडागर्दी की शिकायत करने पुलिस के पास गया, तो पुलिस कर्मियों ने दबाव में होने की बात कहकर आने से साफ इंकार कर दिया। इस गुंडागर्दी के खिलाफ बजाज एंड कंपनी के मालिक चरणजीत सिंह बजाज (चन्नी बजाज) के नेतृत्व में कंपनी के प्रतिनिधियों ने आज पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत देकर न्याय की मांग की। जिन्होंने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

इस मौके पर चन्नी बजाज ने कहा कि वर्ष 2018 में उन्होंने चरणजीत कौर से लोधी क्लब रोड स्थित करीब 789 गज जमीन किराए पर ली थी। बाद में उन्होंने यह जमीन खरीद ली और उनके पास इसकी बाकायदा रजिस्ट्री भी है। लेकिन दूसरे पक्ष ने जमीन पर जबरन कब्जा करने की नीयत से प्रशासन के पास झूठी शिकायत दर्ज करवा दी, जिसके चलते इस जमीन का इंतकाल नहीं हो सका और अब मामला कोर्ट में चल रहा है और इस संबंध में उनके पास कोर्ट का स्टे ऑर्डर भी है। उन्होंने कहा कि बीती रात आरोपी पहले, तो सड़क के दूसरी तरफ उनकी अपनी जमीन पर किए गए निर्माण को गिरा रहे थे।

लेकिन देर रात उन्होंने हमारी कंपनी की जमीन पर बने निर्माण को भी गिराना शुरू कर दिया। इस दौरान अंदर सोफा और फ्रिज समेत करोड़ों रुपये का सामान पड़ा था। वह पुलिस से मदद के लिए पुलिस चौकी शहीद भगत सिंह नगर और दुगरी थाने भी गए, लेकिन वहां मौजूद पुलिस कर्मियों ने ऊपर से दबाव होने की बात कहकर हमारी मदद करने से इनकार कर दिया। चन्नी बजाज ने साफ किया कि इस तरह की धक्केशाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अगर पुलिस की तरफ से न्याय नहीं मिला, तो वह मजबूरन अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। इसके परिणाम के लिए पुलिस, प्रशासन और संबंधित पक्ष खुद जिम्मेदार होंगे।

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