अमृतसरः पटना साहिब मामले में श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा लिए गए फैसलों का सिख संगठनों और प्रमुख पंथिक हस्तियों द्वारा लगातार समर्थन किया जा रहा है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य भाई गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने कहा कि पटना साहिब के पंज प्यारों द्वारा अकाल तख्त साहिब की पंथिक सर्वोच्चता को चुनौती देने वाला फैसला न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि यह सिख पंथ में भ्रम और मतभेद पैदा करने वाली घटना है। उन्होंने कहा कि यह पूरा विवाद तब गंभीर हो गया जब राजनीतिक नेता सुखबीर सिंह बादल को पटना साहिब द्वारा तनखैया घोषित कर दिया गया।
इसके बाद श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने तख्त पटना साहिब के अतिरिक्त हेड ग्रंथी भाई गुरदयाल सिंह, प्रबंधक कमेटी के सदस्य हरपाल सिंह जौहल और डॉ. गुरमीत सिंह को अकाल तख्त के आदेशों का उल्लंघन करने और पंथक विवाद को बढ़ाने के आरोप में तनखैया घोषित कर दिया। इसके साथ ही प्रबंधक कमेटी के अन्य सदस्यों जगजोत सिंह सोही, लखविंदर सिंह, गुरविंदर सिंह, इंद्रजीत सिंह, हरबंस सिंह, गोबिंद सिंह लोंगोवाल, राजा सिंह और महिंदरपाल सिंह को भी 15 दिनों के भीतर अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखने को कहा।
भाई ग्रेवाल ने इस मामले में पटना साहिब द्वारा जारी हुक्मनामा को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि यह सिख पंथ की साझी परंपरा और पांचों तख्तों की एकता को कमजोर करने का प्रयास है। उन्होंने अपील की कि पंथिक एकता को बनाए रखने के लिए समूचे सिख जगत को श्री अकाल तख्त साहिब के तत्वावधान में लिए गए निर्णयों का सम्मान करना चाहिए तथा पंथ को तोड़ने की कोशिश करने वाली ताकतों से सावधान रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों को कई प्रमुख संगठनों, सिख विद्वानों तथा संगत की ओर से पूरा सम्मान मिल रहा है।

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