Cyber Crime पर बड़ी कार्रवाईः करोड़ों की धोखाधड़ी का खुलासा, 10 गिरफ्तार

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चंडीगढ़ः पुलिस ने एक बड़े डिजिटल अरेस्ट स्कैम और फेक पॉलिसी फ्रॉड का भंडाफोड़ करते हुए 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह देश-विदेश में बैठकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहा था। इस गिरोह द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ‘सिम बॉक्स’ का भी पुलिस ने खुलासा किया है। यह मामला तब सामने आया जब 11 जुलाई 2023 को एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि उसे एक व्हाट्सएप कॉल आया था, जिसमें एक व्यक्ति ने खुद को आईसीआईसीआई बैंक का अधिकारी बताते हुए उसके आधार और पासबुक की जानकारी मांगी। बाद में वीडियो कॉल पर एक फर्जी सीबीआई अधिकारी ने उसे ‘सेफ कस्टडी’ के नाम पर 1,01,65,094 रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। पुलिस ने तकनीकी जांच की और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और कस्टमर एक्वीजिशन फॉर्म (सीएएफ) का विश्लेषण किया। इससे पता चला कि धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल किया गया मोबाइल नंबर विजय कुमार के नाम पर था। जांच में विजय कुमार और उसके साथियों, कृष्ण और शुभम मेहरा की भूमिका का पता चला। विजय कुमार ने बताया कि उसे कृष्ण ने सिम एक्टिवेट करने के लिए कहा था। पूछताछ के दौरान, पुलिस ने ‘सिम बॉक्स’ का पता लगाया, जिसका उपयोग विदेशी गिरोहों द्वारा किया जाता है। ‘सिम बॉक्स’ एक ऐसा उपकरण है जो एक साथ कई सिम कार्डों को चला सकता है, जिससे वे अंतर्राष्ट्रीय कॉल को स्थानीय कॉल में बदल देते हैं। इस तरह, अपराधी लोगों को ठगने के लिए भारत के टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का दुरुपयोग करते हैं। चंडीगढ़ पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें परवेज चौहान (33), शुभम मेहरा (25), सुहैल अख्तर (35), कृष्ण साह (21), विजय कुमार (22), विकास कुमार (22), अजीत कुमार (22), विपिन कुमार (22), सरोज कुमार (19) और अभिषेक कुमार (19) शामिल हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि विदेशी गिरोह फेसबुक और टेलीग्राम के जरिए भारतीय युवाओं को सिम बॉक्स ऑपरेट करने के लिए लुभाते हैं और उन्हें प्रति माह 20,000 से 25,000 रुपये का भुगतान करते हैं। पुलिस ने आरोपियों से 6 सिम बॉक्स, 1 वाई-फाई ब्रॉडबैंड राउटर, 400 सिम कार्ड, 11 मोबाइल फोन, 01 लैपटॉप और 02 मॉडेम बरामद किए हैं।

ऐसे करते थे धोखाधड़ी

अपराधी विदेश से कॉल करते हैं, जो IVR कॉल के रूप में शुरू होती हैं। वे खुद को TRAI, CBI, FedEx आदि का अधिकारी बताते हैं। ‘सिम बॉक्स’ का उपयोग करके, वे अंतर्राष्ट्रीय कॉल को स्थानीय कॉल में बदल देते हैं। पीड़ितों को फर्जी वीडियो कॉल पर पुलिस स्टेशन का सेटअप दिखाया जाता है। अपराधियों द्वारा पीड़ितों को पॉलिसी समाप्त होने या किसी अन्य बहाने से डराया जाता है। वे पीड़ितों को ‘सेफ कस्टडी’ या ‘एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग’ के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं। चंडीगढ़ पुलिस ने जनता को ऐसे स्कैम से बचने के लिए सलाह दी कि पुलिस/सीबीआई अधिकारी कभी भी फोन/व्हाट्सएप पर व्यक्तिगत विवरण नहीं मांगते हैं। धोखाधड़ी वाले वीडियो कॉल पर कभी भी भरोसा न करें। अपना सिम कार्ड या बैंक खाता किसी को भी इस्तेमाल करने न दें। किसी भी संदिग्ध कॉल की शिकायत साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर करें।

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