Himachal News: आपदा पीड़ितों के सहारा बने भुट्टो, खुरवाईं में दी मदद आर्थिक मदद

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किसी को दस हजार, तरपाल तो कहीं जेसीबी बुलाकर खुलवा रहे रास्ते, पीड़ित परिवारों को दे रहे ढांढस

ऊना/सुशील पंडित: कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र पिछले कई दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश के चलते बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कई जगहों पर मकान जमींदोज हो चुके हैं, तो कहीं खेत खिसकने और भूस्खलन से लोगों की मेहनत की कमाई मलबे में तब्दील हो गई है।

इस प्राकृतिक आपदा के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं कुटलैहड़ के पूर्व विधायक दविंदर भुट्टो लगातार प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और पीड़ित परिवारों को निजी स्तर पर मदद पहुंचा रहे हैं। ताजा जानकारी के अनुसार खुरवाई गांव में बारिश के कारण एक रिहायशी मकान ढह गया। घटना की सूचना मिलते ही दविंदर भुट्टो मौके पर पहुंचे और प्रभावित परिवार को तिरपाल, अन्य जरूरी सामान और 10 हजार रुपए की नकद आर्थिक मदद उपलब्ध करवाई। उन्होंने आश्वासन दिया कि कुटलैहड़ में किसी भी परिवार को अकेला महसूस नहीं होने दिया जाएगा और भाजपा कार्यकर्ता हर समय सेवा के लिए तैयार रहेंगे।

पूर्व विधायक भुट्टो ने कहा कि कुटलैहड़ क्षेत्र में सैकड़ों परिवार प्राकृतिक आपदा का दंश झेल रहे हैं, मगर दुर्भाग्य से अब तक सरकार की तरफ से किसी भी तरह की ठोस राहत या आर्थिक सहायता पीड़ितों तक नहीं पहुंच पाई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब जनता कठिन हालात में है, तब सरकार केवल बैठकों और घोषणाओं तक सीमित है, जबकि वास्तविक राहत की जिम्मेदारी व्यक्तिगत स्तर पर समाजसेवियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर आ पड़ी है।

भुट्टो ने स्वयं जेबीसी मशीन निजी खर्च से बुलाकर काम शुरू करवाया है, ताकि गांवों तक पहुंच सुगम हो सके और पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री पहुंचाई जा सके। भुट्टो ने कहा कि यह समय राजनीति करने का नहीं बल्कि जनता के बीच रहकर उनकी सेवा करने का है। उन्होंने प्रशासन से भी आग्रह किया कि वे आपदा प्रभावित क्षेत्रों का तुरंत दौरा करें और नुकसान का आकलन कर प्रभावित परिवारों को फौरी राहत राशि मुहैया कराएं। कुटलैहड़ के विभिन्न गांवों से लगातार नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं। कहीं मवेशियों की शालाएं ढह गई हैं तो कहीं सड़कें ध्वस्त होकर संपर्क मार्ग टूट चुके हैं। ग्रामीणों को अपने ही घरों तक पैदल लंबा सफर तय करके पहुंचना पड़ रहा है। ऐसे में भुट्टो जैसे स्थानीय नेता और समाजसेवियों की पहल पीड़ित परिवारों के लिए राहत का बड़ा जरिया बनकर सामने आई है।

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