Punjab News: गुरुपर्व पर केंद्र ने जत्थे को दी पाक जाने की मंजूरी, SGPC ने जारी किया शेड्यूल, देखें वीडियो

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अमृतसरः श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व समारोह को पाकिस्तान में मनाने के लिए सिख जत्थे को भारत सरकार द्वारा मंजूरी मिल गई है। इस फैसले का स्वागत करते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) के सचिव प्रकाश सिंह ने कहा कि भले ही मंजूरी देने में देरी हुई, लेकिन “देरी आई, पर सही आई” के आधार पर संगतों ने इस फैसले का सम्मान किया है। प्रकाश सिंह ने कहा कि सिखों की पहले से ही मांग है कि जैसे खेलों के माध्यम से दोनों देशों के खिलाड़ी एक-दूसरे के देश में खेल सकते हैं, वैसे ही सिखों को भी अपने विछड़े गुरुदामों के दर्शन करने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि पहले जत्थे की यात्रा के लिए कम से कम 45 दिन का समय चाहिए था। लेकिन इस बार सरकार ने बहुत सीमित समय में मंजूरी दी है।

इसलिए उन्हें संगतों के पासपोर्ट ही प्रक्रिया में लाया जा रहा है जो पहले ही एसजीपीसी के पास जमा हैं। एसजीपीसी की ओर से यात्रियों को अपने वीज़ा फॉर्म और दस्तावेज जमा करवाने के लिए तिथियां और स्थानों की सूची भी जारी की गई है। इसके अनुसार, 7 अक्टूबर को संगरूर, बरनाला, बठिंडा, मनसा, फिरोजपुर, मोहाली आदि जिलों की संगत अपने-अपने निर्धारित गुरुद्वारों में दस्तावेज जमा कर सकती है। 8 अक्टूबर को पटियाला, कपूरथला, मुक्तसर, रोपड़ और अन्य जिलों की संगतों के लिए व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, 9 अक्टूबर को लुधियाना, होशियारपुर, फिरोजपुर, फाजिल्का और नवांशहर, श्री आनंदपुर साहिब इलाक़ों की संगत भी अपने दस्तावेज निर्धारित गुरुद्वारा साहिबान में जमा कर सकेगी। प्रकाश सिंह ने संगतों से अपील की है कि दी गई तिथियों और स्थानों पर ही पहुंच कर अपने दस्तावेज जमा कराएं ताकि वीज़ा प्रक्रिया समय से पूरी हो सके।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नई सूचनाएं बनाने के लिए अब समय नहीं है, इसलिए केवल वही पासपोर्ट प्रक्रिया में शामिल किए जाएंगे जो पहले ही एसजीपीसी के पास आए हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह मंजूरी सिख संगतों की लंबी समय से चल रही अरदास पूरी होने का परिणाम है। पिछले समय दौरान सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सरकार ने जत्थे को पाकिस्तान जाने से रोका था, लेकिन अब जब फैसला ले लिया गया है, इसलिए एसजीपीसी ने सरकार का धन्यवाद किया है। प्रकाश सिंह ने उम्मीद जाहिर की कि भविष्य में करतारपुर गलियारे के माध्यम से भी संगतों को नियमित दर्शन का अवसर मिलेगा और भारत-पाकिस्तान सरकारें सिखों के धार्मिक अधिकारों को प्राथमिकता देंगी।

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