आशा वर्करों ने अपनी मांगो को लेकर विधायक व बीएमओ को सौंपा ज्ञापन

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बैठक करके अपनी समस्याओं का रोना रोया, बोले सरकारें सुनती ही नहीं

बद्दी: आशा वर्करों की विभिन्न मुददों को लेकर आज बददी में एक हंगामेदार बैठक हुई। बैठक में उनकी मांगों की अनदेखी को लेकर गहन चिंता प्रकट की गई। बैठक के बाद जिला आशा वर्कर संघ की बददी इकाई की अध्यक्ष दया ठाकुर की अगुवाई में दून के विधायक रामकुमार चौधरी और खंड चिकित्सका अधिकारी बददी को ज्ञापन भी सौंपा गया। उन्होने बताया हमारी इंसेटिव और सैलरी 2-3 महीने तक नहीं मिलती, यह हेड ऑफिस व विभाग से तुरंत मिलनी चाहिए। आशा वर्करों ने कहा कि गर्भवती महिलाओं के जांच (चेकअप) का दस्तावेजीकरण, जो मोबाइल ऐप के माध्यम से भेजा जाता है, उसमें देरी होती है।

उपाध्यक्ष सीमा देवी, महासचिव सुमन देवी व कार्यकारिणी सदस्य मनीषा देवी, संध्या कुमार ने कहा की गर्भवती महिलाओं को तीसरे महीने तक अस्पताल ले जाने में काफी मेहनत लगती है, लेकिन उसके बावजूद इंसेंटिव समय पर नहीं मिलता। उन्होंने यह भी शिकायत की कि सरकारी अस्पतालों में होने वाली डिलीवरी का इंसेंटिव तो मिल जाता है, लेकिन चंडीगढ़ में होने वाली डिलीवरी का भुगताeन नहीं होता। आशा वर्करों ने मांग की कि संस्थागत डिलीवरी का पूरा इंसेंटिव विभाग की ओर से दिया जाए। केंद्र सरकार की तरफ से मिलने वाली 2000 रुपये की सहायता राशि भी कई बार देर से दी जाती है। बच्चों के टीकाकरण (एमएमआर-डीपीटी आदि) के कार्य में भी देरी और भुगतान की समस्या है।

उन्होंने बताया कि वे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों गतिविधियां पूरी करती हैं, लेकिन जब तक डेटा बददी अस्पताल को नहीं भेजा जाता, मोबाइल ऐप में ही सेव रह जाता है और भुगतान अटक जाता है। आशा वर्करों ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले 3-4 महीनों की स्वास्थ्य रिपोर्ट्स पूरी नहीं हुई हैं, और इस आधार पर उनका इंसेंटिव काटा जा रहा है। उन्होंने विभाग से इस पर स्पष्टीकरण मांगा है। आशा वर्करों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी समस्याओं का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो वे सामूहिक रूप से स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करने को बाध्य होंगी। वहीं दून के विधायक रामकुमार चौधरी ने आशा वर्कर की समस्याएं ध्यान से सुनी और कहा कि इन मुददों को मुख्यमंत्री को भेज दिया जाएगा ताकि इस उचित कार्यवाही हो सके।

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