America ने Columbia के राष्ट्रपति पर लगाया प्रतिबंध, इस वजह से लिया फैसला

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नई दिल्ली: अमेरिका ने कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान कर दिया है। यह कदम ट्रंप प्रशासन और अमेरिका के पुराने सहयोगी इस लैटिन अमेरिकी देश के बीच बढ़ते हुए इस तनाव को और भी गहरा कर सकते हैं। अमेरिका ने ये प्रतिबंध उस समय पर लगाया है जब ट्रंप ने पेट्रो पर यह आरोप लगाया कि उन्होंने कोलबिया से अमेरिका में कोकीन की तस्करी रोकने ले किए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। पिछले कुछ हफ्तों से वॉशिंगटन और लैटिन अमेरिकी देशों के बीच में तनाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने दक्षिण कैरेबियन क्षेत्र में अपनी गतिविधियां भी तेज कर दी है और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में संदिग्ध जहाजों पर भी हमले किए ङैं। इन पर अमेरिका का दावा है कि वे ड्रग्स लेकर जा रहे थे हालांकि उनकी ओर से अब तक इसका कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया है।

अब तक नहीं मिली कोई बड़ी सफलता

गुस्तावो पेट्रो ने अमेरिका पर कैरेबियन सागर में एयरस्ट्राइक करके निर्दोष लोगों की हत्या करने का आरोप भी लगाया था। इसके जवाब में डोनाल्ड ट्रंप ने कोलंबियाई राष्ट्रपति को अवैध ड्रग लीडर और बुरा आदमी कहा था। पेट्रो लंबे समय से इन अमेरिकी सैन्य हमलों का विरोध कर रहे हैं। वह कोलंबिया में छह दशकों से चल रहे संघर्ष को शांति वार्ताओं और आत्मसमर्पण समझौतों के जरिए खत्म करने का भी प्रयास कर रहे हैं परंतु अभी तक कोई बड़ी सफलता नहीं मिल पाई है।

अमेरिका नहीं करेगा ड्रग तस्करी बर्दाश्त

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक बयान जारी किया है। यह बयान जारी करते हुए उन्होंने कहा कि जब से राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो सत्ता में आए हैं कोलंबिया में कोकीन का उत्पादन दशकों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इससे अमेरिका में ड्रग्स की बाढ़ आ चुकी है। हमारे नागरिक इस जहर का शिकार हो रहे हैं। राष्ट्पति पेट्रो ने कोलंबिया में ड्रग कार्टेल्स को फलने-फूलने का मौका दिया है। इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे में राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका की सुरक्षा देखते हुए यह कदम उठाया है। ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि हम ड्रग तस्करी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।

कोलंबिया ने जताया विरोध

कोलंबिया के विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिकी राजदूत को तलब करके राष्ट्रपति ट्रंप के बयान पर औपचारिक विरोध दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि ऐसी बयानबाजी से दोनों देशों के बीच में सहयोग पर गंभीर असर होगा। कैरेबियन सागर में अमेरिका की लगातार बढ़ रही सैन्य तैनाती पर लैटिन अमेरिका के देशों ने भी चिंता जताई है। ब्राजील और चिली ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि कूटनीतिक समाधान ही किसी भी समस्या को हल करने का सबसे आसान तरीका है। वहीं मेक्सिको ने ट्रंप प्रशासन के क्षेत्र में एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस जेराल्ड फोर्ड तैनात करने के फैसले को एकतरफा और असंतुलित बताया है।

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