अमेरिका-रुस की लड़ाई में इस तेल कंपनी को हुआ बड़ा नुकसान, ब्रिटेन ने भी किया Ban

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नई दिल्ली: अमेरिका और रुस के बीच इन दिनों मतभेद चल रहा है। अब इसका असर बाकी देशों पर भी दिखने लगा है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के झगड़े का नुकसान तेल कंपनियों को हो रहा है। रुस की सबसे बड़ी तेल कंपनी लुकोइल ने कहा है कि वह अपनी अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों को बेचेगी। लुकोइल ने संबंधों को मजबूत बनाने के लिए यह कदम उठाया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, लुकोइल ने कहा कि परिसंत्तियों को OFAC विंड डाउन लाइसेंस के अंतर्गत बेचा जा रहा है। यदि जरुरत पड़ती है तो कंपनी अपनी अंतरराष्ट्रीय परिसंपत्तियों को बिना किसी रुकावट के संचालित करने के लिए लाइसेंस के आवेदन के विस्तार पर विचार कर सकती है।

रुस ने दोनों कंपनियां कर दी थी बैन

लुकोइल रुस की दूसरी सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी है। फरवरी 2022 से शुरु हुए यूक्रेन-रुस के युद्ध के बाद अमेरिका ने रुस पर कई प्रतिबंध लगा दिए। इसके कारण तेल कंपनियों को काफी नुकसान हुआ है। इसी वजह से लुकोइल ने यह कदम उठाया है। ट्रंप ने लुकोइल और रोसनेफ्ट दोनों को बैन कर दिया था। ये दोनों कंपनियां रुस के 50% कच्चे तेल का उत्पादन करती है।

ब्रिटेन ने भी लिया एक्शन

अमेरिका के बाद अब ब्रिटेन ने भी लुकोइल और रोसनेफ्ट के खिलाफ एक्शन ले लिया है। ब्रिटेन ने 15 अक्टूबर को 44 शैड टैंकरों को बैन कर दिया था। ये ऐसे टैंकर थे जिनके मालिकाना हक के बारे में किसी तरह की जानकारी नहीं थी। ब्रिटेन ने कहा कि कच्चे तेल से रुस को हो रही कमाई को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है। अमेरिका ने भी लुकोइल पर बैन लगाते समय यही बात कही थी। यदि लुकोइल की विदेशी संपत्ति की बात की जाए तो उसके पास इराक में तेल का कुआं है। यह दुनिया का सबसे बड़े तेल क्षेत्रों में से एक है।

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