किसान भूमि व फसल की स्थिति देखकर करें सिंचाई 

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सेंसोवाल में खंड परियोजना प्रबंधन इकाई ने सेंसोवाल में लगाया शिवर  ऊना/सुशील पंडित: हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना जायका चरण – II के अंतर्गत खंड परियोजना प्रबंधक इकाई ऊना द्वारा उप परियोजना सैंसोवाल में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर “सिंचाई और जल प्रबंध के सिद्धांत और प्रथाएँ” विषय पर आयोजित किया गया। जिसमें 65 किसानों ने भाग लिया। कृषि विशेषज्ञ मनीषा शर्मा ने सभी किसानों के साथ परियोजना की विस्तृत रूप में चर्चा की। खेती में पानी का सही उपयोग फसल उत्पादन को बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका है। किसानों को सिंचाई के आधुनिक सिद्धांतों और जल प्रबंधन के सही अभ्यासों को अपनाना चाहिए ताकि कम पानी में अधिक पैदावार प्राप्त की जा सके। प्रशिक्षण शिविर में बताया कि सिंचाई का मुख्य सिद्धांत है — सही समय पर, उचित मात्रा में और समान रूप से पानी देना। अधिक या कम पानी दोनों ही फसल के लिए हानिकारक होते हैं साथ ही यह भी बताया गया हर फसल की पानी की जरूरत अलग होती है, इसलिए किसानों को अपनी मिट्टी और फसल की स्थिति देखकर सिंचाई करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि जल प्रबंधन के प्रमुख व्यवहारिक उपाय खेतों का समतलीकरण करना, बरसात के पानी का संचयन करना, मल्चिंग द्वारा मिट्टी की नमी बनाए रखना और ड्रिप व स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकें अपनाना। इन उपायों से न केवल पानी की बचत होती है बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है।कृषि प्रसार अधिकारी वीर विवेक सिंह ने प्रशिक्षण शिविर के दौरान किसानो को रबी किचन गार्डन किट बांटी  और किसानो को अपने घर में जैविक सब्जियां उगाने और ज़हर मुक्त खेती करने के लिए प्रेरित किया। कृषक विकास संघ के प्रधान अश्वनी कुमार व उपस्थित सभी किसानो ने किचन गार्डन किट एवं उससे सम्बंधित जानकारी देने पर जायका परियोजना का आभार व्यक्त किया और साथ ही यह आश्वासन दिया की वो किचन गार्डनिंग करके स्वस्थ जीवनशैली को अपनाएंगे।

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