मीडिया की विश्वसनीयता उसकी सबसे बड़ी पूंजी, इसे बनाए रखना आवश्यक : उपायुक्त जतिन लाल

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ऊना/सुशील पंडित: उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि मीडिया की विश्वसनीयता उसकी सबसे बड़ी पूंजी है और इसका अक्षुण्ण रहना आज के समय की प्रमुख आवश्यकता है। वे रविवार को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा ऊना में आयोजित जिला स्तरीय सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे थे। सम्मेलन में ‘भ्रामक सूचनाओं के दौर में पत्रकारिता की विश्वसनीयता का संरक्षण’ विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित हुई, जिसमें जिले के पत्रकारों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।

उपायुक्त ने पत्रकारों को राष्ट्रीय प्रेस दिवस की बधाई देते हुए कहा कि मीडिया समाज के छिपे हुए पक्षों को सामने लाने के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता एवं जनहित के कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनता के बीच सूचना का मजबूत सेतु मीडिया ही है, जिसके माध्यम से समाज और सरकार के बीच संवाद स्थापित होता है। उन्होंने कहा कि यदि मीडिया और प्रशासन जनहित के उद्देश्य से समन्वयपूर्वक कार्य करें, तो जनता को वास्तविक और व्यापक लाभ मिल सकता है।

भ्रामक सूचना और ‘इन्फ्लुएंसर’ संस्कृति चिंतनीय

जतिन लाल ने कहा कि सोशल मीडिया के व्यापक प्रभाव के चलते कई बार लोग ‘इन्फ्लुएंसर’ बनने की होड़ में अपुष्ट या असत्य सूचनाएं प्रसारित कर देते हैं। ऐसे समय में पत्रकारों और संप्रेषकों को आत्मसंयम, जिम्मेदारी और तथ्यान्वेषण की भावना के साथ कार्य करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मीडिया पर किसी बाहरी नियंत्रण की बजाय जरूरी है कि उसका स्वत: आंतरिक अनुशासन, आत्मनियंत्रण और तथ्यों की पुष्टि का मैकेनिज्म हो। जो भी सूचना दी जाए, वह सार्थक, निष्पक्ष और समाजोपयोगी होनी चाहिए।

रचनात्मक आलोचना सुधार की आधारशिला

उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन रचनात्मक और तथ्याधारित आलोचना का स्वागत करता है, क्योंकि उसी के माध्यम से व्यवस्था में सुधार की दिशा तय होती है। लेकिन आलोचना तर्कसंगत, रचनात्मक और समाजहित की दृष्टि से होनी चाहिए।

सोशल मीडिया पर संयम, सत्यता और जिम्मेदारी अनिवार्य

उन्होंने जिले में क्रियान्वित की जा रही बल्क ड्रग पार्क परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय महत्व की योजना है, जिसके अंतर्गत केंद्र एवं राज्य सरकार के सभी दिशानिर्देशों, एनजीटी नियमों और पर्यावरणीय मानकों का पूर्ण पालन किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इसके संबंध में जिला प्रशासन अनेक बार स्थिति स्पष्ट कर चुका है, फिर भी कुछ लोग सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं प्रसारित करते हैं, जो उचित नहीं हैं।

उपायुक्त ने कहा कि विकास-विरोधी मानसिकता से ऊपर उठकर रचनात्मक संवाद और सुधार की दिशा में आगे बढ़ना समय की मांग है। भ्रामक सूचनाएं समाज को नुकसान पहुंचा सकती हैं, इसलिए सोशल मीडिया के उपयोग में संयम, सत्यता और जिम्मेदारी बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

परिचर्चा में पत्रकारों ने रखी अपनी बात

जिला स्तरीय सम्मेलन में “बढ़ती भ्रामक सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता का संरक्षण” विषय पर एक सार्थक और प्रभावशाली परिचर्चा आयोजित की गई। इस चर्चा में वरिष्ठ और युवा पत्रकारों ने बदलते मीडिया परिवेश, चुनौतियों, जिम्मेदारियों और पत्रकारिता के मूल्यों पर अपने अनुभव व विचार साझा किए। कार्यक्रम में उपायुक्त ने सभी पत्रकारों को सम्मानित किया।

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