Punjab News: सिद्धू पर लगे पार्षदों से 20-25 लाख लेने के आरोप

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सिद्धू के खिलाफ पूर्व निकाय मंत्री करेंगे कानूनी कार्रवाई

अमृतसरः पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ दिनों से सियासी भूचाल आया हुआ है। एक ओर नवजोत कौर सिद्धू द्वारा पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, प्रताप बाजवा, सासंद सुखजिंदर रधावा पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे है। दूसरी ओर अब अमृतसर के जिला अध्यक्ष एवं पार्षद सौरव मिट्ठू मदान ने नवजोत कौर सिद्धू और उनके पति पर गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि 2017 में मैडम सिद्धू ने टिकट के बदले कई पार्षदों से 20-25 लाख रुपये लिए थे। मिट्ठू ने दावा किया कि उनके पास इसके ठोस सबूत हैं और जल्द ही पूरी लिस्ट जारी करेंगे। उन्होंने कहा कि सिद्धू कपल की सोच और भाषा कांग्रेस विरोधी है और पार्टी के खिलाफ बिना सबूत के आरोप लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है। दूसरी ओर अकाली दल छोड़ कांग्रेस में शामिल पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी ने डा. नवजोत कौर सिद्धू के आरोपों को झूठा करार देते हुए कहा कि पार्टी में पैसे देकर आने के उनके दावे पूरी तरह निराधार हैं। जोशी ने बताया कि वकील की सलाह लेकर डा. सिद्धू के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। जोशी ने कहा कि उन्होंने न तो किसी से पैसा लिया और न ही दिया, और कैबिनेट मंत्री रहते भी पार्टी को फंड नहीं दिया। उन्होंने कांग्रेस की विचारधारा के कारण ही पार्टी जॉइन की और हमेशा सेवा भाव से राजनीति में शामिल हुए। जोशी ने आरोप लगाया कि डा. सिद्धू बिना किसी ठोस सबूत के सभी पर आरोप लगा रही हैं और उनके बयान पूरी तरह व्यक्तिगत और मनगढ़ंत हैं। उन्होंने कहा कि यदि टिकट पाने के लिए पैसा देना जरूरी होता, तो वह राजनीति ही नहीं करते। वहीं मिट्ठू ने सिद्धू पर बीजेपी में शामिल होने की तैयारी का भी आरोप लगाया और इसे सोची-समझी साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि मैडम सिद्धू की ओर से 500 करोड़ रुपये के बहाने मुख्यमंत्री बनने के दावे पूरी तरह झूठे हैं। मिट्ठू ने पार्टी हाईकमान की ओर से सिद्धू की सस्पेंशन को सही और साहसिक फैसला बताया और जनता से अपील की कि कांग्रेस विरोधी गतिविधियों में शामिल न हों। जिला अध्यक्ष ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में कभी निजी लाभ नहीं लिया और पार्टी हाईकमान के भरोसे जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मिट्ठू मदान का नाम पहले दशहरे के दौरान अमृतसर जौड़ा फाटक रेलवे कांड में भी सामने आया था, जिसमें सिद्धू परिवार ने उन्हें बचाने के प्रयास किए थे।

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