अयोध्या पहुंची सोने व कीमती रत्नों से बनी भगवान श्रीराम की मूर्ति, जानें इसकी खासियत

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नई दिल्ली: भारतीय डाक विभाग ने अपनी लॉजिस्टिक्स पोस्ट सेवा के जरिए एक बहुत ही अच्छा काम किया है। भगवान श्री राम की एक बहुत ही कीमती तंजावुर कलाकृति को पूरी सुरक्षा और सावधानी के साथ अयोध्या में पहुंचाया है। यह काम डाक विभाग के विशेष लॉजिस्टिक्स और स्टीक प्रबंधन क्षमता का एक बहुत ही अच्छा उदाहरण है। इतनी नाजुक और अनमोल पेंटिंग को एक शहर से दूसरे शहर में बिना किसी नुकसान के बहुत ही आसान से डिलीवर किया गया है।

800 किलो वजन की है श्रीराम भगवान की मूर्ति

बेंगलुरु की रहने वाली जयश्री फनीश ने भगवान राम की यह भव्य पेंटिंग अयोध्या के राम मंदिर में भेंट की है। बता दें कि यह कोई साधारण पेंटिंग नहीं है इसको खास कलाकृति शैली से बनाया गया है। यह मूर्ति तंजावुर कला शैली में बनाई गई है। इसमें सोने के काम के साथ कीमती रत्न भी जड़े हुए हैं। इस पेंटिंग की भव्यता का खास अंदाज आकार से भी पता लग रहा है। इसका वजन 800 किलो और यह 8 फीट चौड़ी है। इसको अयोध्या तक पहुंचाने के लिए एक खास बॉक्स में पैक किया गया। मूर्ति की कीमत 2.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

9 महीने में हुई तैयार 

800 किलोग्राम के वजन से बनी इस मूर्ति कोडॉक विभाग की लॉजिस्टिक के जरिए से राम नगरी में भेजा था। इस प्रतिमा को नौ महीने की साधना और कड़ी मेहनत के साथ बनाया गया है। इससे पहले जो अयोध्या में राम मंदिर के मुख्य गर्भगृह में मूर्ति स्थापित है वो भी रामलला की मनोहारी प्रतिमा कर्नाटक के मैसरु के कलाकार अरुण योगीराज ने ट्रस्ट के कहने पर बनाई थी।

5 राज्यों से होकर पहुंची अयोध्या 

इस मूर्ति को अयोध्या पहुंचाने की शुरुआत 17 दिसंबर से हुई है। 1900 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके कर्नाटक, तेलांगना, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश होते हुए उत्तर प्रदेश में पहुंचा है। रास्ते में सुरक्षा का पूरा ध्यान डॉक विभाग के अधिकारियों द्वारा रखा गया। 22 दिसंबर को श्री राम की मूर्ति अयोध्या में पहुंची है। श्रीराम मंदिर परिसर में संत तुलसीदास मंदिर के पास अंगद टीला की दिशा में प्रतिमा की स्थापना और अनावरण किया जाएगा। इसके बाद अयोध्या आने वाले राम भक्त अब राम मंदिर में भी इस प्रतिमा का भी दर्शन कर पाएंगे। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय की मौजूदगी में इस खास पेटिंग को सुरक्षित तौर पर सौंप दिया गया है।

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