नई नवेली दुल्हन के लिए आखिर क्यों खास होता है Lohri का त्योहार? जानें

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धर्म: कल पूरे भारत में लोहड़ी का त्योहार धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। यह त्योहार हर साल 13 जनवरी को ही मनाया जाता है। लोहड़ी से सर्दियां खत्म होती है और रबी फसल की कटाई शुरु होती है। ऐसे में सभी इसको बहुत ही धूमधाम के साथ मनाते हैं। यह त्योहार मकर संक्रांति के पहले दिन मनाया जाता है। मकर संक्रांति को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। ऐसे में नई फसल और दिन का उजाला भी बढ़ जाता है। इसके साथ नई नवेली दुल्हनों के लिए भी यह त्योहार बहुत ही जरुरी माना जाता है।

शुभ मुहूर्त

लोहड़ी वाले दिन प्रदोष काल में अग्नि प्रज्वलित करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्यास्त का समय शाम को 5:44 मिनट का है। ऐसे में सूर्यास्त से 2 घंटे की अवधि लोहड़ी और अग्नि की पूजा के लिए सबसे शुभ मानी जा रही है। यह त्योहार भगवान सूर्य और अग्नि को भी समर्पित होता है। सूर्य और अग्नि को ऊर्जा का सबसे स्त्रोत माना जाता है। यह त्योहार सर्दियों के जाने और बसंत ऋतु के आने का संकेत भी है। लोहड़ी की रात सबसे ठंडी होती है। इस त्योहार पर पवित्र अग्नि में फसलों का अंश भी अर्पित किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, ऐसे अग्नि में फसल अर्पित करने से यह देवताओं तक पहुंचती है।

नई दुल्हन के लिए खास होती है लोहड़ी

ऐसा माना जाता है कि जिस घर में नई शादी हो, शादी की पहली एनिवर्सरी हो या फिर बच्चा हुआ तो वहां पर लोहड़ी बहुत ही शानदार तरीके के साथ मनाई जाती है। इस दिन को नई शुरुआत, सौभाग्य, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। नियमों के अनुसार, नई दुल्हनों को इस त्योहार पर काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। इसके अलावा इस दिन घर के किसी भी सदस्य से लड़ाई-झगड़े से भी बचना चाहिए। लोहड़ी वाले दिन कुंवारी लड़कियां भी रंग-बिरंगे नए-नए कपड़े पहनती है। इसके बाद वह घर-घर में जाकर लोहड़ी मांगती है। ऐसा माना जाता है कि माघ के महीने में सर्दी से बचने के लिए लोग आग जलाकर सुकून पाते हैं। लोहड़ी के गाने भी गाते हैं। इसमें बच्चे, बूढ़े सभी नाचते हैं। इसके अलावा ढोल की धुन पर गिद्दा और भांगड़ा भी करते हैं।

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