कब होगी अमेरिका और भारत में Deal? Economic Survey 2026 में हुआ खुलासा

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नई दिल्ली : अमेरिका के साथ ट्रेड डील का आर्थिक सर्वेक्षण में भी जिक्र हुआ है। वैसे तो दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत भी चल रही है परंतु आर्थिक सर्वे में इस डील पर साल 2026 में मोहर लगने का अनुमान लगाया गया है। सबसे अच्छी खबर अर्थव्यवस्था को लेकर आई है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की तीन तिमाहियों में अमेरिकी टैरिफ का असर एक्सपोर्ट और मैन्यूफैक्चरिंग पर पड़ने के बावजूद ग्रोथ की रफ्तार बनी रही है क्योंकि सरकार की ओर से लगातार टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसे में अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसे में अमेरिकी टैरिफ, कमजोर वैश्विक मांग और भू-राजनीतिक तनावों के बाद भारत की आर्थिक गति पर मामूली असर हुआ है।

इस वजह से मजबूत हो रही जीडीपी

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती को भी बताया गया है। सर्वे के अनुसार, FY26 के फर्स्ट एडवांस एस्टीमेट में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.4% रही है जो मुख्य तौर पर घरेलू मांग के मजबूत बने रहने का नतीजा है। आर्थिक सर्वे में यह कहा गया है कि इनफ्रास्ट्रक्चर में विस्तार और फिस्कल अनुशासन में सुधार के कारण से भारत की ग्रोथ टिकाऊ बनी हुई है। FY26 में राजकोषीय घाटा 4.8% रह सकता है जो कि जीडीपी लक्ष्य के अंदर है। आर्थिक सर्वे के अनुसार, घरेलू मांग भारत की विकास कहानी की सबसे बड़ी ताकत बना हुआ है। ग्रामीण और शहरी मांग में संतुलन भी दिख रहा है जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में लगातार निवेश से रोजगार और आय के अवसर बढ़ते जा रहे हैं। सड़क, रेलवे, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में सरकार के बढ़ते खर्च ने आर्थिक गतिविधियों को गति दी है। सर्वे के अनुसार, वैश्विक स्तर पर डाउनसाइड रिस्क भी बना हुआ है हालांकि यह कहा गया है कि मौजूदा वैश्विक हालात भारत के लिए तत्काल मैक्रो-इकोनॉमिक संकट पैदा नहीं करते। मजबूत विदेश मुद्रा भंडार, स्थिर बैंकिंग सिस्टम और नीति विश्वसनीयता भारत के लिए सुरक्षा कवच बने हुए हैं।

निर्यात पर है सरकार का फोकस

आर्थिक सर्वे के अनुसार, करंट अकाउंट डेफिसिट पर निर्भरता के कारण रुपया काफी हद तक अंडरवैल्यूड है। अमेरिकी टैरिफ के दौर में कमजोर रुपया इकोनॉमी के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक नहीं है परंतु मुद्रा स्थिरता के लिए मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट को बढ़ाना जरुरी होगा। खासतौर पर वैल्यू एडेड और टेक्नोलॉजी आधारित निर्यात पर जोर देने की ज्यादा सिफारिश की गई है। इस कड़ी में पहली बार आर्थिक सर्वे में एआई को लेकर एक अलग चैप्टर है यानी की नई टैक्नोलॉजी पर आने वाले दिनों में सरकार को पूरा फोकस रहेगा। इसके साथ ही सोना-चांदी की कीमतों में भी काफी बढ़ोतरी होगी। कीमती धातुओं में तेजी के पीछे ग्लोबल कारण भी बताए जा रहे हैं। आर्थिक सर्वे का यह मानना है कि यदि इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश, निर्यात में बढ़ावा और राजकोषीय अनुशासन इसी तरह बनाए रखे गए तो भारत वैश्विक अस्थिरता के बीच भी तेज और असंतुलित विकास की राह पर बना रहेगा।    

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