Supreme Court ने User Privacy को लेकर सुनाया अहम फैसला, Whatsapp-Meta को दिए आदेश

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नई दिल्ली: व्हाट्सएप्प और मेटा की प्राइवेसी पॉलिसी मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि शेयरिंग की ये प्रक्रिया भारतीय यूजर्स के निजता के अधिकार के खिलाफ है हालांकि सीसीआई के वकील ने एनसीएलएटी के कुछ निष्कर्षों पर आपत्ति भी जताई है। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने व्हाट्सएप्प को निर्देश देते हुए कह दिया है कि – हम आपको मेटा के साथ एक भी जानकारी साझा करने की अनुमति नहीं देंगे हम आपको इस देश की नीतियों की गोपनीयता के साथ खेलने की इजाजत भी कई नहीं देंगे। इस पूरे मामले में कोर्ट के सामने तीन मुख्य अपीलें थी जो कि मेटा, व्हाट्सएप्प और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की ओर से दायर की गई थी। सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने इन अपीलों का पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान मेटा के वकील ने दलील दी कि कोर्ट के आदेश के अनुसार, 213 करोड़ रुपये के जुर्माने का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। Read In English : https://encounternews.in/india/supreme-court-raps-meta-whatsapp-over-data-sharing-warns-against-privacy-violations/

मेटा की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप्प और मेटा की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर सुनवाई करते हुए बेहद कड़े सवाल उठा दिए हैं। कंपनी का डेटा शेयर करने से उन्होंने साफ तौर पर मना कर दिया है। सीजीआई ने व्हाट्सएप्प की नीति पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आपने इसको इतनी चालाकी से तैयार किया है कि इसको समझना ही मुश्किल है। उन्होंने पूछा है कि क्या देश का आम आदमी जैसे कि घर में काम करने वाला नौकर, निर्माण मजदूर या छोटे विक्रेता इस मुश्किल नीति को समझ पाएंगे। कोर्ट ने यह साफ कहा है कि उपभोक्ताओं को इस ऐप की लत लगा दी है और अब उनकी मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है।

यूजर्स का डेटा गलत तरीके से हो रहा इस्तेमाल

सीजेआई ने कहा है कि लोगों के डेटा का इस्तेमाल व्यावसायिक लाभ के लिए किया जा रहा है और अब तक लाखों यूजर्स के डेटा का गलत इस्तेमाल हो चुका है। इस दौरान मेटा के वकील अखिल सिबल ने दलील भी दी कि व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए सीमित डेटा शेयरिंग की अनुमति है। इस पर सीजेआई ने कहा कि – यदि आपको डेटा का कोई हिस्सा बेचने लायक होगा तो आप उसको बेच देंगे सिर्फ इसलिए कि भारतीय उपभोक्ता मूक है और उनके पास आवाज नहीं है आप उन्हें शिकार नहीं बना सकते। सुनवाई के दौरान सॉलिस्टिर जनरल ने कहा कि व्हाट्सएप्प यूजर्स को सिर्फ दो ही ऑप्शन दे रहा है या तो पॉलिसी स्वीकार करो या ऐप का इस्तेमाल बंद कर दो। इस पर अदालत ने कहा कि बिहार के दूरदराज इलाकों या तमिलनाडु के गांवों में रहने वाले लोग जिन्हें अंग्रेजी नहीं आती वो इस नीति के खतरनाक परिणामों को कभी भी नहीं समझ पाएंगे। सीजेआई ने यह साफ शब्दों में कहा है कि जब तक आप हमें यह विश्वास नहीं दिलवाएंगे कि आपको ऐसा करने का कोई दैवीय अधिकार हासिल है तब तक हम आपको डेटा शेयर करने की अनुमति नहीं देंगे।

3 जजों की बेंच के सामने होगी सुनवाई

व्हाट्सएप्प के वकील ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि उनकी नीतिया दूसरे अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रधिकारों के स्टैंडर्ड्स के अनुसार है लेकिन इन दलीलों को सुनने के बाद सीजेआई ने बताया कि एनसीएलटी के सामने जनवरी 2025 के आदेश की स्थिति अभी भी जरुरी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अब सभी पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है। अब इन अपीलों पर विस्तार से सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की बेंच के सामने होगी।

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