सूरजकुंड मेले में मेघालय पवेलियन बना खास आकर्षण

चंडीगढ़: फरीदाबाद के सूरजकुंड में आयोजित किए जा रहे 39वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला में में मेघालय को उत्तर प्रदेश के साथ थीम राज्य के रूप में चुना गया है। सूरजकुंड मेले में मेघालय द्वारा की समृद्ध विरासत, जीवंत संस्कृति, व्यंजन और अद्वितीय शिल्प कौशल का प्रदर्शन किया जा रहा है। मेघालय की संस्कृति और विरासत की थीम पर डिजाइन किया गया मेघालय मंडप वहां की कलात्मक और उत्कृष्टता का शानदार प्रतिनिधित्व कर रहा है। मेघालय मंडप में विभिन्न प्रकार की स्टालें सजाई गई हैं, जो मेघालय के विश्व प्रसिद्ध शिल्प का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। मेघालय मंडप में लकड़ी का सामान सहित पीतल आदि से निर्मित सामान सूरजकुंड मेले की खूबसूरती को और गरिमा को बढ़ा रहे हैं। मेघालय मंडप का एक प्रमुख आकर्षण यहां के पारंपरिक व्यंजन है, जो आगंतुकों को मजेदार जायके का स्वाद दे रहे हैं। इन प्रमुख व्यंजनों में मेघालय की विभिन्न डिशेज शामिल हैं। सूरजकुंड मेले में आ रहे पर्यटकों को मेघालय मंडप अवश्य देखना चाहिए, जो इसकी कला, संस्कृति, कला और पारंपरिक शिल्प कौशल का एक अनूठा अनुभव प्रदान करता है।

39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में आंध्र प्रदेश की ‘चमड़े की चित्रकारी’ कला बनी खास आकर्षण

फरीदाबाद के प्रसिद्ध सूरजकुंड में लोकल फॉर ग्लोबल-आत्मनिर्भर भारत की पहचान थीम के साथ आयोजित किए जा रहे 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में देश-विदेश से आए शिल्पकार अपनी पारंपरिक और विशिष्ट कलाओं का प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में आंध्र प्रदेश से आए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शिल्पकार शिंदे श्रीरामुलु अपनी दुर्लभ एवं पारंपरिक ‘चमड़े की चित्रकारी’ कला के साथ मेले में सहभागिता कर रहे हैं, जो पर्यटकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। शिंदे श्रीरामुलु बताते हैं कि चमड़े की चित्रकारी एक पारंपरिक कला है, जिसमें प्राकृतिक (ऑर्गेनिक) रंगों के माध्यम से चित्रांकन किया जाता है। इस कला से निर्मित उत्पाद मुख्य रूप से होम डेकोर के लिए तैयार किए जाते हैं, जिनमें लैम्प शेड, डोर हैंगिंग्स, वॉल पेंटिंग्स सहित अनेक सजावटी वस्तुएं शामिल हैं। उनकी इस उत्कृष्ट कला के लिए वर्ष 2006 में तत्कालीन माननीय राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा, उन्हें सूरजकुंड मेला प्राधिकरण की ओर से ‘कलानिधि पुरस्कार’, ‘कलामणि पुरस्कार’ एवं ‘कला श्री पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया है। उल्लेखनीय है कि श्रीरामुलु वर्ष 2006 से लगातार सूरजकुंड मेले के प्रत्येक संस्करण में भाग ले रहे हैं और अपनी कला का नियमित रूप से प्रदर्शन कर रहे हैं श्रीरामुलु ने बताया कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला उनकी कला को प्रदर्शित करने का एक उत्कृष्ट मंच है। यहां देश-विदेश के दूर-दराज क्षेत्रों से लाखों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं, जिससे उनकी कला को व्यापक पहचान मिलने के साथ-साथ उनके व्यवसाय को भी सकारात्मक और उत्साहजनक प्रतिसाद मिलता है। सूरजकुंड मेले में उनकी स्टॉल संख्या 1228 पर प्रदर्शित चर्म चित्रकारी कला और उससे निर्मित उत्पाद दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहे हैं। यह मेला पारंपरिक शिल्प एवं लोक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक सशक्त मंच सिद्ध हो रहा है।

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