‘पायजामे का नाड़ा खींचना भी Rape’, Supreme Court ने इस मामले में सुनाया अहम फैसला

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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद कोर्ट के विवादित फैसले को बदल दिया है। इसके साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फटकार भी लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पायजामे का नाड़ा खोलना बलात्कार करने की कोशिश है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद कोर्ट के उस विवादित फैसले को पलटने का भी फैसला किया है। इसमें यह कहा गया है कि एक बच्ची के ब्रेस्ट को पकड़ना उसके पायजामे का नाड़ा खोलना और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना रेप नहीं है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसले पर कड़ी टिप्पणी देते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एनवी अंजारिया के साथ कहा कि यौन अपराधों के मामलों में फैसले के लिए कानूनी तर्क और सहानुभूति दोनों की जरुरत होती है।

Read In English : https://encounternews.in/india/supreme-court-rules-breast-grabbing-pyjama-string-pulling-amount-to-attempt-to-rape/

इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश किया सुप्रीम कोर्ट ने खारिज

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि ब्रेस्ट पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना रेप की कोशिश के बराबर है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस विवादित आदेश को खारिज कर दिया जिसमें यह कहा गया था कि ये सिर्फ रेप करने की तैयारी है। सीजीआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एन वी अंजारिया की बेंच ने यह कहा कि विवादित ऑर्डर को क्रिमिनल ज्यूरिस्प्रूडेंस के यत सिद्धांतों के साफ तौर पर गलत इस्तेमाल के कारण रद्द कर दिया जाता है। कोर्ट ने 10 फरवरी को यह ऑर्डर एक सुओ मोटो याचिका पर दिया था इसमें उसने इलाहाबाद कोर्ट के ऑर्डर का संज्ञान लिया था। इसमें कहा गया था कि सिर्फ ब्रेस्ट पकड़ना और पायजामे का डोरा खींचना रेप का अपराध नहीं है।

रेप के अपराध को करने की तैयारी हैं

हाई कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए शीर्ष अदालत ने प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस के अंतर्गत दो आरोपियों के खिलाफ रेप की कोशिश की असली कड़े चार्ज को बहाल कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जो फैक्ट्स बताए गए हैं उन्हें देखते हुए हम हाईकोर्ट के इस नतीजे से सहमत नहीं हो सकते हैं कि आरोप सिर्फ रेप के अपराध को करने की तैयारी के हैं। आरोपियों के द्वारा की गई कोशिश साफ तौर पर और जरुरी तौर पर हमें इस नतीजे पर ले जाती है कि पहली नजर में शिकायत करने वाले और प्रॉसिक्यूशन ने रेप करने की कोशिश के प्रोविजन को लागू करने का मामला बनाया है इसलिए क्रिमिनल ज्यूरिस्प्रूडेंस के तय सिद्धांतों के साफ तौर पर गलत इस्तेमाल के कारण विवादित फैसले को भी रद्द कर दिया जाता है।

जरा सा भी शक नहीं रहेगा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों को सिर्फ देखने से इस बात में जरा सा भी शक नहीं रह जाता है कि आरोपी इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 376 रेप के अंतर्गत अपराध करने के पहले से तय इरादे से आगे बढ़े। अदालत ने कहा कि 17 मार्च 2025 का विवादित फैसला रद्द कर दिया जाता है और स्पेशल जज POCSO कासगंज का 23 जून 2023 का ओरिजनल समन ऑर्डर फिर से लागू किया जाता है। यह कहने की जरुरत नहीं है कि इस कोर्ट ने इस फैसले के जरिए जो भी बातें कही है वो शिकायत करने वाले के सिर्फ पहली नजर में है और उन्हें आरोपियों के गुनाह पर कोई राय नहीं माना जाएगा जो चल रहे ट्रायल का विषय है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया था फैसला

17 मार्च 2025 के अपने ऑर्डर में हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सिर्फ ब्रेस्ट पकड़ना और पायजामे का डोरा खींचना रेप का जुर्म नहीं है परंतु किसी महिला के कपड़े उतारने या उसे नंगा होने के लिए मजबूर करने के लिए इरादे से हमला या क्रिमिनल फोर्स के इस्तेमाल के दायरे में आता है। यह ऑर्डर जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने दो लोगों की रिवीजन पिटीशन पर पास किया था जिन्होंने कोर्ट में कासगंज के एक स्पेशल जज के ऑर्डर को चैलेंज किया था। इसके अंतर्गत कोर्ट ने उन्हें दूसरी धाराओं के अलावा आईपीएस की सेक्शन 376 के अंतर्गत समन भेजा था।

ये था पूरा मामला

केस के तथ्यों के अनुसार स्पेशल जज पोक्सो एक्ट की कोर्ट में एक एप्लीकेशन दी गई थी इसमें आरोप लगाया कि 10 नवंबर 2021 को एक महिला अपनी 14 साल की बेटी के साथ अपनी ननद के घर से वापिस आ रही थी। आरोपी उसके गांव के थे और उसको रास्ते में मिले। उन्होंने उसकी बेटी को लिफ्ट देने के लिए कहा। आरोप है कि आरोपियों ने गांव जाते समय अपनी मोटरसाइकिल रोकी और नाबालिग के साथ छेड़छाड़ करने लगे। आकाश ने कथित तौर पर उसको घसीटा और पुलिया के नीचे ले जाने की कोशिश की और उसके पायजामे का नाड़ा खींच लिया। लड़की के रोने की आवाज सुनकर दो लोग मौके पर पहुंचे जिससे आरोपी भाग गए।          

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