राजकीय महाविद्यालय वंगाणा में चल रहे शिविर की शुरुआत मार्च-पास्ट के साथ

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ऊना/सुशील पंडित: अटल बिहारी वाजपेई राजकीय महाविद्यालय, वंगाणा में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा आयोजित सात दिवसीय वार्षिक विशेष शिविर के तृतीय दिवस का शुभारंभ अत्यंत अनुशासित वातावरण में प्रातःकालीन ड्रिल एवं मार्च-पास्ट के साथ किया गया। शिविर के तीसरे दिन स्वयंसेवियों में विशेष उत्साह और अनुशासन देखने को मिला।

इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर रेखा शर्मा एवं NSS के कार्यक्रम अधिकारी प्रोफेसर सिकंदर नेगी विशेष रूप से उपस्थित रहे। प्रातःकालीन परेड के उपरांत विभिन्न ग्रुप लीडर्स द्वारा अपनी-अपनी टीमों की रिपोर्टिंग प्रस्तुत की गई, जिसमें स्वयंसेवियों की सक्रिय भागीदारी और कार्यनिष्ठा की सराहना की गई। इसके पश्चात स्वयंसेवियों ने सामूहिक रूप से नाश्ता ग्रहण किया और तत्पश्चात महाविद्यालय परिसर में “NSS वाटिका” के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। स्वयंसेवियों ने श्रमदान के माध्यम से पौधारोपण एवं स्वच्छता संबंधी कार्यों में योगदान दिया। यह पहल पर्यावरण संरक्षण एवं हरित परिसर की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रही है। दोपहर के भोजन के उपरांत द्वितीय सत्र में “नशा निवारण – विशेष रूप से चिट्टे की समस्या” विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए जागरूकता और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रतियोगिता मे प्रथम स्थान: वेदेही शर्मा ने, द्वितीय स्थान तनु ठाकुर ने और तृतीय स्थान: किरण कनैत ने प्राप्त किया । संध्याकालीन सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें स्वयंसेवियों ने रंगारंग प्रस्तुतियों से वातावरण को उत्साहपूर्ण बना दिया। हिना, शगुन, सिमरन, खुशबू एवं उनके समूह द्वारा प्रस्तुत पार्टी नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम अधिकारी प्रोफेसर सिकंदर नेगी ने स्वयंसेवियों को संबोधित करते हुए कहा कि NSS शिविर का उद्देश्य केवल सेवा कार्य नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, सामाजिक जागरूकता और नेतृत्व क्षमता का विकास करना भी है। वहीं प्राचार्य प्रोफेसर रेखा शर्मा ने विद्यार्थियों के अनुशासन, ऊर्जा और समर्पण की प्रशंसा करते हुए उन्हें समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। इस प्रकार एन एस एस शिविर का तीसरा दिन सेवा, जागरूकता और सांस्कृतिक समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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