Punjab News: CM Maan ने उठाया पानी का मुद्दा, जारी किए आकंड़े, मांगा हिसाब, देखें Live

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चंडीगढ़ः पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को सिंचाई और जल प्रबंधन से जुड़े आंकड़े पेश करते हुए राजस्थान को दिए जा रहे पानी पर बड़ा मुद्दा उठाया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने राज्य में सिंचाई के क्षेत्र में हुए कार्यों का भी विस्तृत ब्यौरा दिया। वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस बयान से साफ है कि आने वाले समय में राजस्थान-पंजाब के बीच पानी और भुगतान का मुद्दा फिर से गर्मा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य अपने अधिकारों को लेकर अब पीछे नहीं हटेगा और जरूरत पड़ी तो यह मामला केंद्र स्तर तक उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 2022 में सरकार बनने के समय केवल 26.5 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग हो रहा था, जो अब बढ़कर लगभग 58 लाख एकड़ क्षेत्र तक पहुंच गया है। यह करीब 78 प्रतिशत की वृद्धि है। उन्होंने बताया कि 4 वर्षों में सिंचाई बजट को 3 गुना बढ़ाते हुए लगभग 6700 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 13,938 किलोमीटर नए वाटर कोर्स (खाल) बनाए गए और 18,000 किलोमीटर से अधिक पुराने ढांचों को बहाल किया गया।

अब सरकार ने पुराने रिकॉर्ड के आधार पर आकलन किया है कि 1960 से 2026 तक का हिसाब जोड़ने पर यह राशि करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये बनती है। उन्होंने कहा कि यदि राजस्थान 1920 के समझौते के तहत पानी ले रहा है तो उसे उसी आधार पर भुगतान भी करना चाहिए। अन्यथा या तो समझौते को समाप्त किया जाए या फिर पानी की आपूर्ति पर पुनर्विचार किया जाए। मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि यह मुद्दा अब उच्च स्तर पर उठाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वर्तमान में लगभग 18 हजार क्यूसेक पानी राजस्थान फीडर के माध्यम से जा रहा है, जबकि इसके बदले कोई आर्थिक प्रतिफल नहीं मिल रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले भुगतान होता था तो अब क्यों नहीं हो रहा। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य के 1454 गांव ऐसे थे जहां आजादी के बाद भी नहरी पानी नहीं पहुंचा था।

अब पहली बार इन गांवों तक पानी पहुंचाया गया है। कंडी क्षेत्र में 1500 किलोमीटर अंडरग्राउंड पाइपलाइन बहाल कर 24 हजार एकड़ क्षेत्र को सिंचाई से जोड़ा गया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि नहरी पानी बढ़ने से भूजल दोहन में कमी आई है। गुरदासपुर के कई ब्लॉकों में एक्सट्रैक्शन रेट आधे से भी कम हो गया है और 57 प्रतिशत से अधिक कुओं में जलस्तर 0 से 4 मीटर तक ऊपर आया है। उन्होंने बताया कि 25 साल से लंबित शाहपुर कंडी डैम परियोजना को 3394.49 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया है। इससे सिंचाई के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और 26 नए पर्यटन स्थल विकसित किए गए हैं। राज्य सरकार ने स्टेट डिजास्टर मिटिगेशन फंड के तहत 470 करोड़ रुपये खर्च कर 195 कार्य पूरे किए हैं।

3700 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई की गई और नई मशीनरी लगाई गई ताकि बाढ़ और जलभराव की समस्या कम हो सके। उन्होंने कहा कि कई नहरें कागजों में मौजूद थीं लेकिन जमीन पर उनका अस्तित्व खत्म हो चुका था। सरकार ने ऐसी नहरों को खोजकर दोबारा चालू किया। तरनतारन की सरहाली नहर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि खुदाई के दौरान नीचे दबे हुए ढांचे मिले और करीब 22 किलोमीटर लंबी नहर को पुनर्जीवित किया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1920 में बीकानेर रियासत और बहावलपुर के बीच हुए समझौते के तहत पानी की आपूर्ति शुरू हुई थी, जो बाद में राजस्थान तक पहुंची। उस समय पानी के बदले प्रति एकड़ शुल्क तय किया गया था और 1960 तक इसका भुगतान भी होता रहा। मुख्यमंत्री ने बताया कि 1960 के बाद नई व्यवस्था लागू होने पर यह भुगतान व्यवस्था जारी नहीं रही। न तो राजस्थान ने भुगतान किया और न ही पंजाब ने इसकी मांग उठाई।

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