क्या अब दोबारा Tariff लगाएंगे Donald Trump? निशाने पर आया चीन, दे डाली बड़ी Warning

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नई दिल्ली : होर्मुज टेंशन खत्म होने से लेकर तेल संकट कम होने तक की उम्मीद एक बार फिर हवा हो गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच में पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 21 घंटे चली शांति वार्ता फेल हो चुकी है। इससे सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या US-Iran War एक बार फिर खतरनाक रुप लेगी। जहां ईरान अमेरिका में बात नहीं बनी है। वहीं दूसरी ओर ट्रंप ने सीजफायर को लेकर अपने बयान के बीच ही टैरिफ टेरर फिर से शुरु होने के संकेत मिल रहे थे। अब बातचीत फेल होने के बाद ये फिर से दिखने को मिल सकता है। ट्रंप ने बीते दिनों उन देशों को कड़ी चेतावनी देते हुए हाई टैरिफ लगाने की बात कही थी जो ईरान को हथियारों की सप्लाई करते हैं। इस लिहाज से देखें तो अमेरिका के निशाने पर सीधे तौर पर चीन और रुस जैसे देश हैं। खासतौर पर चीन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी दे दी है। उन्होंने कहा कि ईरान को हथियार भेजे और ड्रैगन के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी हो जाएगी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते बुधवार को ही संकेत दे दिए थे। उनका टैरिफ अटैक प्लान एक्टिव हो सकता है। उन्होंने ऐलान करते हुए कहा था कि ईरान को सैन्य हथियार आपूर्ति करने वाले देशों को अमेरिका को बेचे जाने वाले सभी सामानों पर हाई टैरिफ देना होगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर ट्रंप ने पोस्ट में लिखा था कि – ईरान को हथियार सप्लाई करने वाले किसी भी देश पर अमेरिका तुरंत 50% का टैरिफ लगाएगा। इसमें कोई छूट नहीं दी जाएगी। अमेरिका की लड़ाई चाहे ईरान से हो या बीते दिनों वेनेजुएला पर स्ट्राइक हो। डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर ट्रंप ने बढ़ाई थी। वहीं अब ईरान के साथ युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भी सबसे ज्यादा प्रभावित ईरानी तेज का बड़ा खरीदार चीन ही है।

तेल गैस संकट गहराया है

US-Iran War और Hormuz Strait Closure के कारण से चीन में तेल-गैस संकट गहराया है। वहीं डोनाल्ड ट्रंप की नई धमकी ने ड्रैगन की टेंशन को चरम पर पहुंचा दिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट की मानें तो ट्रंप ने चीन से दो टूक कह दिया है। चीन की बड़ी परेशानियां होने वाली हैं। यदि वह ईरान को हथियारों की खेप भेजता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इसे अपनी सुरक्षा में एक बड़ी बाधा के रुप में देख रहा है। ईरान की खुद की सैन्य शक्ति भी अच्छी है लेकिन उसे चीन और रुस जैसे देश जमकर हथियारों की सप्लाई भी करते हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो चीन ईरान से फिलहाल खुल तौर पर बड़ी आर्म्स डील करने से बचता है। यूएन के प्रतिबंधों के बाद ये सप्लाई कुछ धीमी पड़ी है हालांकि करीबन 1 दशक बाद ईरान पर यूएन के प्रतिबंध खत्म हुए लेकिन अमेरिका के सेकेंडरी सैंक्शन लागू हो गए। इसके कारण से कोई देश खुले तौर पर उसे हथियार नहीं बेचता। भले ही डायरेक्ट सौदे के जरिए चीन ईरान को हथियार नहीं बेच रहा लेकिन कई तरीकों से हथियारों की खेप पहुंचती है। इसी पर ट्रंप की टेढ़ी नजर है चीन को लेकर ट्रंप की धमकी भी इसी ओर इशारा करती है।    

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