पंडोगा, रैगिंग प्रकरण पर एबीवीपी का कड़ा रुख, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग:- अभी ठाकुर

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ऊना/सुशील पंडित:  पंडोगा (ऊना) स्थित केसी ग्रुप ऑफ़ इंसीट्यूट में हाल ही में सामने आए रैगिंग एवं छात्र के साथ मारपीट के गंभीर मामले ने पूरे प्रदेश के छात्र समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करती है और इसे शिक्षा के मूल्यों, अनुशासन तथा सुरक्षित वातावरण के खिलाफ एक गंभीर अपराध मानती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार,  केसी ग्रुप ऑफ़ इंसीट्यूट के हॉस्टल में रह रहे एक छात्र के साथ रैगिंग के नाम पर अभद्र व्यवहार और मारपीट की गई। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज के समय में भी इस प्रकार की कुप्रथा हिमाचल प्रदेश में देखने को मिल रही है। शिक्षा संस्थान केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं होते, बल्कि वे विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और सुरक्षित भविष्य की नींव रखते हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती हैं। संस्थान प्रबंधन द्वारा आरोपी छात्र को निष्कासित करना तथा पुलिस प्रशासन द्वारा एफआईआर दर्ज कर जांच प्रारंभ करना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन एबीवीपी का मानना है कि केवल प्रारंभिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। यह आवश्यक है कि पूरे मामले की गहराई से, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच की जाए, ताकि सभी दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री अभी ठाकुर ने कहा कि “रैगिंग जैसी अमानवीय कुप्रथा के लिए किसी भी शिक्षण संस्थान में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। यह केवल एक अनुशासनहीनता का मामला नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक बुराई है, जो छात्रों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालती है। एबीवीपी ऐसे मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की पुरजोर मांग करती है।” उन्होंने आगे कहा कि हिमाचल प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानो में एंटी-रैगिंग नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए। इसके लिए प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान में सक्रिय एंटी-रैगिंग समितियों का गठन, नियमित निगरानी, और छात्रों के बीच जागरूकता कार्यक्रम चलाना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही, नवप्रवेशी छात्रों को एक सुरक्षित और सहयोगात्मक वातावरण प्रदान करना सभी शैक्षणिक संस्थानों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए । उन्होंने कहा कि एबीवीपी प्रशासन से मांग करती है कि मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए।
1. दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें उदाहरण बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।
2. सभी शिक्षण संस्थानों में एंटी-रैगिंग कानूनों का कठोरता से पालन करवाया जाए।
3. हॉस्टल एवं कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, जिसमें नियमित निरीक्षण और निगरानी शामिल हो।
4. पीड़ित छात्र को मानसिक, शैक्षणिक एवं कानूनी सहायता प्रदान की जाए, ताकि वह बिना किसी भय के अपनी पढ़ाई जारी रख सके।
5. छात्रों के लिए हेल्पलाइन एवं काउंसलिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए।
एबीवीपी यह भी स्पष्ट करती है कि यदि इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई बरती जाती है, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद छात्र हितों की रक्षा के लिए आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सदैव छात्र हित, सुरक्षित शिक्षण वातावरण और अनुशासित शैक्षणिक संस्कृति के लिए प्रतिबद्ध रही है। इस घटना के संदर्भ में भी विद्यार्थी परिषद पीड़ित छात्र के साथ मजबूती के साथ खड़ी है और छात्र को न्याय दिलाने के लिए विद्यार्थी परिषद हर संभव प्रयास करेगी।
 

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