NEET पेपर लीक मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- जवाबदेही तय होनी चाहिए

Written by

in

नई दिल्लीः नीट पेपर लीक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि इतनी सिफारिशों और निगरानी के बावजूद आखिर पेपर लीक कैसे हो गया, इसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने उठाए बड़े सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष से पूछा कि जब पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जा रही थी, तो फिर यह बड़ी चूक कैसे हुई। कोर्ट ने कहा कि अगर सभी सिफारिशें लागू कर दी गई थीं, तो फिर पेपर लीक जैसी घटना होना बेहद गंभीर मामला है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि या तो सिफारिशों में ही कोई कमी थी या फिर उनकी सही तरीके से निगरानी नहीं की गई। अदालत ने कहा कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा यह बहुत संवेदनशील मामला है और इसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।

विशेषज्ञ समिति ने दिए थे 60 सुझाव
सुनवाई के दौरान डॉ. राधाकृष्णन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि समिति ने कुल 60 सुझाव दिए थे। इनमें से ज्यादातर सुझाव लागू किए जा चुके हैं, जबकि कुछ पर अभी काम चल रहा है।

उन्होंने कहा कि साल 2025 की NEET UG परीक्षा संतोषजनक तरीके से कराई गई थी। कुछ परीक्षा केंद्रों पर बिजली जाने जैसी छोटी समस्याएं हुई थीं, लेकिन बाकी व्यवस्था ठीक रही। समिति ने एनटीए को और मजबूत बनाने की भी सिफारिश की थी।

री-नीट परीक्षा के लिए किए गए खास इंतजाम
डॉ. राधाकृष्णन ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि अगली री-नीट परीक्षा के लिए सभी जरूरी सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पेपर में गड़बड़ी रोकने के लिए कई नए कदम उठाए गए हैं और आने वाली परीक्षा में इन सभी बातों का खास ध्यान रखा जाएगा।

जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, समस्या खत्म नहीं होगी
जस्टिस नरसिम्हा ने सुनवाई के दौरान कहा कि असली समस्या तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि सही जवाब तभी मिलेगा, जब जवाबदेही तय होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने UPSC का दिया उदाहरण
कार्रवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि यूपीएससी जैसी बड़ी परीक्षाओं में कभी ऐसी समस्या सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि यह समझना जरूरी है कि मजबूत व्यवस्था और सख्त निगरानी से ही ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

इस पर सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार युवाओं से जुड़े मामलों को बेहद गंभीरता से ले रही है और परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए नए इंतजाम किए जा रहे हैं।

संस्था मजबूत होनी चाहिए, सिर्फ व्यक्ति नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश की कई संस्थाओं में सबसे बड़ी समस्या तदर्थ व्यवस्था यानी अस्थायी कामकाज की है। अदालत ने कहा कि किसी भी व्यवस्था की ताकत किसी एक व्यक्ति में नहीं बल्कि पूरी संस्था में होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अगर संस्थाएं मजबूत होंगी और प्रक्रियाएं पारदर्शी होंगी, तभी भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।

 

 

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *