आखिर किस दिन मनाई जाएगी Nirjala Ekadashi, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा का समय

Written by

in

धर्म: हिंदू धर्म में सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी का सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इसे साल की सबसे बड़ी एकादशी भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन जो श्रद्धालु अन्न, जल ग्रहण किए बिना व्रत रखते हैं। श्री हरि उनके सारे दुख हर लेते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने से साल की सभी 24 एकादशियों के समान पुण्य मिलता है। हिंदू पंचागों के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जून को रात 08:09 मिनट पर होगा। एकादशी तिथि का समापन 25 जून को रात 9:14 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून दिन गुरुवार को रखा जाएगा। निर्जला एकादशी का साल की सबसे कठिन और श्रेष्ठ एकादशी माना गया है। इस दिन व्रती पूरे दिन अन्न और जल का त्याग कर भगवान विष्णु की अराधना करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत से दुख-दरिद्रता और नेगेटिव ऊर्जा का नाश होता है। इसके अलावा सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पूजा की विधि

निर्जला एकादशी के दिन सुबह उठकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। इसके बाद साफ-सुथरे कपड़े धारण करके एक चौकी पर पीले रंग का कपड़े बिछाकर उस पर विष्णु और लक्ष्मी जी की प्रतिमा स्थापित करें और दोनों की संयुक्त पूजा करें। भगवान दो धूप, दीप, फल और पीले रंग की मिठाई या पकवान का भोग लगाएं। भगवान को खीर में तुलसी दल डालकर भी भोग लगाया जा सकता है। इसके बाद वहीं बैठकर विष्णु जी के मंत्रों को जाप करें। मां लक्ष्मी और विष्णु जी की आरती उतारें। इसके बाद मनोकामना कहें।

पारण का समय

एकादशी का व्रत पारण द्वादशी तिथि में करना जरुरी माना गया है। साल 2026 में निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून दिन शुक्रवार को किया जाएगा। पारण का शुभ समय सुबह 5:41 बजे से लेकर सुबह 8:25 बजे तक रहेगा।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *