हरियाणा जल्द बनेगा “आलू के प्रमाणित बीज” उत्पादन के लिए एक नैशनल-हब : श्याम सिंह राणा

चंडीगढ़- हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि हरियाणा वैसे तो पहले ही कृषि और बागवानी के क्षेत्रों में एक अग्रणी राज्य है और अब यह उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज आलू के उत्पादन के लिए एक नैशनल-हब बनने की दिशा में काम कर रहा है। वे आज यहां हरियाणा के बागवानी विभाग द्वारा “हरियाणा टिशू कल्चर-आधारित बीज आलू अधिनियम, 2026,” एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) मिशन और हरियाणा उद्यानिकी नीति पर केंद्रित एक राज्य स्तरीय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री विजयेंद्र कुमार, बागवानी निदेशालय के विभागाध्यक्ष श्री अर्जुन सैनी के अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, एफपीओ प्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान और बीज आलू उत्पादक मौजूद रहे। श्याम सिंह राणा ने बताया कि प्रस्तावित “हरियाणा टिशू कल्चर-आधारित बीज आलू अधिनियम, 2026” राज्य में रोग-मुक्त, उच्च गुणवत्ता वाले और ट्रेस करने योग्य (ट्रेसेबल) बीज आलू के उत्पादन को बढ़ावा देगा, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ नए बाजारों तक पहुंच भी सुनिश्चित होगी।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश भर में गुणवत्तापूर्ण बीज आलू की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसकी उपलब्धता अभी भी सीमित है। इस प्रस्तावित अधिनियम का उद्देश्य टिशू कल्चर, एयरोपोनिक्स और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके बीज आलू उत्पादन के लिए एक वैज्ञानिक प्रणाली स्थापित करना है, जिससे प्रमाणित बीज उत्पादन और विपणन में किसानों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

कार्यशाला के दौरान अधिकारियों और विशेषज्ञों ने बताया कि हरियाणा में लगभग 33,000 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती की जाती है और राज्य में बीज आलू उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। इस प्रस्तावित अधिनियम के लागू होने के बाद, राज्य में शुरुआती वर्षों के भीतर लगभग 10 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज आलू उत्पादन करने की क्षमता विकसित हो सकती है; इससे न केवल राज्य की अपनी ज़रूरतें पूरी होंगी, बल्कि अन्य राज्यों को भी गुणवत्तापूर्ण बीजों की आपूर्ति की जा सकेगी।

इस कार्यशाला में एफपीओ मिशन पर भी विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने समझाया कि सामूहिक विपणन, प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग), भंडारण और मूल्यवर्धन (वैल्यू एडिशन) जैसी सुविधाएं प्रदान करके किसानों की आय बढ़ाने में एफपीओ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राज्य सरकार एफपीओ को सशक्त बनाने और उन्हें कृषि व्यवसाय से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान कर रही है। इसके अतिरिक्त, आधुनिक बागवानी, संरक्षित खेती, उच्च मूल्य वाली फसलों और निर्यात-उन्मुख उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा उद्यानिकी नीति के तहत किसानों को मिलने वाले प्रोत्साहनों और सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।

कार्यशाला के दौरान वैज्ञानिकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, एफपीओ सदस्यों और प्रगतिशील किसानों ने प्रस्तावित अधिनियम पर अपने सुझाव और विचार प्रस्तुत किए। विभाग की ओर से आश्वासन दिया गया कि इस अधिनियम को अधिक प्रभावी और किसान-अनुकूल बनाने के लिए प्राप्त सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

 

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