Fake CBI और Police Officer बनकर डिजिटल अरेस्ट करके ठगे 80 लाख, आरोपी गिरफ्तार

Written by

in

18 शिकायतें दर्ज, बैंक खाते में मिला 5.47 करोड़ का संदिग्ध साइबर फ्रॉड का लेनदेन

पंचकूलाः सेक्टर 20 स्थित साइबर क्राइम थाना टीम ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए बुजुर्ग से ठगी करने वाले गिरोह के तीसरे आरोपी रंजारला रामूलू को तेलंगाना से गिरफ्तार कर लिया है। इस शातिर आरोपी के बैंक खाते से देश भर में करीब 5 करोड़ 47 लाख रुपये का संदिग्ध साइबर फ्रॉड का लेन-देन मिला है। आरोपी के खिलाफ देश भर में 18 शिकायतें दर्ज हैं। इस मामले में पुलिस पहले ही 2 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें पहला आरोपी सौरभ कुमार निवासी मैनपुरी, उत्तर प्रदेश और दूसरा आरोपी पाथुकर मुरली कृष्ण निवासी हैदराबाद, तेलंगाना है। साइबर थाना प्रभारी युद्धवीर सिंह के अनुसार यह मामला पिंजौर निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग की शिकायत के आधार पर 19 जनवरी 2026 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2), 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2), 319(2) के तहत दर्ज हुआ था, जिसमें जालसाजों ने ट्राई और सीबीआई के फर्जी अधिकारी बनकर व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए बुजुर्ग को डराया था। ठगों ने बुजुर्ग को झूठा झांसा दिया कि उनके नाम से जारी सिम का उपयोग किसी बड़े अपराध में हुआ है और उनके खाते में 2 करोड़ रुपये का अवैध लेन-देन हुआ है। महाराष्ट्र पुलिस का फर्जी लोगो लगा पत्र दिखाकर और बच्चों को नुकसान पहुंचाने व जेल भेजने का डर दिखाकर आरोपियों ने बुजुर्ग को कई दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा। इसके बाद बैंक खातों की चेकिंग और बाद में पैसे वापस करने का झांसा देकर आरोपियों ने पीड़ित बुजुर्ग से कुल 80,09,500 रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए, जिसमें से 62 लाख रुपये अकेले वर्तमान आरोपी के खाते में गए थे। मामले की जांच एएसआई रविंद्र द्वारा की जा रही है। डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक अमरिंदर सिंह ने कहा कि साइबर पुलिस टीम ने तकनीकी जांच के आधार पर पहले सौरभ और मुरली कृष्ण को पकड़ा था और फिर मुरली कृष्ण के खुलासे पर तीसरे आरोपी रंजारला रामूलू को तेलंगाना के निजामाबाद जिले से 22 जून को दबोच लिया। आरोपी रामूलू ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी कंपनी का खाता खुलवाया था ताकि ठगी की रकम उसमें मंगवाई जा सके। तेलंगाना कोर्ट से 4 दिन का ट्रांजिट रिमांड हासिल करने के बाद पंचकूला पुलिस ने आरोपी से गहन पूछताछ की और रिमांड खत्म होने पर आज उसे अदालत के आदेशानुसार न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की तलाश जारी है। डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक अमरिंदर सिंह ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि कोई भी सरकारी एजेंसी, पुलिस, सीबीआई, ईडी, ट्राई, आरबीआई या अदालत किसी व्यक्ति को फोन, व्हाट्सएप कॉल या वीडियो कॉल के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही किसी जांच के नाम पर बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश देती है। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को सरकारी अधिकारी बताकर गिरफ्तारी, बैंक खाते सीज करने या जांच के नाम पर पैसे जमा करवाने का दबाव बनाए, तो उसकी बातों में बिल्कुल न आएं, तुरंत कॉल काट दें और संबंधित नंबर की सूचना राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा पर दें। साथ ही निकटतम साइबर पुलिस थाना या स्थानीय पुलिस से तुरंत संपर्क करें।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *