नशा विरोधी अभियान में और तेजी, सड़क सुरक्षा उपायों को और व्यापक बनाने पर जोर

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ऊना सुशील पंडित :अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्र पाल गुर्जर ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने तथा सड़क सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करने के लिए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशा उन्मूलन और सड़क सुरक्षा दोनों ही जनहित से जुड़े विषय हैं, जिनमें सभी विभागों की सक्रिय भागीदारी और नियमित समीक्षा जरूरी है। अतिरिक्त उपायुक्त मंगलवार को जिला परिषद सभागार में आयोजित एन-कॉर्ड (राष्ट्रीय नार्को समन्वय पोर्टल) के तहत गठित जिला स्तरीय समिति और जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

एन-कॉर्ड समिति की बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त ने निर्देश दिए कि जिले के जिन विद्यालयों से नशा निवारण समितियों  की गतिविधियों संबंधी रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है, वे सभी रिपोर्ट 30 जुलाई तक उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने विद्यालय स्तर पर  जागरूकता बढ़ाने और नशे के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने पर जोर देने को कहा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नशे की दृष्टि से संवेदनशील पंचायतों में संबंधित पंचायत प्रधानों के साथ विशेष बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि स्थानीय स्तर पर नशे की रोकथाम के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की जा सके। साथ ही ड्रग इंस्पेक्टर, पुलिस तथा संबंधित विभागों को केमिस्ट दुकानों का नियमित औचक निरीक्षण जारी रखने के निर्देश देते हुए कहा कि दवाओं की बिक्री और रिकॉर्ड की निरंतर निगरानी रखी जाए तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

सड़क सुरक्षा के लिए विभागों के समन्वय पर बल

जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि ऊना बाजार में राष्ट्रीय राजमार्ग के मध्य बनाई जा रही रेलिंग में यदि किसी प्रकार का संशोधन आवश्यक हो तो वह पूरी तरह तकनीकी सुरक्षा मानकों तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही किया जाए। उन्होंने बड़ूही चौक सहित अन्य यातायात प्रभावित क्षेत्रों में ट्रैफिक दबाव और सड़क जाम की स्थिति का अध्ययन कर आवश्यक सुधारात्मक उपाय प्रस्तावित करने के निर्देश दिए।

घायलों की मदद करने वालों को मिलेगा प्रोत्साहन

अतिरिक्त उपायुक्त ने गुड समैरिटन (राह-वीर) योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर बल देते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद का पहला घंटा यानी ‘गोल्डन ऑवर’ सबसे महत्वपूर्ण होता है, जिसमें समय पर सहायता मिलने से घायल व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना पीड़ित को गोल्डन ऑवर के भीतर अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने में सहयोग करने वाले व्यक्ति को योजना के तहत 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने भी रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद करने वाले गुड समैरिटन को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की पहल की है। उन्होंने अधिकारियों को इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने के निर्देश दिए।

उन्होंने सभी उपमंडल अधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों में घोषित नो-वेंडिंग और नो-पार्किंग जोन के क्रियान्वयन की वस्तुस्थिति रिपोर्ट अगली बैठक में प्रस्तुत करने को कहा।
अतिरिक्त उपायुक्त ने क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, पुलिस तथा लोक निर्माण विभाग को सड़क दुर्घटनाओं का विस्तृत विश्लेषणात्मक आंकड़ा तैयार कर अगली बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसमें दुर्घटनाओं के स्थान, संख्या तथा कारणों का विवरण शामिल होगा। उन्होंने कहा कि सभी एसडीएम द्वारा सुझाए गए उपायों और विभिन्न विभागों के आंकड़ों को समाहित कर जिला सड़क सुरक्षा योजना को और सुदृढ़ बनाया जाएगा, ताकि दुर्घटनाओं में प्रभावी कमी लाई जा सके। बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र शर्मा, एसडीएम हरोली विशाल शर्मा, एसडीएम गगरेट सौमिल गौतम, एसडीएम अम्ब पारस अग्रवाल, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता के.सी. ठाकुर सहित पुलिस, परिवहन, लोक निर्माण तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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