220 फीट गहरे बोरवेल में 4 वर्षीय निरवैर की मौत को लेकर 3 पर केस दर्ज

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अंबालाः धन्योड़ा गांव में मंगलवार सुबह सात बजे खुले बोरवेल में गिरे साढ़े तीन वर्षीय मासूम निरवैर सिंह उर्फ निर्भय की सांसें उसी समय थम गई थी। करीब 20 घंटे 25 मिनट तक चला रेस्क्यू आपरेशन आखिरकार उसकी जिंदगी नहीं बचा सका। घटना के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। उपायुक्त अजय सिंह तोमर के निर्देश पर अंबाला शहर सदर थाना पुलिस ने खेत मालिक हरनेक सिंह और ठेके पर लेने वाले दिलप्रीत सिंह और बलजीत सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार खेत हरनेक सिंह के नाम है, जिसे आगे ठेके पर दिया गया था। मालिक विदेश में रहता है।

वहीं मन्नतों और दुआओं के बाद जन्मे निरवैर के अचानक जाने के गम में पिता मंजीत सिंह सदमे में है। बार-बार तबीयत बिगड़ रही है। डॉक्टरों की टीम भी घर पर मौजूद रहकर उनका समय-समय पर उपचार कर रही है। पिता मंजीत बार-बार बेटे को याद कर बिलख उठते हैं। सांत्वना देने पहुंच रहे हर शख्स की आंखें पिता व परिवार की हालत देखकर नम होती रही। पिता मंजीत के साथ-साथ मां जसबीर कौर, दादा करनैल सिंह तीनों अभी तक उस हादसे से उभरे नहीं है। मां व परिवार की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है।

बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद मिले शव का धन्यौड़ा गांव के ही श्मशानघाट में गमगीन माहौल के बीच संस्कार हुआ। गम में डूबे पिता के हाथ मुखाग्नि देने के लिए लड़खड़ाने लगे। आखिर में ताया गुरप्रीत सिंह ने उन्हें संभालते हुए खुद ही निरवैर को मुखाग्नि दी। डॉक्टरों के दो सदस्यीय चिकित्सकीय पैनल ने पोस्टमार्टम किया। रिपोर्ट के अनुसार बोरवेल में डूबने और गंभीर चोटों के कारण मौत हुई। उसके सिर, छाती और दोनों टखनों पर गंभीर चोटें लगीं, जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों ने काम करना बंद कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, निरवैर के सिर और छाती पर काफी जगह गंभीर चोटें थीं, जिसने शरीर के मुख्य अंगों को ठप कर दिया। गिरने के प्रभाव के कारण दोनों टखनों पर गहरी चोटें आईं। डॉक्टरों के पैनल के अनुसार बोरवेल में गिरने के कुछ ही समय के भीतर निरवैर की सांसें थम चुकी थीं।

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