Punjab News: शर्मनाक कारनामा, चलती ट्रेन में बच्चे को लावारिस छोड़कर मां फरार, देखें वीडियो

पठानकोटः रेलवे स्टेशन और उसके आसपास के इलाके में मानवता को झकझोर देने वाली और बेहद संवेदनशील घटना सामने आई है। जहां अज्ञात महिला कथित तौर पर अपने महज डेढ़ से दो वर्ष के मासूम बच्चे को चलती ट्रेन की बोगी में लावारिस छोड़कर दूसरी ट्रेन में सवार होकर रफूचक्कर हो गई। मां को दूर जाते देख मासूम रोने लगा। जिसके बाद ट्रेन में सफर करने वाली अन्य महिला यात्री ने बच्चे को संभाला और भरोली जीआरपी थाना जाकर अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत करवाया। इस संबंधी जानकारी देते हुए रेलवे थाना पठानकोट के एसएचओ अशोक कुमार ने बताया कि गवर्नमेंट रेलवे पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए मासूम को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया।

आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद बच्चे को बाल संरक्षण विभाग की देखरेख में आश्रय गृह भेज दिया गया है। पुलिस अब सीसीटीवी कैमरों और रेलवे नेटवर्क के जरिए फरार महिला तथा बच्चे के परिजनों की तलाश में सरगर्मी से जुट गई है। उन्होंने बताया कि चंपा देवी, निवासी सुंदर चक्क, मैरा कॉलोनी, थाना सुजानपुर, जिला पठानकोट एक मासूम बालक उम्र करीब 1.5 से 2 वर्ष को गोद में लेकर अचानक जीआरपी थाना पठानकोट पहुंचीं। चंपा देवी और ट्रेन में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को जो आपबीती सुनाई, उसने सभी के होश उड़ा दिए।

मामले की संवेदनशीलता और मासूम की सुरक्षा को देखते हुए जीआरपी पठानकोट ने बिना कोई समय गंवाए जिला बाल संरक्षण इकाई प्रमुख DCPO ऊषा से संपर्क साधा। बाल कल्याण समिति और जीआरपी अधिकारियों की मौजूदगी में कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी की गई। इस संबंधी जानकारी देते हुए DCPO ऊषा देवी ने बताया कि मासूम बच्चे को ‘मेरा परिवार अनाथ आश्रम’ सीताराम मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी, पठानकोट के सुपुर्द कर दिया गया है, जहां उसकी देखभाल की जा रही है।

इस संबंध में जीआरपी थाना पठानकोट में डीडीआर नंबर 34, के तहत रपट दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई है। वहीं उन्होंने बताया कि कुछ लोग उनके पास पहुंचे है, जो कि बच्चे के माता पिता होने का दावा कर रहे है, इस मामले की बारीकी से जांच की जा रही है, जांच के बाद सारी कानूनी कार्रवाई पूरी होने के बाद बच्चे को उसके अस्ल माता पिता को सौंप दिया जाएगा। वहीं बाल गृह की संचालिका ने भी इस बच्चे की वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड की है, ताकि बच्चे की पहचान हो सके और बच्चे को उसके माता पिता तक पहुंचाया जा सके।

 

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