जालंधर, ENS: नीट पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। हालांकि आज दिल्ली में CJP प्रतिनिधिमंडल और केंद्रीय मंत्रियों जितेंद्र सिंह व जेपी नड्डा के बीच मुद्दों लेकर बैठक हुई, CJP प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुद्दे रखे। इस दौरान केंद्रिय मंत्री को मांग पत्र भी सौंपा गया। लेकिन दूसरी ओर इस प्रदर्शन का असर अब देश के अलग-अलग जिलों में भी देखने को मिल रहा है। वहीं आज जालंधर में कॉलेज के स्टूडेंट्स सहित अन्य जत्थेबंदियां छात्रों के हक में सड़कों पर उतर गई। जहां उन्होंने छात्रों का समर्थन करते हुए केंद्रिय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। मंयक ने कहाकि वह गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी कैंपस का छात्र है। मंयक के अनुसार दिल्ली में शांतिमय प्रदर्शन के दौरान उनके साथ मारपीट गई।
ऐसे में उनके समर्थन में प्रदर्शन किया जा रहा है। छात्र ने कहाकि भाजपा सरकार के कार्यालय के दौरान काफी बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही है। इस दौरान पेपर लीक और स्टूडेंट्स के भविष्य के लिए सख्त पॉलिसी बनाई जाए। स्टूडेंट्स पर हुए लाठीचार्ज, टीयर गैस, सहित अन्य चीजों से हुए हमले को लेकर सख्त शब्दों में निंदा की। छात्रों ने कहा कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गई तो अगली रणनीति तय करके संघर्ष को तेज किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर ने एडवोकेट नईम खान कहाकि उनका प्रदर्शन दिल्ली में शातिंमय प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में है। एडवोकेट ने कहाकि एक मंत्री के इस्तीफे से सरकार नहीं गिरने लगी थी। उनका कहना हैकि 12 सालों में लगातार पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आ रही है।
ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान को प्रदर्शन के दौरान खुद ही इस्तीफा दे देना चाहिए था। पेपर लीक को लेकर पहले कभी भी इतना बड़ा प्रदर्शन नहीं हुआ। एडवोकेट ने कहाकि पिछली सरकारों में भी मंत्रियों द्वारा इस्तीफे दिए जा चुके है, लेकिन मोदी सरकार धर्मेद्र प्रधान को क्यों बचाने में लगी हुई है। उनका कहना हैकि 21 स्टूडेंट्स के शहीद होने पर भी मंत्री का इस्तीफा नहीं लिया गया। एडवोकेट ने कहाकि उन्हें लगता है कि धर्मेद्र के पास कोई ऐसी फाइल है, जिसके कारण वह उससे इस्तीफे की मांग नहीं कर रहे है। मोदी सरकार पर पहले लाठीचार्ज से हमला किया गया, जिसके बाद देर रात पीएम मोदी द्वारा लाइव होकर फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए टीम के गठन का जिक्र किया गया। आरोप है कि पहले पीएम मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ कुछ नहीं बोले, वहीं अब वह धर्मेंद्र से इस्तीफे की मांग नहीं कर रहे। उनका कहना है कि केंद्र को पेपर लीक को लेकर सख्य पॉलिसी लानी चाहिए और धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लेना चाहिए।

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