उपमंडल बंगाणा में स्कूलों के साथ अन्य स्थलों पर सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्ती, बीडीओ बंगाणा ने जारी किए कड़े निर्देश

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ऊना,सुशील पंडित: उपमंडल बंगाणा के विकास खंड बंगाणा अधिकारी के एल वर्मा के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी एवं निजी शिक्षण संस्थानों में अब सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर पूरी तरह रोक रहेगी। खंड विकास अधिकारी बंगाणा ने इस संबंध में सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं विद्यालय प्रमुखों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 तथा प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन के इस कदम का उद्देश्य विद्यालयों में स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल माहौल तैयार करना, विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना तथा विकास खंड बंगाणा को प्लास्टिक मुक्त बनाने के अभियान को गति देना है।जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक शिक्षण संस्थान में कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाए और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए। अधिकारियों का मानना है कि यदि बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज पर पड़ेगा।

सूखा और गीला कचरा अलग करना होगा अनिवार्य, परिसर में प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध

बीडीओ बंगाणा के एल वर्मा द्वारा जारी आदेशों के अनुसार सभी विद्यालयों में कचरे का सूखा एवं गीला पृथक्करण अनिवार्य रूप से किया जाएगा। विद्यालय परिसर में अलग-अलग डस्टबिन की व्यवस्था कर जैविक और अजैविक कचरे को अलग-अलग एकत्रित किया जाएगा, ताकि उसके निस्तारण की प्रक्रिया सरल और प्रभावी बन सके। इसके साथ ही विद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार के सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। प्लास्टिक की थैलियां, डिस्पोजेबल कप, प्लेट, चम्मच, स्ट्रॉ, प्लास्टिक की बोतलें और अन्य प्रतिबंधित सामग्री का उपयोग नहीं किया जाएगा। स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस संबंध में नियमित निगरानी रखें और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन होता है तो तत्काल आवश्यक कार्रवाई करें। प्रशासन का कहना है कि सिंगल यूज प्लास्टिक पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। इससे मिट्टी, जल स्रोत और वन्यजीव प्रभावित होते हैं। ऐसे में विद्यालयों को प्लास्टिक मुक्त बनाना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

बिकास खंड बंगाणा अधिकारी द्वारा निर्देशों में विद्यालयों को केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति नियमित रूप से जागरूक करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसके लिए समय-समय पर स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण कार्यक्रम, जागरूकता रैलियां, शपथ ग्रहण समारोह, भाषण प्रतियोगिताएं, चित्रकला प्रतियोगिताएं तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। विद्यालयों को विद्यार्थियों को यह समझाने के निर्देश दिए गए हैं कि प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य और जैव विविधता के लिए कितना नुकसानदायक है। साथ ही बच्चों को कपड़े के थैले, स्टील की बोतलें, टिफिन बॉक्स तथा अन्य पर्यावरण अनुकूल सामग्री के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। विद्यालयों में प्लास्टिक मुक्त परिसर बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने तथा अभिभावकों को भी इस मुहिम से जोड़ने पर जोर दिया गया है, ताकि पर्यावरण संरक्षण का संदेश केवल स्कूल तक सीमित न रहकर घर-घर तक पहुंचे।

बीडीओ बंगाणा के एल वर्मा द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि विद्यालय परिसर में उत्पन्न होने वाले प्लास्टिक एवं अन्य अपशिष्ट का अलग-अलग संग्रहण किया जाए तथा अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। किसी भी प्रकार का कचरा खुले में फेंकने या जलाने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही विद्यार्थियों को भोजन लाने के लिए प्लास्टिक की जगह स्टील, कांच अथवा अन्य पर्यावरण अनुकूल सामग्री के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। विद्यालय प्रबंधन से अपेक्षा की गई है कि वे इस अभियान को जनभागीदारी से जोड़ें, विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण का जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करें।

पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी सरकारी अथवा निजी शिक्षण संस्थान में प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग पाया जाता है तो संबंधित विभाग अपने नियमों के अनुसार कार्रवाई करेगा। प्रशासन ने सभी विद्यालयों से इन निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने का आग्रह करते हुए कहा है कि स्वच्छ, हरित और प्लास्टिक मुक्त विकास खंड बंगाणा का लक्ष्य तभी सफल होगा, जब शिक्षण संस्थान इस अभियान में अग्रणी भूमिका निभाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि विद्यालयों से शुरू होने वाली यह पहल भविष्य की पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदन शील बनाएगी और स्वच्छ हिमाचल के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

 

 

 

 

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