चंडीगढ़ः ‘वारिस पंजाब दे’ के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। चंडीगढ़ पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर हुई घटनाओं को लेकर पार्टी के कई नेताओं और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इस कार्रवाई से यह मामला एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है। दरअसल, पुलिस ने मनप्रीत अय्याली सहित 14 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है। दरअसल, पंजाब के खडूर साहिब से खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल सिंह और बंदी सिखों की रिहाई को लेकर निकले अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के समर्थक मुख्यमंत्री भगवंत मान की चंडीगढ़ के सेक्टर 2 स्थित सरकारी कोठी के 1Km नजदीक तक पहुंच गए। इस दौरान उन्होंने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ी। यहां तक कि वाटर कैनन पर भी कब्जा कर लिया।
पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर में मनप्रीत सिंह अय्याली, लक्खा सिधाना, भाना सिंह सिद्धू, सतिंदरजीत सिंह गिल, कबल सिंह भुल्लर, जगदीप सिंह कंसला, इकबाल सिंह संधू, परमजीत सिंह जौहल, पूर्व विधायक अजीब सिंह मखमलपुर, चमकौर सिंह धुन्न, वकील इमान सिंह खैरा, जसविंदर सिंह डरोली, इकबाल सिंह चुंडा, करनल सिंह पंजोली और लखवीर सिंह लक्खा सहित 14 लोगों को नामजद किया गया है।
दरअसल, इस घटना के दौरान पुलिसवाले भी घायल हुए है। यह प्रदर्शन पहले से घोषित था, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि चंडीगढ़ पुलिस इस पूरे मामले में कैसे चूक गई। वह न तो प्रदर्शनकारियों को बॉर्डर पर रोक पाई और न ही सीएम के घर के करीब पहुंचने तक रोक सकी। इस बारे में पंजाब के पूर्व डीजीपी एपी पांडे ने कहा कि यह चंडीगढ़ और मोहाली पुलिस के बीच तालमेल और ग्राउंड इंटेलिजेंस की कमी है। बड़े प्रदर्शन को संभालने की सबसे मजबूत तैयारी होनी चाहिए थी। वहीं चंडीगढ़ की SSP कंवरदीप कौर ने पुलिस का बचाव किया। उन्होंने कहा कि पुलिस माहौल खराब नहीं होने देना चाहती थी।
SSP कंवरदीप कौर ने कहा कि संगठन के नेताओं के साथ पिछले एक सप्ताह से बातचीत चल रही थी, लेकिन प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ गए। कुछ लोग हथियार लेकर आए थे। हम नहीं चाहते थे कि माहौल खराब हो। इनके हाथियारों से जवान घायल तक हुए हैं। SSP ने बताया कि प्रदर्शनकारियों पर धारा 163 के उल्लंघन के मामले में बीएनएस की धारा 173(1) के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। वीडियो फुटेज के आधार पर पुलिस चेहरों की पहचान कर रही है। एफआईआर के अनुसार, 29 जुलाई को सेक्टर 50/51/44/45 गौशाला चौक के पास हजारों प्रदर्शनकारी एकत्र हुए थे। पुलिस का दावा है कि उन्होंने बिना मंजूरी रैली निकाली, मुख्य सड़क जाम की और लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई।
पुलिस ने यह भी कहा है कि मौके पर लागू प्रतिबंधों के बारे में बार-बार अवगत कराने और रैली ग्राउंड में प्रदर्शन करने की अपील के बावजूद प्रदर्शनकारी नहीं माने। पुलिस के आरोपों के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की की। एफआईआर में यह भी दावा किया गया है कि सरकारी वॉटर कैनन वाहन को नुकसान पहुंचाया गया और एक एएसआई सहित कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके बाद स्थिति को काबू करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया गया।

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