गीत-संगीत व नुक्कड़ नाटक से दी सरकारी योजनाओं की जानकारी

ऊना/सुशील पंडित: सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के संबद्ध पूर्वी कला मंच जलग्रां, आरके कला मंच चिंतपूर्णी व नटराज कला मंच नादौन के कलाकारों ने गीत-संगीत व नुक्कड़ नाटक के माध्यम से अनुसूचित जाति के उत्थान हेतू चलाई गई प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं बारे जागरूक किया। 

इस कड़ी में आज नटराज कला मंच ने पडियोला व लठियाणी, पूर्वी कला मंच ने लमलेहड़ा व ललड़ी तथा आरके कला मंच ने नंगल जरियालां व कैलाश नगर में नुक्कड़ नाटक एवं गीत संगीत के जरिए अनुसूचित जाति वर्ग के लिए विशेष तौर पर संचालित की जा रही विभिन्न योजनाओं बारे जागरूक किया।

फोक मीडिया दलों ने उपस्थित जनसमूह को राज्य सरकार के माध्यम से अनुसूचित जाति वर्ग के कल्याणार्थ हेतू क्रियान्वित की जा रही विभिन्न सरकारी योजनओं बारे जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति के ऐसे व्यक्तियों जिन्हें सामान्य जाति के लोगों द्वारा जाति के आधार पर पीड़ित किए जाने पर पुलिस में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होने पर या न्यायालय में चालान प्रस्तुत होने पर 85 हज़ार रूपये से लेकर 8.25 लाख रूपये तक अत्याचार के प्रकार अनुसार आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति के छात्र/छात्राओं के शिक्षा स्तर में विकास तथा स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति को रोकने के उद्देश्य से केंद्रीय प्रायोजित योजना के तहत छात्रवासों का निर्माण किया जा रहा है।

कलाकारों ने स्थानीय लोगों को स्वर्ण जयंती आश्रय योजना बारे भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्गों के आवासहीन लोगों के लिए वर्तमान सरकार द्वारा घरों के निर्माण के लिए 1.50 लाख रूपये की आर्थिक मदद प्रदान की जा रही है। 

इसके अलावा उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रदेश सरकार ने हिमकेयर योजना तथा केंद्र सरकार ने आयुष्मान योजना संचालित की है जिसके तहत प्रति व्यक्ति का 5 लाख रूपये की बीमा किया जाता है।

इस अवसर पर डियूंगली के प्रधान कमल सिंह, लठियाणी के प्रधान जोगिंद्र कुमार शर्मा व उप प्रधान निर्मल सिंह, लमलेहड़ा की प्रधान नेहा रानी, ललड़ी के प्रधान अशोक कुमार, कैलाश नगर की प्रधान दर्शना देवी, उप प्रधान अजय कुमार, नंगल जरियालां की प्रधान सीमा व उप प्रधान सुशील कुमार, वार्ड पंच सुषमा, भोली देवी व गुरदियाल सहित अन्य उपस्थित रहे।

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