पंजाबः दो पुलिस अधिकारियों को उम्रकैद, 5 लाख रुपए जुर्माना

गुरदासपुरः जिलें के अतिरिक्त सेशन जज परमिंदर सिंह राय की अदालत ने 30 साल पुराने एक मामले का निपटारा करते हुए फर्जी मुकाबले में लिप्त दो पुलिस अधिकारियों को उम्र कैद और पांच लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। दंडित कर्मचारियों में डेरा बाबा नानक थाने में तैनात एएसआई चन्नन सिंह और एएसआई तरलोक सिंह शामिल हैं। इस मामले में शिकायतकर्ता गांव अलावलपुर कलानौर निवासी हरजीत सिंह की विधवा लखबीर कौर ने अदालत में मुकदमा दायर किया था।

लखबीर कौर की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 364 के तहत दोष तय किए गए। शिकायतकर्ता ने बताया कि 21 मार्च 1993 को दोपहर में वह अपने बेटे बलविंदर सिंह के साथ बस में गांव भोमा से लौट रही थी। उसी बस में उसका परिचित विरसा सिंह, उसकी पत्नी सुखविंदर कौर और बेटा बलजिंदर सिंह उर्फ ​​लाटू भी सवार थे। तलवंडी रामा के बस स्टॉप पर बस रुकी तो अचानक डेरा बाबा नानक थाने के एसएचओ बलदेव सिंह, कांस्टेबल चन्नन सिंह, कांस्टेबल निर्मल सिंह समेत कुछ अन्य पुलिसकर्मी बस में घुस गए। उन्होंने उसके बेटे बलविंदर सिंह और उसके साथ यात्रा कर रहे युवक बलजिंदर सिंह उर्फ ​​लाटू को जबरन बस से उतार दिया।

पुलिस से इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि ये युवक आतंकी हैं। पुलिस उन्हें डेरा बाबा नानक थाने ले गई। परिजन और गांव वाले डेरा बाबा नानक थाने गए और युवक को निर्दोष बताते हुए उसकी रिहाई की मांग की, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। उस वक्त पुलिस ने बलविंदर सिंह नाम के एक अन्य युवक को भी थाने में रखा था। 23 मार्च 1993 को पुलिस उन्हें जबरदस्ती एक वाहन में बिठाकर कठ्याली गांव ले गई। युवक चिल्ला रहे थे कि उन्हें मार दिया जाएगा। कुछ देर बाद जब पुलिस की गाड़ी कठियाली गांव पहुंची तो ग्रामीणों ने गोली चलने की आवाज सुनी। इस प्रकार युवक को फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया गया।

शिकायतकर्ता लखबीर कौर ने कहा कि उनके बेटे का शव भी नहीं दिया गया। पुलिस ने खुद ही बेटे का अंतिम संस्कार कर दिया। इस अहम मामले की सुनवाई करीब तीस साल तक चली। इस दौरान तीन अन्य आरोपी एसएचओ बलदेव सिंह, एएसआई ज्ञान सिंह और हेड कांस्टेबल निर्मल सिंह की मौत हो गई थी। इस तरह कोर्ट ने दो पुलिसकर्मियों एएसआई चानन सिंह और तरलोक सिंह को उम्रकैद और पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। यह जुर्माना राशि पीड़ित परिवार को सौंपी जाएगी।

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