Blog

  • राजस्व विभाग में डिजिटल बदलाव से पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित सेवाएं हो रही सुनिश्चित: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

    राजस्व विभाग में डिजिटल बदलाव से पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित सेवाएं हो रही सुनिश्चित: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

    चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को हरियाणा निवास चंडीगढ़ में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए डिजिटल गवर्नेंस, भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण तथा नागरिक-केंद्रित सुधारों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजस्व विभाग की प्रत्येक सेवा पारदर्शी, तकनीक आधारित और निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाए ताकि नागरिकों को बिना किसी अनावश्यक देरी के सुगम सेवाएं मिल सकें। बैठक में प्रदेश के सभी जिला उपायुक्त, डीएमसी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं वित्त आयुक्त, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि विभाग ने मई 2025 में अपना पहला इन-हाउस सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रभाग स्थापित कर व्यापक डिजिटल परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया । इससे बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता कम हुई है तथा विभागीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के विकास और रखरखाव में तेजी आई है। इस तकनीकी टीम में सॉफ्टवेयर डेवलपर, यूआई/यूएक्स डिजाइनर, तकनीकी दस्तावेज विशेषज्ञ तथा सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर सहित 16 स्वीकृत पद शामिल हैं।   मुख्यमंत्री ने एकीकृत राजस्व पोर्टल (इंटीग्रेटेड रेवेन्यू पोर्टल) की प्रगति की समीक्षा की। उन्हें बताया गया कि यह पोर्टल नागरिकों और विभागीय अधिकारियों के लिए एकीकृत डिजिटल मंच के रूप में विकसित किया गया है। इसके माध्यम से नागरिकों को ऑनलाइन राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। पोर्टल में अधिकारियों के लिए सिंगल साइन-ऑन प्रणाली तथा सेवा वितरण एवं लंबित मामलों की रियल टाइम निगरानी के लिए एकीकृत डैशबोर्ड की सुविधा भी उपलब्ध है।

    राजस्व शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने के दिए निर्देश

    मुख्यमंत्री ने शिकायत निवारण प्रणाली की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इसे अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक हितैषी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र नागरिक को न्याय मिलना चाहिए। जिन आवेदकों के आवेदन अस्वीकृत हुए हैं और यदि वे निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं तो उन्हें पुनर्विचार का उचित अवसर दिया जाना चाहिए। शिकायत डैशबोर्ड की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी आवेदनों के निपटान में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए। प्रत्येक अस्वीकृत आवेदन में अस्वीकृति का स्पष्ट कारण दर्ज किया जाए तथा उसका समुचित रिकॉर्ड रखा जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्वीकृत मामलों की समय-समय पर रैंडम जांच की जाए ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति को प्रक्रियागत त्रुटि या गलत जांच के कारण लाभ से वंचित न रहना पड़े। मुख्यमंत्री ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए कि जिलों में आयोजित किए जा रहे साप्ताहिक समाधान शिविरों में तहसीलदारों तथा राजस्व विभाग के अन्य अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए ताकि मौके पर ही राजस्व से जुड़ी समस्याओं का समाधान संभव हो सके

    मिशन मोड में होगा भूमि अभिलेखों का आधुनिकीकरण

    मुख्यमंत्री ने राज्य के भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए इसकी प्रगति की जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि अब तक 40.20 करोड़ से अधिक पुराने राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है, जिससे राज्य में डिजिटल भूमि अभिलेख उपलब्ध हो पाया है। ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से लगभग 44 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर किया जा चुका है, जबकि राज्य की भू-स्थानिक (जियोस्पेशियल) संरचना को मजबूत करने के लिए 19 कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन (सीओआरएस) स्थापित किए गए हैं। बैठक में बताया गया कि राज्य के 99 प्रतिशत गांवों के नक्शों का जियो-रेफरेंसिंग कार्य पूरा हो चुका है। लगभग 60 लाख ततीमा नक्शों को अद्यतन किया गया है तथा रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (अधिकार अभिलेख) का लगभग 60 प्रतिशत मानकीकरण किया जा चुका है। डिजिटलीकृत अभिलेखों में से 99.5 प्रतिशत से अधिक का प्रथम स्तर का सत्यापन भी पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम को पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि नागरिक-केंद्रित सुधारों के तहत 6,761 गांवों में संपत्ति कार्ड तैयार कर लगभग 25.16 लाख संपत्ति मालिकों को वितरित किए जा चुके हैं। लगभग 95 प्रतिशत गांवों के नक्शे भू-नक्शा पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं। पारदर्शिता एवं प्रामाणिकता बढ़ाने के लिए लगभग 42 लाख आधार नंबर पुराने राजस्व अभिलेखों से जोड़े जा चुके हैं तथा नागरिकों की सुविधा के लिए आईटी हेल्पडेस्क भी स्थापित किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि विभाग ने पांच लाख से अधिक लंबित इंतकाल (म्यूटेशन) मामलों का निपटारा किया है। सरल पोर्टल की लगभग 80 प्रतिशत सेवाओं को ऑटो अपील प्रणाली से जोड़ा जा चुका है ताकि निर्धारित समय से अधिक लंबित मामलों का स्वतः उच्च स्तर पर संज्ञान लिया जा सके और सेवाओं का समयबद्ध वितरण सुनिश्चित हो। डिजिटल पंजीकरण सुधारों से 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व संग्रह हो पाया है। मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि कागज रहित दस्तावेज पंजीकरण व्यवस्था की नियमित निगरानी करें। अधिकारियों ने बताया कि दस्तावेज पंजीकरण की प्रक्रिया अब पूर्णतः एंड-टू-एंड पेपरलेस हो चुकी है तथा लंबित मामलों की निगरानी के लिए सार्वजनिक लाइव डैशबोर्ड भी उपलब्ध है।

    सभी भूमि पंजीकरण कार्यालयों में नागरिकों के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित हों

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी भूमि पंजीकरण कार्यालयों में आने वाले नागरिकों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्यालय में उचित वेटिंग रूम सहित सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों। साथ ही सभी कार्यालयों में क्यू मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाए तथा डिजिटल स्क्रीन पर टोकन नंबर प्रदर्शित किए जाएं ताकि नागरिकों को व्यवस्थित और सुविधाजनक ढंग से सेवाएं प्राप्त हो सकें। मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी कार्यक्रम (सीएमजीजीए) के परियोजना निदेशक डॉ. यशपाल ने बताया कि पेपरलेस प्रणाली के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अब तक 12,300 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। जियो-रेफरेंस गांवों के आंकड़ों के सत्यापन के लिए जिलों की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि लैंड डिमार्केशन को अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनाया जा सके। मुख्यमंत्री ने ऐसे मामलों के त्वरित निदान में सिरसा जिले के कार्य की सराहना करते हुए अन्य जिलों को भी बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों की कार्यप्रणाली अपनाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि राजस्व अभिलेखों की आधार से जोड़ने का कार्य भी तेजी से जारी है। अब तक कुल 1.69 करोड़ अभिलेखों में से 42.55 लाख से अधिक अभिलेख आधार से जोड़े जा चुके हैं, जो कुल अभिलेखों का लगभग 25 प्रतिशत है। इससे भूमि अभिलेख अधिक सटीक होंगे, डुप्लीकेट प्रविष्टियां समाप्त होंगी, पारदर्शिता बढ़ेगी, सेवाओं की गति तेज होगी तथा फर्जी भूमि लेन-देन पर प्रभावी रोक लगेगी।

    15 अगस्त तक एग्री स्टैक पंजीकरण बढ़ाने के निर्देश

    बैठक में एग्री स्टैक किसान रजिस्ट्री की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि किसानों के एग्री स्टैक आईडी बनवाने के लिए व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त तक किसान पंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की जाए ताकि अधिक से अधिक किसान भविष्य की डिजिटल कृषि पहलों एवं सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें। मुख्यमंत्री ने डिजिटल फसल सर्वेक्षण की तैयारियों की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि आगामी फसल सीजन में राज्य के सभी गांवों को शत-प्रतिशत कवर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए डाटा सत्यापन, मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण, जिला स्तर पर क्षमता निर्माण, मोबाइल एप की तैयारी, मॉक सर्वे तथा अगस्त मध्य से राज्यव्यापी सर्वेक्षण प्रारंभ किया जाएगा। वर्ष के अंत तक सर्वेक्षण पूर्ण कर उसका ऑडिट भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ऑफलाइन जमाबंदी के लंबित मामलों तथा पटवार सर्किलों के युक्तिकरण की प्रगति की भी समीक्षा की। बैठक में यह भी बताया गया कि विभाग ने आधार सीडिंग, ऑटो म्यूटेशन, प्रमाणित प्रतियां, सीमांकन, ऋण प्रविष्टियां तथा उपयोगकर्ता पंजीकरण सहित विभिन्न डिजिटल मॉड्यूल के लिए विस्तृत संचालन प्रक्रिया (एसओपी) एवं उपयोगकर्ता पुस्तिकाएं तैयार की हैं ताकि पूरे राज्य में इनका एक समान क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके

    आयुष्मान भारत एवं चिरायु हरियाणा योजना की करी समीक्षा

    मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी कार्यक्रम (सीएमजीजीए) की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में आयुष्मान भारत एवं चिरायु हरियाणा योजना की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी को इन योजनाओं से जोड़ा जाए ताकि कोई भी जरूरतमंद परिवार कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं के लाभ से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक सरकारी अस्पताल को निजी अस्पतालों के समकक्ष आधुनिक सुविधाओं, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक चिकित्सा संसाधनों से सुसज्जित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल स्वच्छता, मरीजों की देखभाल और सेवा वितरण के सर्वोच्च मानक स्थापित करें। उन्होंने उपायुक्तों को सरकारी अस्पतालों का नियमित औचक निरीक्षण करने तथा चिकित्सकों, दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता की व्यक्तिगत निगरानी करने के निर्देश दिए। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, विद्यालय शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा, सभी उपायुक्त, नगर निगम आयुक्त तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।    
  • तंबाकू नियंत्रण में हरियाणा राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनकर उभरा

    तंबाकू नियंत्रण में हरियाणा राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनकर उभरा

    चंडीगढ़: हरियाणा ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली दो तिमाहियों के दौरान राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) के तहत उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की हैं, जिसने प्रभावी प्रवर्तन, जागरूकता सृजन, नशा मुक्ति सेवाओं और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से एक तंबाकू-मुक्त समाज बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया है।

    हरियाणा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने उपलब्धियों को साझा करते हुए कहा कि तंबाकू-मुक्त शैक्षणिक संस्थान (टीओएफईआई) दिशा-निर्देशों के तहत 12,865 शैक्षणिक संस्थानों को तंबाकू-मुक्त घोषित किए जाने के साथ हरियाणा तंबाकू नियंत्रण में अग्रणी राज्यों में से एक बनकर उभरा है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य ने राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत तंबाकू नियंत्रण प्रतिज्ञाओं (शपथ) की संख्या के मामले में देश में दूसरा स्थान हासिल किया है, जो व्यापक जनभागीदारी और मजबूत अंतर-विभागीय समन्वय को दर्शाता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार तंबाकू-मुक्त गाँव बनाने की दिशा में भी तेजी से प्रगति कर रही है, जिसके तहत 1,128 गाँवों को पहले ही तंबाकू-मुक्त घोषित किया जा चुका है, जो आने वाली पीढ़ियों को तंबाकू के हानिकारक प्रभावों से बचाने के लिए हरियाणा की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।

    तंबाकू नियंत्रण कानूनों का कड़ाई से पालन कराना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता बनी हुई है। रिपोर्टिंग अवधि के दौरान, कोटपा (COTPA), 2003 की धारा 4 के तहत 3,848 उल्लंघनकर्ताओं के चालान किए गए, जिससे जुर्माने के रूप में ₹1.82 लाख एकत्र हुए। इसके अलावा, प्रवर्तन एजेंसियों ने इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 के तहत छह मामले दर्ज किए और 33 इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का स्टॉक जब्त किया। उन्होंने आगे जानकारी दी कि सभी जिला अस्पतालों और 17 मेडिकल/डेंटल कॉलेजों में संचालित तंबाकू नशा मुक्ति केंद्रों ने 20,414 तंबाकू उपयोगकर्ताओं को परामर्श और उपचार सेवाएं प्रदान कीं, जिससे उन्हें पेशेवर परामर्श और फार्माकोथेरेपी के माध्यम से तंबाकू छोड़ने में मदद मिली।

    हरियाणा के राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. ब्रह्मदीप सिंह ने कहा कि इन उपलब्धियों को हासिल करने में व्यापक जागरूकता गतिविधियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वित्तीय वर्ष की पहली छमाही के दौरान, 13,524 शैक्षणिक संस्थानों का मूल्यांकन किया गया, 10,500 से अधिक तंबाकू-मुक्त प्रतिज्ञा सत्र आयोजित किए गए, और राज्य भर में 4,255 स्कूल रैलियां तथा 4,633 जागरूकता प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।

    तंबाकू-मुक्त गांव पहल के तहत, 1,444 ग्राम सभा बैठकों, 2,247 जागरूकता गतिविधियों और 1,002 ग्राम स्तरीय समन्वय समितियों के गठन ने सामुदायिक भागीदारी को मजबूत किया है। इस कार्यक्रम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से एक व्यापक डिजिटल पहुंच भी बनाए रखी है, जिससे तंबाकू नियंत्रण पर निरंतर जन जुड़ाव सुनिश्चित हुआ है।

    स्वास्थ्य विभाग ने कानून के प्रवर्तन को और मजबूत करने, नशामुक्ति सेवाओं का विस्तार करने तथा शैक्षणिक संस्थानों, गाँवों और सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू-मुक्त वातावरण को बढ़ावा देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिससे एक स्वस्थ और तंबाकू-मुक्त हरियाणा के निर्माण में योगदान दिया जा सके।

     

     

  • लोगों को सुलभ, किफायती और त्वरित न्याय देने के लिए हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की अनूठी पहल

    लोगों को सुलभ, किफायती और त्वरित न्याय देने के लिए हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की अनूठी पहल

    चंडीगढ़: लोगों को सुलभ, किफायती और त्वरित न्याय दिलाने के लिए हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक सिबल ने एक अनूठी पहल की है। जिसके तहत 18 जुलाई को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट’ के तहत सभी जिलों में एक साथ विशेष लोक अदालतों का आयोजन किया गया, जिसमें 9,590 मामलों का सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटारा किया गया।

    प्राधिकरण द्वारा यह विशेष पहल से विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने और वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्र को मजबूत करने के प्रति हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की प्रतिबद्धता की पुष्टि हुई। इन समझौतों से लंबे समय से लंबित मामलों का त्वरित समाधान संभव हुआ, जिससे पक्षकारों को लंबी कानूनी लड़ाई से बचने, काफी समय और खर्च बचाने और आपसी सहमति से स्वीकार्य समाधानों के माध्यम से सौहार्दपूर्ण संबंध बहाल करने में मदद मिली।

    विशेष लोक अदालत के सफल आयोजन ने हरियाणा की अदालतों में चेक बाउंस होने के मामलों की लंबित संख्या को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, साथ ही विवाद समाधान के लिए एक प्रभावी, कुशल और नागरिक-अनुकूल तंत्र के रूप में लोक अदालत संस्था में जनता के विश्वास को भी मजबूत किया है। विशेष लोक अदालतों के दौरान 97,29,66,109 रुपये की राशि का निपटारा किया गया, जो विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान में लोक अदालत तंत्र की प्रभावशीलता को उजागर करता है।

  • मेरी रसोई राशन किटों का वितरण 30 लाख से पार

    मेरी रसोई राशन किटों का वितरण 30 लाख से पार

    3.44 लाख से अधिक राशन किटों के वितरण के साथ लुधियाना अग्रणी, पटियाला 2.24 लाख से अधिक के साथ दूसरे और अमृतसर 2.08 लाख किटों के वितरण के साथ तीसरे स्थान पर

    चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने जरूरतमंद परिवारों के लिए पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के मद्देनजर अपनी चल रही राशन किट वितरण मुहिम ‘मेरी रसोई’ में और तेजी लाई है, जिसके तहत लगभग 30.48 लाख परिवार पहले ही लाभ ले रहे हैं। इस मुहिम का उद्देश्य हर तिमाही (3 महीनों) बाद पंजाब भर में कुल 40.48 लाख पात्र परिवारों को कवर करना है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की दूरदर्शी सोच और खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री लाल चंद कटारूचक्क की निगरानी में इस प्रमुख पहल के तहत राशन का वितरण मिशन मोड पर किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि प्रत्येक परिवार को एक राशन किट मिलेगी, जो एक घर की आवश्यक खाद्य वस्तुओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसमें मासिक खपत के लिए दो किलो दाल, दो किलो चीनी, एक किलो नमक, 200 ग्राम हल्दी पाउडर, और एक लीटर सरसों का तेल शामिल है। ये राशन किटें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत पात्र लाभार्थियों को पहले से ही वितरित की जा रही गेहूं के अतिरिक्त प्रदान की जा रही हैं। राशन किटें मार्कफेड द्वारा एकत्रित की जाती हैं, जबकि खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा प्रदेश भर में वितरण नेटवर्क की निगरानी की जाती है। अब तक वितरित की गई 30.48 लाख राशन किटों में से, लुधियाना 344427 के साथ पहले, पटियाला 224447 के साथ दूसरे स्थान, अमृतसर 208073 के साथ तीसरे स्थान पर, बठिंडा 190800 के साथ चौथे, जालंधर 169223 के साथ पांचवें स्थान पर और गुरदासपुर 168880 राशन किटों के वितरण के साथ छठे स्थान पर है। बाकी जिलों की बात करें तो फाजिल्का में 162163 राशन किटें, संगरूर में 157009, होशियारपुर में 149846, तरन तारन में 147049, श्री मुक्तसर साहिब में 141122, फिरोजपुर में 117865, मोगा में 115314, मानसा 98149, कपूरथला 84355, फतेहगढ़ साहिब में 81700, फरीदकोट में 81300, साहिबजादा अजीत सिंह नगर में 79753, पठानकोट में 79363, रूपनगर में 73625, बरनाला में 67927, मलेरकोटला में 53804 और शहीद भगत सिंह नगर में 52002 राशन किटें वितरित की गई हैं। योजना का उद्देश्य अनाज के साथ-साथ आवश्यक प्रोटीन, खाना पकाने का तेल और मसाले उपलब्ध कराना भी है, ताकि योजना के अंतर्गत आने वाले परिवारों को समग्र रूप से पौष्टिक तत्वों से युक्त भोजन मिल सके। वितरण की सुचारू निगरानी की जा रही है, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए हर घर तक स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन पहुंचाया जा सके। जिला प्रशासन, खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग और स्थानीय अधिकारी इस नए उपाय की सफलता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तनदेही एवं समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। यह योजना राज्य सरकार की वचनबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है कि कोई भी जरूरतमंद एवं पात्र परिवार खाद्य सुरक्षा से वंचित न रहे। मौजूदा एनएफएसए गेहूं वितरण में इन राशन किटों को जोड़कर, भूखमरी और पोषण दोनों मुद्दों का समाधान किया जा रहा है।  
  • प्रधान सचिव ने ABVIGET में शैक्षणिक एवं आधारभूत संरचना विकास की समीक्षा की

    प्रधान सचिव ने ABVIGET में शैक्षणिक एवं आधारभूत संरचना विकास की समीक्षा की

    शिमला: तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण के प्रधान सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने शुक्रवार को जिला शिमला के प्रगतिनगर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी राजकीय इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (एबीवीजीआईईटी) का दौरा कर संस्थान की शैक्षणिक, प्रशासनिक, अनुसंधान तथा आधारभूत संरचना संबंधी गतिविधियों की समीक्षा की।

    इस अवसर पर डॉ. जैन ने इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक एवं आईटीआई विंग के संकाय सदस्यों और कर्मचारियों के साथ संवाद किया। उन्होंने समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए संस्थान को और सशक्त बनाने पर बल दिया। उन्होंने शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने, आधारभूत संरचना के उन्नयन तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास की दिशा में कार्य करने के लिए कहा। बैठक में मानव संसाधन को सुदृढ़ करने, छात्र कल्याण निधि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने, केंद्रीय पुस्तकालय में अतिरिक्त पुस्तकों एवं डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने, प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण तथा अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रयोगशाला स्थापित करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन को प्रोत्साहित करने पर बल दिया।

     

    प्रधान सचिव ने विद्यार्थियों को शैक्षणिक एवं औद्योगिक भ्रमण के माध्यम से उद्योगों का अधिक व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने, संकाय सदस्यों द्वारा नियमित मार्गदर्शन, व्यक्तित्व विकास एवं सॉफ्ट स्किल्स प्रशिक्षण तथा ‘टॉपर गैलरी’ जैसी पहलों के माध्यम से शैक्षणिक उत्कृष्टता को सम्मानित करने पर भी बल दिया। परिसर के समग्र विकास के लिए कक्षाओं के उन्नयन, खेल सुविधाओं के विस्तार, इनडोर जिम्नेजियम की स्थापना, हरित परिसर के विकास तथा स्वच्छता के उच्च मानकों को बनाए रखने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, संकाय सदस्यों को राष्ट्रीय एजेंसियों से अनुसंधान अनुदान प्राप्त करने और उद्योगों के साथ सहयोग को और मजबूत करने के लिए प्रेरित किया गया।

    डॉ. अभिषेक जैन ने कहा कि संस्थान को शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार, अनुसंधान, उद्योग-संस्थान साझेदारी तथा उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से तकनीकी शिक्षा का उत्कृष्टता केंद्र बनने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने संकाय एवं कर्मचारियों का आहवान करते हुए कहा कि समर्पण और सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ तकनीकी शिक्षा के सर्वोच्च मानकों को हासिल करने की दिशा में कार्य किया जाए।

  • भगवंत मान सरकार की शिक्षा क्रांति से राज्य के विद्यार्थियों को मिली बड़ी सौगात

    भगवंत मान सरकार की शिक्षा क्रांति से राज्य के विद्यार्थियों को मिली बड़ी सौगात

    चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की ‘शिक्षा क्रांति’ के अंतर्गत राज्यभर के उच्च एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शुरू किए गए ‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम के अत्यंत उत्साहजनक और सार्थक परिणाम सामने आए हैं। बी.कॉम., बीबीए, बी.टेक., बी.वोकेशनल तथा आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक के विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य विषय के रूप में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के पहले वर्ष में लगभग 95,000 विद्यार्थियों को शामिल किया गया। इनमें से 25,693 विद्यार्थियों ने अपने स्वयं के व्यवसाय शुरू किए, जबकि 20,241 छात्र उद्यमों ने पहले ही वर्ष में लगभग 90 करोड़ रुपये का कारोबार किया।

    इस उपलब्धि पर उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “पंजाब का बिजनेस क्लास कार्यक्रम शिक्षा के उद्देश्य को नई परिभाषा दे रहा है। हमारा लक्ष्य केवल डिग्रियां देना नहीं, बल्कि नवाचार करने वाले, उद्यमी और रोजगार सृजित करने वाले युवाओं की नई पीढ़ी तैयार करना है। लगभग 95,000 विद्यार्थियों ने अपने व्यावसायिक विचारों पर काम किया, जिनमें से 25,000 से अधिक ने अपने स्टार्टअप शुरू किए। पहले ही वर्ष में इन उद्यमों ने सामूहिक रूप से लगभग 90 करोड़ रुपये की कमाई की। इससे स्पष्ट है कि यदि युवाओं को सही अवसर मिलें तो वे सफल व्यवसाय खड़े कर सकते हैं, रोजगार पैदा कर सकते हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।”

    उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब की शिक्षा क्रांति हमारे युवाओं को केवल नौकरी पाने के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए रोजगार और अवसर सृजित करने के लिए तैयार कर रही है।” इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पंजाब के युवा केवल नौकरी पाने की सोच तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं रोजगार सृजित करें और आर्थिक विकास में भागीदार बनें। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में राज्य की 20 विश्वविद्यालयों, 494 कॉलेजों, 320 आईटीआई और 91 पॉलिटेक्निक सहित कुल 925 उच्च एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों में बी.कॉम., बीबीए, बी.टेक. तथा बी.वोकेशनल के विद्यार्थियों के लिए अकादमिक सत्र 2025-26 के दौरान दो-क्रेडिट का अनिवार्य पाठ्यक्रम शुरू किया गया।

    पारंपरिक शिक्षा, जो केवल पाठ्यपुस्तकों और परीक्षाओं तक सीमित रहती है, उससे अलग यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को व्यावसायिक अवसरों की पहचान, ग्राहक अनुसंधान, बाजार सत्यापन, व्यवसाय स्थापित करना, डिजिटल उपस्थिति, मूल्य निर्धारण रणनीति, ग्राहक प्राप्ति, वित्तीय योजना, संचार कौशल तथा समस्या समाधान जैसे व्यावहारिक उद्यमिता कौशल सिखाता है। परिणामस्वरूप लगभग 57,000 विद्यार्थी (करीब 60 प्रतिशत प्रतिभागी) पढ़ाई के दौरान ही वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल हुए।

     

    इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को ई-कॉमर्स, बेकरी एवं फूड सर्विस, डिजिटल कंटेंट निर्माण, कोडिंग एवं प्रोफेशनल सेवाएं, ग्राफिक डिजाइनिंग, फिटनेस एवं वेलनेस, रिटेल, ब्यूटी एवं पर्सनल केयर, कृषि आधारित उद्यम, हस्तशिल्प तथा अन्य स्थानीय सेवा व्यवसायों में अपना उद्यम शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया। इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे पंजाब में देखने को मिल रहा है।

    गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के कंप्यूटर इंजीनियरिंग के छात्र सौरव ने अपने माचा पेय ब्रांड ‘मॉक, इन माचा’ के माध्यम से कॉलेज कार्यक्रमों में उत्पाद बेचकर लगभग 90,000 रुपये कमाए।इस उद्मम ने अपने विलक्षण फ्लेवरों और ताज़गी के कारण के कारण ख्याति हासिल की।

    महाराजा रणजीत सिंह पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी, बठिंडा के शरणवीर सिंह ने ‘स्किलएक्सस’ नामक डिजिटल करियर गाइडेंस प्लेटफॉर्म विकसित किया, जिसके 2.5 लाख से अधिक उपयोगकर्ता हो चुके हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि विद्यार्थी इस कार्यक्रम के माध्यम से बड़े स्तर पर तकनीक आधारित उद्यम स्थापित कर रहे हैं। संत बाबा भाग सिंह विश्वविद्यालय, जालंधर के पंकज ने इंस्टाग्राम और यूट्यूब के माध्यम से ‘जारिया ज्वेलरी’ नाम से ऑनलाइन आर्टिफिशियल ज्वेलरी व्यवसाय शुरू किया और लगभग 150 ग्राहकों को सेवाएं देकर 30,000 रुपये की आय अर्जित की।

    सरकारी आईटीआई, पटियाला के कमलजीत सिंह ने ‘केएमएल मशरूम’ की स्थापना की, जो स्थानीय बाजारों और रेस्तरां को बटन मशरूम की आपूर्ति करता है। उन्होंने लगभग 1.5 लाख रुपये कमाए और अपने ब्रांड की पैकेजिंग भी विकसित की। सरकारी आईटीआई (महिला), मोहाली की गगनप्रीत कौर रंगी ने ‘नेल स्टूडियो बाय गगन’ नाम से घर आधारित नेल आर्ट व्यवसाय शुरू किया, जो इंस्टाग्राम और स्थानीय सैलून के सहयोग से संचालित हो रहा है। इससे उन्होंने लगभग 55,000 रुपये की कमाई की।

    सरकारी आईटीआई, मोहाली के रमनदीप सिंह ने ‘क्वालिटी इलेक्ट्रॉनिक स्टोर’ नाम से ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवसाय शुरू किया। उन्होंने अपनी वेबसाइट बनाई और सोशल मीडिया के माध्यम से बिक्री का विस्तार किया। ये उदाहरण स्पष्ट करते हैं कि ‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम राज्यभर के युवाओं के लिए उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर रहा है।

    पहले ही वर्ष में मिली अभूतपूर्व सफलता और उत्साहजनक परिणामों को देखते हुए राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने सर्वसम्मति से शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सभी स्नातक (अंडरग्रेजुएट) डिग्री कार्यक्रमों में ‘बिजनेस क्लास’ का विस्तार करने की सिफारिश की है। पहले यह कार्यक्रम केवल बी.कॉम., बीबीए, बी.टेक. और बी.वोकेशनल तक सीमित था, लेकिन अब इसे बी.ए., बी.एससी. तथा अन्य सभी स्नातक पाठ्यक्रमों में भी लागू किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को नियमित शिक्षा के साथ व्यावहारिक उद्यमिता कौशल प्राप्त हो सके।

    ‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम की सफलता मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रही पंजाब की शिक्षा क्रांति की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उच्च शिक्षा में उद्यमिता को शामिल कर सरकार विद्यार्थियों को ऐसे व्यावहारिक कौशल प्रदान कर रही है, जिनकी बदौलत वे पढ़ाई के साथ-साथ अपना व्यवसाय शुरू कर सकें और भविष्य में रोजगार देने वाले उद्यमी बन सकें।

    महाराजा रणजीत सिंह पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी, बठिंडा के बी.टेक. (कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग) के छात्र शरणवीर सिंह ने कहा, “पंजाब सरकार द्वारा उद्यमिता को दी गई प्राथमिकता ने मेरे जैसे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास पैदा किया है। ‘स्किलएक्सस’ उसी सोच को एक डिजिटल करियर गाइडेंस इकोसिस्टम में बदलने का मेरा प्रयास है, जो विद्यार्थियों को सही करियर चुनने में मदद करता है।”

    सरकारी आईटीआई (महिला), मोहाली की गगनप्रीत कौर रंगी ने कहा, *“‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम से पहले मुझे लगता था कि नौकरी ही एकमात्र विकल्प है। इस कार्यक्रम ने मेरी सोच बदल दी और मुझे अपने विचारों पर विश्वास करना सिखाया। आज मैं केवल नौकरी तलाशने के बजाय अपना व्यवसाय स्थापित करने और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए प्रेरित हूं।”

  • मान सरकार ने संपत्ति पंजीकरण की भाषा आम लोगों के लिए और सरल बनाने का लिया फैसला

    मान सरकार ने संपत्ति पंजीकरण की भाषा आम लोगों के लिए और सरल बनाने का लिया फैसला

    चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भूमि और संपत्ति की खरीद-फरोख्त के दौरान पंजीकरण में प्रयुक्त भाषा को अधिक सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने राजस्व विभाग में लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे 35 कठिन शब्दों के स्थान पर ऐसे सरल पंजाबी शब्दों के प्रयोग का निर्णय लिया है, जिन्हें आम नागरिक आसानी से समझ सकें।

    पंजाब के राजस्व, पुनर्वास एवं आपदा प्रबंधन मंत्री स. हरदीप सिंह मुंडियां ने बताया कि सरकार का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को लोगों के लिए अधिक सरल, पारदर्शी और सुगम बनाना है। उन्होंने कहा कि संपत्ति पंजीकरण से संबंधित दस्तावेजों में प्रयुक्त कठिन भाषा के कारण आम लोगों को अक्सर दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पुराने कठिन शब्दों के स्थान पर सरल और सहज पंजाबी शब्दों के प्रयोग का फैसला किया है।

    राजस्व मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के निर्देशों के बाद राजस्व एवं पुनर्वास विभाग द्वारा एक विशेष कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी की सिफारिशों के आधार पर संपत्ति पंजीकरण से संबंधित दस्तावेजों में प्रयुक्त 35 कठिन शब्दों के स्थान पर 35 सरल पंजाबी शब्दों को अपनाने का निर्णय लिया गया है।

    स. हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा कि यह निर्णय पंजाब सरकार की जनहितैषी सोच का हिस्सा है, जिसके तहत सरकारी कामकाज में प्रयुक्त भाषा को आम नागरिकों की समझ के अनुरूप बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी नागरिक को अपनी भूमि या संपत्ति से संबंधित दस्तावेजों को समझने में अनावश्यक कठिनाई का सामना न करना पड़े।

    राजस्व मंत्री ने बताया कि महानिरीक्षक पंजीकरण तथा राज्य के सभी उपायुक्तों को पत्र जारी कर पुराने और नए अनुशंसित शब्दों की सूची भेज दी गई है। उन्होंने क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि लोगों की सुविधा के लिए संपत्ति पंजीकरण से संबंधित दस्तावेजों में नए सरल शब्दों का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाए।

    पुराने शब्दों के स्थान पर अनुशंसित नए सरल शब्द

    उजर की जगह एतराज़,
    उजरत की जगह फीस,
    अराज़ी की जगह ज़मीन,
    साकिन की जगह वसनीक,
    साकिन देह की जगह गांव का वसनीक,
    हसब ज़ाबता की जगह कानून के अनुसार,
    हिब्बा की जगह दान,
    कैफ़ियत की जगह विशेष कथन,
    गैर मजरूआ की जगह अणवाहिया खेत,
    गरिंदा की जगह लेने वाला,
    ज़र की जगह रकम,
    ताबे की जगह अनुसार/मुताबिक/अधीन,
    तकावी की जगह कृषि ऋण,
    तरमीम की जगह शोध/दरुस्ती,
    तसब्बुर/तसव्वुर की जगह मन्न लेणा,
    तलबाना की जगह खर्चा,
    देह की जगह पिंड,
    दाखिल-खारिज की जगह इंतकाल,
    फक-उल-रहन की जगह गिरवी रखी जायदाद को छुड़ाना,
    फ़ौत की जगह मौत,
    फ़र्द की जगह नकल जमाबंदी,
    फ़रीक की जगह धिर,
    फ़रीक अव्वल की जगह पहली धिर,
    फ़रीक दोम की जगह दूजी धिर,
    बदस्तूर की जगह पहले दी तरह,
    बैनामा की जगह बिक्रीनामा,
    बज़रिया की जगह राहीं,
    बाया की जगह बेचने वाला,
    मख़सूस की जगह खास,
    मुश्तरका की जगह संयुक्त,
    मुंतकिल की जगह तबदील,
    मज़कूर की जगह उपरोक्त,
    मनसूख करना की जगह रद्द करना/खारिज करना,
    मुश्तरी हुशियारबाश की जगह खरीदार सावधान रहे,
    मुरतहिनकी जगह ज़मीन गहणे लेने वाला

  • Jalandhar News: अशोक सरीन हिक्की के नेतृत्व में बीजेपी को मिलेगा बल: आरती राजपूत

    Jalandhar News: अशोक सरीन हिक्की के नेतृत्व में बीजेपी को मिलेगा बल: आरती राजपूत

    जालंधरः भारतीय जनता पार्टी द्वारा अशोक सरीन हिक्की को जालंधर शहरी जिला अध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर मानव अधिकार परिषद (भारत) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता आरती राजपूत एवं उनकी पूरी टीम ने हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    आरती राजपूत ने कहा कि अशोक सरीन हिक्की एक अनुभवी, कर्मठ एवं जनप्रिय नेता हैं। उनके नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी जालंधर शहरी संगठन और अधिक मजबूत होगा तथा आगामी चुनावों में जालंधर की सभी विधानसभा सीटों पर विजय प्राप्त करेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में संगठन नए आयाम स्थापित करेगा और पार्टी की जनसेवा की भावना को और अधिक मजबूती मिलेगी।

    इस अवसर पर मानव अधिकार परिषद (भारत) के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने भी अशोक सरीन हिक्की को शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल कार्यकाल की कामना की। इस मौके पर उपस्थित प्रमुख सदस्यों में संदीप गगन, रूपेश धवन, प्रबल उप्पल, रजत खत्री,  वीरेंद्र अंगुराल, अनिल बजाज, भूपिंदर सिंह, सुमन चौधरी सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

     

  • 1949 में स्थापित ऐतिहासिक ‘लाजपत राय वाटर वर्क्स’ टाहलीवाल जलापूर्ति योजना बनेगी हेरिटेज म्यूजियम

    1949 में स्थापित ऐतिहासिक ‘लाजपत राय वाटर वर्क्स’ टाहलीवाल जलापूर्ति योजना बनेगी हेरिटेज म्यूजियम

    ऐतिहासिक पंप हाउस और विंटेज मशीनरी का होगा पुनर्संरक्षण- मुकेश अग्निहोत्री

    ऊना,सुशील पंडित: उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि बीत क्षेत्र में सन् 1949 में स्थापित ऐतिहासिक ‘लाजपत राय वाटर वर्क्स’ टाहलीवाल जलापूर्ति योजना को ‘वाटर सप्लाई हेरिटेज म्यूजियम’ के रूप में विकसित किया जाएगा। योजना के ऐतिहासिक पंप हाउस, उसमें स्थापित विंटेज पम्पिंग मशीनरी, तकनीकी अभिलेखों तथा जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़ी धरोहर का पुनर्संरक्षण कर संरक्षित किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने शनिवार को योजना का निरीक्षण करने के उपरांत जल शक्ति विभाग को आवश्यक निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक पंप हाउस में आज भी उस समय की विशाल विंटेज पम्पिंग मशीनें, फ्लाई-व्हील संचालित उपकरण तथा मूल संरचना सुरक्षित है, जो तत्कालीन अभियंत्रिकी कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण है। इन सभी ऐतिहासिक धरोहरों को यथावत संरक्षित किया जाएगा। साथ ही प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध पुरानी एवं ऐतिहासिक जलापूर्ति मशीनरी को भी यहां लाकर प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि प्रदेश में पेयजल व्यवस्था के विकास की ऐतिहासिक यात्रा को एक स्थान पर संजोया जा सके।

    1949 में हुआ था योजना का उद्घाटन

    मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक योजना का उद्घाटन 6 दिसंबर 1949 को तत्कालीन पूर्वी पंजाब के राज्यपाल सर चंदूलाल एम. त्रिवेदी ने किया था। उस समय योजना का नाम ‘लाजपत राय वाटर वर्क्स’ रखा गया था। इसका निर्माण तत्कालीन लोक निर्माण एवं जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा कराया गया था तथा इसमें स्थापित मशीनरी विशेष रूप से इंग्लैंड से मंगवाई गई थी।

    31 गांवों की 20 हजार आबादी के लिए बनाई गई थी योजना

    उन्होंने बताया कि यह योजना उस समय बीत क्षेत्र के 31 गांवों की लगभग 20 हजार आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए तैयार की गई थी। इसमें 156 हॉर्स पावर के दो रसटन डीजल इंजन स्थापित किए गए थे, जिनके माध्यम से वर्ष 1974 तक पेयजल की आपूर्ति होती रही। बाद में बिजली से संचालित आधुनिक पम्पिंग व्यवस्था शुरू हुई, जबकि ऐतिहासिक पंप हाउस और उस समय की मशीनरी आज भी सुरक्षित है।

    आजादी के बाद की तकनीकी विरासत का जीवंत उदाहरण

    उन्होंने कहा कि देश की आजादी के समय की परिस्थितियों का अंदाजा इस योजना से लगाया जा सकता है। सीमित संसाधनों में तैयार की गई यह परियोजना उस दौर की तकनीकी दक्षता और दूरदर्शिता का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में आधुनिक पेयजल योजनाएं कार्य कर रही हैं, लेकिन यह ऐतिहासिक योजना दशकों तक बीत क्षेत्र के लोगों के लिए जीवनरेखा बनी रही और प्रदेश में जलापूर्ति व्यवस्था की मजबूत नींव रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    नई पीढ़ी को मिलेगा इतिहास से जुड़ने का अवसर

    उन्होंने कहा कि हेरिटेज म्यूजियम के रूप में विकसित होने के बाद यह परिसर विद्यार्थियों, अभियंताओं, शोधकर्ताओं और आम लोगों के लिए ज्ञान का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। यहां ऐतिहासिक पंप हाउस, विंटेज मशीनरी, तकनीकी अभिलेखों तथा प्रदेश में जलापूर्ति व्यवस्था के विकास से जुड़े दस्तावेजों को संरक्षित कर प्रदर्शित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे आने वाली पीढ़ियां प्रदेश की सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियंत्रिकी के इतिहास और उस दौर के अभियंताओं एवं अधिकारियों के योगदान को निकट से जान सकेंगी।

     

     

     

  • हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र लिख रहे हैं विकास की नई इबारत

    हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र लिख रहे हैं विकास की नई इबारत

    दुर्गम क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को मिला नया संबल

    शिमला: प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों की विषम भौगोलिक और जलवायु संबंधी प्रतिकूलताओं केे कारण इन क्षेत्रों में विकास संबंधी गतिविधियां चुनौतियों से भरी रहती है। लाहौल-स्पीति, किन्नौर, पांगी और भरमौर जैसे दुर्गम, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कम आबादी, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और लंबे समय तक रहने वाली बर्फबारी विकास कार्यों तथा जनसेवाओं की पहुंच को चुनौतीपूर्ण बनाती रही हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जनजातीय विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, आजीविका, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्र राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 42.49 प्रतिशत हिस्सा हैं जबकि यहां केवल 3.92 लाख लोग रहते हैं जो प्रदेश की कुल आबादी का 5.71 प्रतिशत हैं। इन क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व मात्र सात व्यक्ति प्रतिवर्ग किलोमीटर है जबकि प्रदेश का औसत 123 व्यक्ति प्रतिवर्ग किलोमीटर है। इन विषम परिस्थितियों के बावजूद राज्य सरकार ने सभी स्थायी और मौसमी जनजातीय बस्तियों में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण और सुरक्षित पेयजल सुविधा सुनिश्चित की है। जनजातीय क्षेत्रों का लिंगानुपात भी प्रति एक हजार पुरुषों पर 1,018 महिलाएं है जो राज्य के औसत 972 से कहीं बेहतर है। जनजातीय क्षेत्रों के विकास को प्रमुख्ता प्रदान करते हुए सरकार हर वर्ष अपनी विकास योजनाओं के कुल बजट का नौ प्रतिशत हिस्सा ट्राइबल सब-प्लान (एसटीपी) के तहत निर्धारित करती है जो अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या के अनुपात से भी अधिक है। वर्ष 2024-25 में एसटीपी के तहत 890.28 करोड़ रुपये और 2025-26 में 638.73 करोड़ रुपये अनुसूचित जनजाति घटक के लिए आवंटित किए गए हैं। सरकार जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है। वर्ष 2025-26 में 3,361 विद्यार्थियों को प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति, 5,693 विद्यार्थियों को पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति तथा 304 मेधावी छात्रों को मेरिट छात्रवृत्ति प्रदान की गई। प्रदेश में संचालित चार एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में 1,008 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और यहां के छात्र आईआईटी, मेडिकल कॉलेज, आईआईएसईआर सहित देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश प्राप्त कर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में छात्रावास, पुस्तकालय और शिक्षकों के आवास जैसी सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का भी व्यापक विस्तार हुआ है। यहां दो जिला अस्पताल, छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 49 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 123 स्वास्थ्य उपकेंद्र सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा 568 आंगनवाड़ी केंद्र मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा पोषण सेवाएं उपलब्ध करवा रहे हैं, जिनसे 5,084 लाभार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। राज्य सरकार की एक बड़ी उपलब्धि लाहौल-स्पीति और भरमौर में आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों की स्थापना है। इन संस्थानों में विशेषज्ञ चिकित्सकों, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी आधुनिक जांच सुविधाओं, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं तथा प्रशिक्षित नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता से दूरदराज के लोगों को अब बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं घर-द्वार के निकट ही सुनिश्चित हो रही हैं। सरकार जनजातीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 9,000 क्विंटल प्रमाणित बीज और 3,200 मीट्रिक टन उर्वरक लगभग 197.05 लाख रुपये की लागत से वितरित किए गए। पिछले तीन वर्षों में 815 जनजातीय युवाओं को ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 577 युवाओं ने रोजगार प्राप्त किया या स्वयं का व्यवसाय स्थापित किया। इसके साथ-साथ 2025-26 के दौरान 6,576 अनुसूचित जनजाति युवाओं ने रोजगार कार्यालयों में अपना पंजीकरण करवाया है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न आजीविका कार्यक्रमों के माध्यम से 3,234 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। इसके साथ ही पात्र महिलाओं को इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत प्रतिमाह 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है, जिससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिली है। राज्य के 75 वर्षों के इतिहास में पहली बार स्पीति घाटी के काजा में हिमाचल दिवस का आयोजन किया गया। इस आयोजन के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों तक शासन की पहुंच को सुनिश्चित किया गया और समावेशी विकास की प्रतिबद्धता का संदेश दिया गया। जनजातीय क्षेत्रों में आधारभूत संरचना के विकास को गति देने के लिए शिक्षकों के लिए आवासीय परिसर, सिविल अस्पताल, आंगनवाड़ी केंद्र, सम्मेलन-सह-पुस्तकालय भवन, जनजातीय संग्रहालय, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के छात्रावास तथा लदारचा पर्यटन पार्क एवं कॉम्प्लेक्स जैसी अनेक परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इन परियोजनाओं से पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिल रही है। सरकार जनजातीय क्षेत्रों में सतत आजीविका को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन और नवीकरणीय ऊर्जा पर विशेष ध्यान दे रही है। होम-स्टे स्थापित करने, उनका विस्तार करने अथवा उन्नयन के लिए पांच करोड़ रुपये तक के निवेश पर पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। इसी प्रकार राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना के तहत निजी भूमि पर 100 किलोवाट से दो मेगावाट तक की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने के लिए भी पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान उपलब्ध करवाया जा रहा है। पांगी घाटी को प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती उपमंडल घोषित कर एक नई पहल की गई है। पांच करोड़ रुपये के रिवॉल्विंग फंड और प्राकृृतिक रूप से उगाई गई जौ के लिए 80 रुपये प्रति किलोग्राम के न्यूनतम समर्थन मूल्य ने यहां रसायन-मुक्त और जलवायु-अनुकूल खेती को नई दिशा दी है। दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भारतनेट परियोजना के तहत 3,793 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाई गई है, जिससे 705 ग्राम पंचायतें डिजिटल नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं। इससे ई-गवर्नेंस, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा और बैंकिंग सेवाएं अब गांव-गांव तक पहुंच रही हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत प्रदेश के 10 जिलों के 270 गांवों का चयन किया गया है। 17 मंत्रालयों द्वारा 25 विभिन्न हस्तक्षेपों के माध्यम से इन गांवों में समग्र विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। इस अभियान के तहत हर घर नल से जल, भारतनेट कनेक्टिविटी, एलपीजी गैस की पहुंच तथा विभिन्न आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। राज्य सरकार विकास के साथ-साथ जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को भी समान महत्व दे रही है। जनजातीय संग्रहालयों, सामुदायिक पुस्तकालयों और सांस्कृतिक अधोसंरचना को सुदृढ़ किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त जलागम प्रबंधन, प्राकृतिक खेती और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देकर हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण की दिशा में भी महत्त्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हिमाचल प्रदेश ने यह साबित किया है कि दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, संवेदनशील प्रशासन और दूरदर्शी योजनाओं के माध्यम से विकास की रोशनी प्रदेश के दुर्गम गांवों तक पहुंचाई जा सकती है। शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, आधारभूत ढांचे, पर्यटन, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और सतत आजीविका के क्षेत्र में किए जा रहे निवेश से जनजातीय समुदायों का जीवन स्तर बेहतर हुआ हैं। प्रदेश सरकार उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए समावेशी और संतुलित विकास को बढ़ावा दे रही है। जनजातीय विकास का हिमाचली मॉडल देश के सामने एक प्रेरक उदाहरण स्थापित कर रहा है।