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पंजाब में मौसमी बीमारियों के खिलाफ मजबूत कवच बन रही ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’

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पंजाब में मौसमी बीमारियों के खिलाफ मजबूत कवच बन रही ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’

चंडीगढ़: पंजाब में बदलते मौसम और बढ़ती उमस के बीच मौसमी बीमारियों के मामलों में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। सरकारी अस्पतालों में बुखार, श्वसन संक्रमण और पेट संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) के आंकड़ों के अनुसार, भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत पिछले चार महीनों में एक्यूट फेब्राइल इलनेस के 5,840 मामले दर्ज किए गए, जिन पर करीब ₹1.31 करोड़ के कैशलेस इलाज दावे किए गए। इसके अलावा एंटरिक फीवर, निमोनिया और एक्यूट ब्रोंकाइटिस के मामलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बारिश, मच्छरों की बढ़ती संख्या और खराब स्वच्छता के कारण आने वाले दिनों में मौसमी बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है। सिविल अस्पताल पटियाला के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. विकास गोयल ने कहा कि अत्यधिक गर्मी और उमस के कारण बुखार, उल्टी, दस्त, सिरदर्द और श्वसन संक्रमण जैसे मामले हर साल बढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है क्योंकि इससे उन्हें बिना आर्थिक बोझ के समय पर कैशलेस इलाज मिल रहा है, जिससे इलाज में देरी की संभावना कम होती है।

वहीं, गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज फरीदकोट के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शशि कांत धीर ने बच्चों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चे और शिशु अत्यधिक गर्मी और संक्रमण की चपेट में जल्दी आते हैं। उन्होंने अभिभावकों, आशा वर्करों, आंगनवाड़ी कर्मचारियों और स्कूलों से जागरूकता अभियान, स्वच्छता और टीकाकरण पर विशेष ध्यान देने की अपील की। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर इलाज और जागरूकता ही मौसमी बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

 

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