अमृतसरः जिले के भिंड़ियां सैदां गांव में 7 से 8 महीने पहले हुए खूनी टकराव का मामला एक बार फिर गरमा गया है। इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। आप पार्टी की नेत्री सोनिया मान ने कहा कि हमले के मुख्य आरोपी अब तक गिरफ्तार नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस पर राजनीतिक दबाव के कारण कार्रवाई रुकी हुई है। सोनिया मान ने बताया कि पंचायत और ब्लॉक समिति चुनावों के दौरान तनाव बना था, जिसके बाद बड़ा हमला हुआ।
उन्होंने कहा कि हमले में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे, कुछ को अमनदीप अस्पताल में दाखिल कराना पड़ा और एक व्यक्ति का ब्रेन ऑपरेशन भी हुआ था। उन्होंने कहा कि मुख्य आरोपी सरजीत सरपंच को अब तक पुलिस नहीं पकड़ सकी है, जबकि हाईकोर्ट द्वारा भी उसकी जमानत रद्द की जा चुकी है। सोनिया मान ने कहा कि जब तक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होती, वे इंसाफ के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। दूसरी तरफ, कनक वधने के मसले को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भंडारी पुल पर धरना दिया, जिससे मामला और राजनीतिक स्वरूप ले लिया।
दूसरी ओर डीएसपी धर्मिंदर कल्याण ने कहा कि यह दो पक्षों के बीच आपसी झगड़े का मामला है, जो बाद में गंभीर हो गया। उन्होंने बताया कि कुछ आरोपियों की जमानत हो चुकी है, जबकि बाकी की तलाश जारी है और जल्द गिरफ्तारियां की जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के तहत निष्पक्ष कार्रवाई कर रही है। फिलहाल इस मामले को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है और सबकी नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।












सर्वेक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने लगभग 140 परिवारों (households) से घर-घर जाकर प्रत्यक्ष संवाद स्थापित किया और उनके सामाजिक-आर्थिक जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी एकत्रित की। इस डेटा संग्रहण में परिवार संरचना, शिक्षा स्तर, रोजगार एवं आय के स्रोत, कृषि गतिविधियां, आवास की स्थिति तथा मूलभूत सुविधाओं—जैसे स्वच्छ पेयजल, बिजली, शौचालय, एलपीजी गैस और इंटरनेट—की उपलब्धता का विश्लेषण किया गया।
इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य योजनाओं की स्थिति तथा मनरेगा, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री आवास योजना, जनधन योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी सरकारी योजनाओं के लाभों की पहुंच का भी आकलन किया गया।
सर्वेक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने डेटा संग्रहण में आने वाली चुनौतियों को भी अपने प्राध्यापकों के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर लोगों ने प्रारंभ में जानकारी देने में झिझक दिखाई तथा कुछ परिवारों ने निजी जानकारी साझा करने में संकोच किया। इसके अलावा दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच, समय की कमी, भाषा व संचार से जुड़ी कठिनाइयां तथा अधूरी या अस्पष्ट जानकारी जैसी समस्याएं भी सामने आईं। हालांकि, प्राध्यापकों के मार्गदर्शन और टीमवर्क के माध्यम से विद्यार्थियों ने इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक समाधान किया और सर्वेक्षण को पूर्ण किया।
सर्वेक्षण के निष्कर्षों में यह सामने आया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसर, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं तक सीमित पहुंच तथा बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। वहीं कुछ क्षेत्रों में पर्यटन एवं सहायक गतिविधियों के माध्यम से आय के नए अवसर विकसित होने की संभावनाएं भी देखी गईं। प्राचार्य डॉ. मीता शर्मा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के फील्ड सर्वे विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करते हैं और उनके शोध कौशल को सुदृढ़ बनाते हैं। यह पहल विद्यार्थियों के समग्र विकास के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति को उजागर करने में भी सहायक सिद्ध होगी।


