चंडीगढ़: हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिला स्तर पर निवेशकों के किसी भी आवेदन में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी आवेदन में कोई कमी या आपत्ति हो तो संबंधित अधिकारी सभी आपत्तियां एक ही बार में दर्ज करें, ताकि निवेशकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और समयबद्ध तरीके से अनुमतियां मिल सकें।
राव नरबीर सिंह आज हरियाणा सिविल सचिवालय स्थित एनआईसी केंद्र में पर्यावरण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों, जिला उद्योग अधिकारियों तथा औद्योगिक सम्पदा अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल, महानिदेशक यश गर्ग तथा एचएसआईआईडीसी के प्रबंध निदेशक सुशील सारवान भी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार का लक्ष्य प्रदेश को निवेश के लिए सबसे अनुकूल राज्य बनाना है। इसके लिए अनुमोदन प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाया जाना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निवेशकों को विभागीय प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। बैठक में डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि विभाग यूनिफाइड सिंगल विंडो सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके तहत नया एसडब्ल्यूएस पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिसे राजस्व विभाग के भू-अभिलेखों के साथ एकीकृत किया जाएगा। एचएसआईआईडीसी की औद्योगिक सम्पदाओं में उपलब्ध खाली भूखंडों की जानकारी भी पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी।
निवेशकों की सुविधा के लिए पोर्टल पर निकटतम रेलवे स्टेशन, बिजली एवं पानी की उपलब्धता जैसी आधारभूत सुविधाओं की जानकारी भी उपलब्ध होगी। साथ ही इसे जीआईएस तकनीक से जोड़ा जाएगा, जिससे निवेशकों को उपयुक्त स्थान के चयन में आसानी होगी। बैठक में यह भी बताया गया कि निवेशकों के लिए दस्तावेज संग्रहण केंद्र, मार्गदर्शन सेवाओं तथा आवश्यक अनुमतियों की विस्तृत जानकारी भी इसी पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा जिला एवं राज्य स्तर पर कारोबार सुधार कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जिससे निवेश प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाया जा सके।
समीक्षा बैठक के दौरान राव नरबीर सिंह ने ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में आरडब्ल्यूए से संबंधित लगाता मिल रही शिकायतों का भी संज्ञान लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अपार्टमेंट सोसायटी अधिनियम में आवश्यक संशोधनों के लिए नीति तैयार की जाए, ताकि निवासियों की समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
एमएसएमई विभाग के अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की सहायता के लिए बीडीएस हेल्पडेस्क तथा ‘उद्योग साथी’ नियुक्त किए गए हैं, जो निवेशकों को विभिन्न योजनाओं, अनुमतियों और प्रक्रियाओं संबंधी मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। इसके लिए शीघ्र ही ‘संगम पोर्टल’ भी शुरू किया जाएगा, जिसमें केंद्र सरकार की ‘जीरो इफेक्ट, जीरो डिफेक्ट’ नीति को विशेष रूप से शामिल किया जाएगा। उद्योग मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए निवेशकों को त्वरित एवं पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।







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एलपीयू के फाउंडर चांसलर और सांसद (राज्यसभा) डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने कहा, “हमारे छात्र लगातार यह साबित कर रहे हैं कि अगर सही मौके मिलें, तो टैलेंट ग्लोबल लेवल पर मुकाबला कर सकता है और नेतृत्व कर सकता है। यह देखकर बहुत खुशी होती है कि एलपीयू के ग्रेजुएट अलग-अलग सेक्टर में दुनिया की कुछ सबसे प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ सफल करियर बना रहे हैं। एलपीयू ने हमेशा ऐसी शिक्षा देने पर ध्यान दिया है जिसमें एकेडमिक एक्सीलेंस के साथ-साथ प्रैक्टिकल अनुभव भी शामिल हो, ताकि हमारे छात्र अपने प्रोफेशनल सफर की शुरुआत से ही योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।


