ऊना/सुशील पंडित: प्राकृतिक खेती अब हिमाचल के किसानों के लिए सिर्फ विकल्प नहीं, भरोसे की खेती बनती जा रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट में प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी के फैसले ने इस भरोसे को और मजबूत किया है। सरकार ने प्राकृतिक खेती से उगाए गए गेहूं का एमएसपी 60 से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्का का 40 से 50 रुपये और हल्दी का 90 से 150 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया है। इस बढ़ोतरी से किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस फैसले को सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है। किसानों का कहना है कि जब फसल का सही मूल्य मिलेगा, तो प्राकृतिक खेती अपनाने का उत्साह भी बढ़ेगा। ऊना ज़िला के किसान सरकार के एमएसपी वृद्धि के निर्णय को दूरदर्शी सोच और किसान हितैषी बता रहे हैं। इसके लिए उन्होंने एकस्वर में प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया है।
ऊना ब्लॉक के मलाहत गांव के प्रगतिशील किसान केवल चंद का कहना है कि मक्की, गेहूं और हल्दी के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी करना प्रदेश सरकार का निर्णय अत्यंत सराहनीय है। यह निर्णय और भी किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित करेगा तथा युवाओं में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुखू का इस जनहितैषी पहल के लिए धन्यवाद किया।
वहीं, घालूवाल के किसान कुलवंत सिंह, जो पिछले सात–आठ वर्षों से प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं, ने भी सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि वह गेहूं, मक्की, चना, मसूर, प्याज सहित अनेक फसलों का उत्पादन प्राकृतिक पद्धति से कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती से उनके जैसे किसानों की आर्थिक स्थिति तो सुधरी ही है, इससे उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि हुई है।
एक सुकून यह भी है कि हम इसके जरिए जहरमुक्त स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद उपलब्ध करवा रहे हैं। कुलवंत सिंह के अनुसार सरकार का एमएसपी बढ़ोतरी का ऐतिहासिक निर्णय प्रदेश में रसायनमुक्त खेती को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा। इससे अधिक से अधिक किसान व युवा प्राकृतिक खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे। साथ ही, यह कदम किसानों को आत्मनिर्भर बनाने तथा कृषि क्षेत्र को स्थायी व सशक्त दिशा देने वाला है।
प्राकृतिक खेती को मिलेगी नई गति
आत्मा परियोजना की उपनिदेशक डॉ. प्यारो देवी के अनुसार, ऊना जिले में 14,240 किसान पहले ही प्राकृतिक खेती से जुड़े हुए हैं। एमएसपी में वृद्धि से इन किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और अन्य किसानों का रुझान भी इस ओर बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण देकर इस अभियान को और सशक्त किया जा रहा है।
आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी पहल
उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशानुसार जिले में किसान हितैषी योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत किसानों तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जा रहा है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बने और खाने की थाली तक शुद्धता पहुंचे।







हरियाणा में जनगणना का प्रथम चरण 1 मई से 30 मई, 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें मकानों की गणना एवं सूचीकरण का कार्य पूरा किया जाएगा। इससे पूर्व 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक नागरिकों को डिजिटली स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जो डिजिटल भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सटीक और विश्वसनीय जनगणना आंकड़े ही ऐसी नीतियों और योजनाओं के निर्माण को सुनिश्चित करते हैं, जो समाज के प्रत्येक वर्ग तक प्रभावी रूप से पहुंच सकें। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए मंत्र ‘हमारी जनगणना, हमारा विकास’ को दोहराते हुए कहा कि यह संकल्प हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी से ही साकार होगा।
भारत में जनगणना का गौरवशाली इतिहास रहा है, जिसकी व्यवस्थित शुरुआत वर्ष 1872 में हुई थी। स्वतंत्रता के बाद यह देश की 8वीं और हरियाणा के गठन के बाद 6वीं जनगणना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना के सटीक आंकड़े ही राज्य और देश की विकास योजनाओं की नींव होते हैं। स्कूलों, अस्पतालों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण से लेकर गरीब एवं जरूरतमंदों के लिए योजनाओं के निर्माण तक हर नीति की आधारशिला सही जनगणना आंकड़े ही होते हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे अपने परिवार की सही और पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि योजनाएं प्रभावी और न्यायसंगत बन सकें।
इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जा रही है, जिससे यह अधिक पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनेगी। स्व-गणना सुविधा के तहत नागरिक अपने मोबाइल, टैबलेट या कंप्यूटर के माध्यम से घर बैठे अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए se.census.gov.in पोर्टल विकसित किया गया है, जहां नागरिक मोबाइल नंबर के माध्यम से ओटीपी आधारित लॉगिन कर अपने राज्य, जिला और स्थानीय विवरण का चयन कर डिजिटल मानचित्र पर अपने घर को चिह्नित करेंगे और परिवार एवं आवास से संबंधित जानकारी दर्ज करेंगे। मुख्यमंत्री ने इस प्रक्रिया को सरल, सुरक्षित और गोपनीय बताया।
युवाओं, स्वयं सहायता समूहों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, पंचायत प्रतिनिधियों, नगर पार्षदों और समाज के जागरूक वर्गों से इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी मिलकर लोगों को जागरूक करें और सुनिश्चित करें कि कोई भी परिवार इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया से वंचित न रहे। उन्होंने जनगणना से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को इस अभियान की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि जनगणना में हिस्सा लें और इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य को मिलकर सफल बनाएं।
निदेशक, जनगणना ललित जैन ने कहा कि आज हरियाणा के 51000 एन्यूमरेशन ब्लॉक्स को डिजिटलाइज कर दिया है और इनका सारा नजीर नक्शा पोर्टल पर उपलब्ध है, जिससे राज्य के नागरिक आसानी से स्व गणना कर सकेंगे। यह सारा डेटाबेस हरियाणा के विकास के लिए सहायक होगा। उन्होंने बताया कि डिजिटल जनगणना के लिए नागरिक मोबाइल एप्लीकेशन और पोर्टल के माध्यम से कहीं से भी बड़ी आसानी से स्व गणना कर सकता है। इस डिजिटल सेंसस से समय की बचत होगी।
इस अवसर पर मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव हेमा शर्मा, सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) वर्षा खांगवाल, अतिरिक्त निदेशक मनीष लोहान, मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीण आत्रेय उपस्थित रहे।


